भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
July 28, 2026

Inauguration of the International Seminar : शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में आज “राष्ट्रीय एकीकरण में तिलक की भूमिका” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) का शुभारंभ हुआ।
लोकमान्य तिलक के विचारों पर मंथन
संगोष्ठी की विषय-वस्तु तिलक के राष्ट्रनिर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, धार्मिक बहुलता और भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके योगदान पर केंद्रित है। संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान सदैव ऐसे अकादमिक विमर्शों को प्रोत्साहित करता रहा है, जो भारतीय बौद्धिक परंपराओं को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक केवल स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूत ही नहीं थे, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आत्मगौरव और राष्ट्रीय एकता के प्रखर प्रवक्ता भी थे। उनके विचार आज भी राष्ट्र जीवन को दिशा प्रदान करते हैं। संगोष्ठी के संयोजक एवं भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के राष्ट्रीय फेलो प्रो. आर. सी. सिन्हा ने विषय-परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि तिलक के व्यक्तित्व और कृतित्व को केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने गीता रहस्य के माध्यम से कर्मयोग की ऐसी व्याख्या प्रस्तुत की, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान किया। उन्होंने यह भी कहा कि तिलक ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जन-जागरण का माध्यम बनाकर राष्ट्रीय चेतना को व्यापक स्वरूप दिया।
तिलक ने जगाई राष्ट्रीय चेतना: प्रो. अग्निहोत्री
उद्घाटन भाषण देते हुए प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, पूर्व कुलपति, केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा कार्यकारी उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने भारतीय समाज में आत्मविश्वास, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तिलक के लिए स्वराज केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का प्रश्न नहीं था, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक, बौद्धिक और नैतिक आत्मनिर्भरता का भी आधार था। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन, भगवद्गीता और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों की उनकी व्याख्या आज भी राष्ट्र के समक्ष उपस्थित अनेक चुनौतियों के समाधान में प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं और शोधकर्ताओं से भारतीय चिंतन परंपरा के मूल स्रोतों के गंभीर अध्ययन का आह्वान किया।
📍 Location: शिमला (शिमला)