जीरा और सौंफ कहां का खास? राजस्थान-गुजरात में विवाद: रिपोर्ट में दावा- सुगंध और क्वालिटी को लेकर प्रूफ नहीं दिया, फिर भी उंझा को जीआई टैग दिया - Jodhpur News

मेहसाना (गुजरात) के उंझा शहर के जीरा और सौंफ को मिले जीआई (भौगोलिक खासियत) टैग को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इसे लेकर जोधपुर के साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) की ओर से रिव्यू की मांग की गई है। इस सेंटर ने जीआई रजिस्ट्रार को पूरी रिपोर्ट सौंपी

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रिपोर्ट में दावा किया है कि जीरे, सौंफ की सुगंध और क्वालिटी को लेकर कोई प्रूफ नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं जिस सौंफ को लेकर जीआई टैग का दावा किया जा रहा है, वह प्रीमियम सौंफ सिरोही (राजस्थान) से गुजरात की मंडियों में जाती है।

खास बात यह है कि ये दोनों जीआई टैग राजस्थान में होने वाले सौंफ और जीरे की तुलना करके लिए गए हैं। सवाल यह है कि ये राजस्थान से कैसे ​बेहतर है। न तो इनका डेटा पेश किया गया और न ही वेरिफाई​ किया गया।

इस मुद्दे को लेकर SABC के डायरेक्टर डॉ. भागीरथ चौधरी से बात की गई। उन्होंने बताया- इन दो प्रोडक्ट को लेकर जो क्लेम किए गए वे सरासर गलत है। इन दोनों का एक ही दिन में रजिस्ट्रेशन करवाया गया और एक ही दिन में इन्हें जीआई टैग मिला।

बाड़मेर जिले के खेत में लगी जीरे की फसल। (फाइल फोटो।)

बाड़मेर जिले के खेत में लगी जीरे की फसल। (फाइल फोटो।)

जीरे के जीआई टैग के खिलाफ रिपोर्ट के 5 पॉइंट

1. रिव्यू की मांग

रिपोर्ट में जीआई टैग की दोबारा रिव्यू की मांग करते हुए जांच के लिए कहा गया। रजिस्ट्रेशन के लिए क्या सभी साइंटिफिक और लीगल प्रोसेस पूरे हुए या नहीं? उंझा (गुजरात) देश का बड़ा जीरा व्यापार केंद्र जरूर है, लेकिन केवल व्यापारिक प्रतिष्ठा के आधार पर किसी उत्पाद को GI टैग नहीं दिया जा सकता। GI का आधार उस क्षेत्र में प्रोडक्शन होने वाली स्पेशल ज्योग्राफिकल विशेषताएं होनी चाहिए।

2. पहचान प्रोडक्शन से या बिजनेस से

रिपोर्ट में पूछा गया कि उंझा में बिकने वाला काफी जीरा राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों से आता है। इसलिए यह जांच जरूरी है कि उंझा जीरा की पहचान क्या उसके प्रोडक्शन से जुड़ी या फिर बिजनेस सेंटर होने से है।

3. सुंगध ओर स्वाद के लिए स्टडी रिपोर्ट नहीं

जीआई के लिए किए गए न्यूट्रिेशन संबंधी दावों पर सवाल उठाए गए। कहा गया- कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के आंकड़ों में RDA और वास्तविक पोषक तत्वों की तुलना एक साथ कर दी गई है, जिससे पोषण संबंधी श्रेष्ठता का दावा भ्रामक हो सकता है। इसमें बेहतर सुगंध और स्वाद का दावा किया गया। इस पर सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि इसके समर्थन में सही तुलनात्मक स्टडी रिपोर्ट नहीं दी गई है।

4. जिन विशेषताओं को बताया वे पौधों की पहचान

रिपोर्ट में कहा गया- एप्लीकेशन में विशिष्टता, एकरूपता और स्थिरता (DUS ) विशेषताओं काे बताया गया। ये पौधों के किस्मों की पहचान के लिए होती है। जीआई प्रूफ करने के लिए नहीं होती है। इतना ही नहीं वाष्पशील तेल (Volatile Compounds) के आधार पर बेहतर गुणवत्ता का दावा जो किया गया वो वैज्ञानिक रूप से प्रूफ नहीं है। इसकी केवल ब्रीफिंग की गई।

5. साइं​टिफिक जांच और सबूतों की दोबारा जांच करने की मांग

रिपोर्ट में अपील की गई है कि उंझा जीरा के लिए दिए गए जियोग्राफिकल रिलेशन, साइंटिफिक प्रूफ और सबूतों की दोबारा जांच की जाए। इसके साथ ही साइंटिफिक सबूत मांगे जाने की भी अपील की गई है।

फोटो सिरोही जिले के किसान की है। यहां की सौंफ प्रीमियम क्वालिटी की मानी जाती है।

फोटो सिरोही जिले के किसान की है। यहां की सौंफ प्रीमियम क्वालिटी की मानी जाती है।

सौंफ के जीआई टैग के खिलाफ रिपोर्ट के 6 पॉइंट

1. सिरोही से गुजरात जाती है सौंफ

बड़ी मात्रा में प्रीमियम सौंफ राजस्थान के सिरोही जिले सहित अन्य क्षेत्रों से भी उंझा (गुजरात) मंडी में जाती है। ऐसे में उत्पादन स्थल और व्यापार स्थल के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

2. सौंफ की क्वालिटी को लेकर साइंटिफिक स्टडी नहीं

SABC ने बताया कि जीआई टैग के लिए दावा किया गया कि उंझा सौंफ की स्पेशल क्वालिटी गुजरात की जलवायु, मिट्टी और पारंपरिक खेती के कारण है। लेकिन ऐसे ही कृषि-जलवायु हालात राजस्थान सहित पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों में भी मौजूद हैं। इसके समर्थन में तुलनात्मक साइंटिफिक स्टडी पेश नहीं की गई।

3. ऑयल पर उठाए सवाल

GC-MS और वॉलेटाइल ऑयल (Essential Oil) संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं। बेहतर सुगंध, मीठे स्वाद और अधिक वॉलेटाइल ऑयल के दावे के समर्थन में पर्याप्त तुलनात्मक वैज्ञानिक प्रमाण, सैंपलिंग, लैब रिपोर्ट या स्टेटिक एनालिसिस उपलब्ध नहीं करवाया गया है।

4. दो राज्यों से बेहतर बताया, लेकिन प्रूफ नहीं

दावा किया गया है कि उंझा (गुजरात) की सौंफ राजस्थान और ह​रियाणा की सौंफ से बेहतर है। लेकिन, इसकी तुलना में न तो लैब रिपोर्ट और न नहीं साइंटिफिक एनालिसिस डेटा पेश किया गया।

5. जो विशेषता बताई वे केवल किस्म की पहचान

रिपोर्ट में कहा गया कि जीआई टैग के आवेदन के लिए विशिष्टता, एकरूपता और स्थिरता (DUS ) विशेषताओं का उपयोग किया गया है, जबकि ये केवल किस्म (Variety) की पहचान के लिए होती है। किसी उत्पाद की भौगोलिक विशिष्टता (GI) सिद्ध करने के लिए नहीं।

6. दावों के लिए साइंटिफिक रिव्यू और स्टडी करने की मांग

रिपोर्ट में कहा गया है इनके पोषण, सुगंध, स्वाद, वॉलेटाइल ऑयल और अन्य गुणवत्ता संबंधी दावों का एफिलेटेड लैबोरेट्री, प्रतिनिधि सैंपलिंग, स्टेटिक एनालिसिस और पीयर-रिव्यू साइंटिफि स्टडी होनी चाहिए।

सिरोही जिले के आबूरोड में सौंफ की फसल होती है। ये सौंफ गुजरात के ऊंझा मंडी में सप्लाई होती है। (फाइल फोटो)

सिरोही जिले के आबूरोड में सौंफ की फसल होती है। ये सौंफ गुजरात के ऊंझा मंडी में सप्लाई होती है। (फाइल फोटो)

SABC के संस्थापक निदेशक बोले- राज्य का विरोध नहीं बात किसानों के सम्मान की

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर जोधपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी का कहना है- हम किसी राज्य के विरोध में नहीं हैं। हमारा उद्देश्य केवल पश्चिमी राजस्थान के लाखों जीरा किसानों के सम्मान और साइंटिफिक फैक्ट का है।

यदि गुजरात के जीरे और सौंफ को उनका वैध अधिकार मिलता है तो हमें उससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, यह दावा कि गुजरात का जीरा और सौंफ राजस्थान से बेहतर गुणवत्ता का है, वैज्ञानिक तथ्यों और वास्तविक उत्पादन परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।