PoK के हालात देख उमर अब्दुल्ला बोले- आज लगता है 80 साल पहले सही फैसला लिया गया था
PoJK के मौजूदा हालात पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 80 साल पहले भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय का फैसला सही था। बोले- ‘हमलावर खबरदार’ कहने वाले सही थे।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) को लेकर बड़ा बयान दिया। श्रीनगर में तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि LoC के उस पार के हालात देखकर उन्हें महसूस होता है कि करीब 80 साल पहले देश के नेताओं ने जो फैसला लिया था, वह सही था। उन्होंने कहा कि ‘हमलावर खबरदार’ का नारा लगाने वाले लोग सही थे और उनके बलिदान पूरी तरह जायज थे।
जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि LoC के दूसरी तरफ जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर दर्द, अफसोस और गहरी तकलीफ होती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब PoJK में हाल के महीनों में पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों के मारे जाने और घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
‘80 साल पहले लिया गया फैसला सही था’
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बोलते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब वह LoC के उस पार के मौजूदा हालात देखते हैं तो उन्हें लगता है कि करीब 80 साल पहले भारतीय नेताओं ने जो फैसला लिया था, वह सही था। उन्होंने कहा कि उस समय जिन लोगों ने ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’ का नारा लगाया था, वे सही थे। उमर ने यह भी कहा कि उस दौर में लोगों ने जो बलिदान दिया, वह पूरी तरह उचित था।
उनके बयान का सीधा संदर्भ 1947 के उस दौर से है, जब जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद वहां संघर्ष शुरू हुआ था। इसी दौरान कश्मीर में हमलावरों के खिलाफ लोगों की लामबंदी और प्रतिरोध की आवाजें उठी थीं।
‘LoC के उस पार के लोगों को हम अपना मानते हैं’
उमर अब्दुल्ला ने PoJK में रहने वाले लोगों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए LoC के दूसरी तरफ रहने वाले लोग अपने ही हैं और उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति की तरह नहीं देखा जाता।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह महसूस होता है कि अगर 2019 में परिस्थितियां नहीं बदली होतीं, तो संभव है कि उस क्षेत्र के जम्मू-कश्मीर के लोग आज भारत के साथ दोबारा जुड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते। उमर ने कहा कि वह हिस्सा जम्मू-कश्मीर का है और वहां रहने वाले लोगों को वे अपना मानते हैं। उनके मुताबिक, “कोई अजनबी नहीं है, कोई बाहरी नहीं है।”
विधानसभा में आज भी PoJK के लिए सीटें
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoJK के लिए रखी गई सीटों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज भी इन लोगों के लिए विधानसभा में सीटें रखी गई हैं और उम्मीद है कि किसी दिन वे लोग इन खाली सीटों पर आकर उनका इस्तेमाल कर सकेंगे।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 24 सीटें अलग रखी गई हैं। इन सीटों पर मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव नहीं होते और ये सीटें खाली रहती हैं। 2022 के परिसीमन के बाद भी PoJK के लिए रखी गई इन 24 सीटों को अलग रखा गया था।
यानी मौजूदा जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 सीटों पर चुनाव होते हैं, जबकि PoJK के लिए निर्धारित 24 सीटें अलग हैं। यही व्यवस्था भारत के उस संवैधानिक और राजनीतिक दावे को भी दर्शाती है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है।
2019 का भी किया जिक्र
उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में 2019 के बदलावों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय परिस्थितियां नहीं बदली होतीं तो PoJK के लोग शायद आज भारत के साथ जुड़ने के लिए आवाज उठा रहे होते। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन हुआ और 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आए।
लोकतंत्र और संघवाद को बताया देश की ताकत
उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में केवल PoJK का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को भी देश की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की हर कीमत पर रक्षा करना, हर परिस्थिति में उसे मजबूत करना और उसे जीवित रखना देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही उन्होंने संघवाद की रक्षा और उसे मजबूत करने को भी ऐसी जिम्मेदारी बताया, जिससे पीछे नहीं हटा जा सकता।