सावन सोमवार पर विशेष : श्रीराम ने की थी बस्तर में शिवजी की पूजा  - Haribhoomi

सावन सोमवार पर विशेष : श्रीराम ने की थी बस्तर में शिवजी की पूजा 

बस्तर में मौजूद भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के लिए श्रद्धा के साथ आकर्षण का केंद्र है।

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  • Published: 03 Aug 2026, 10:15 AM IST
  • Last Updated: 03 Aug 2026, 10:15 AM IST

महेन्द्र विश्वकर्मा- जगदलपुर। बस्तर में मौजूद भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के लिए श्रद्धा के साथ आकर्षण का केंद्र है। रामपाल गांव के इस मंदिर में करीब 220 साल पुरानी घंटी लगी हुई है, इस घंटी में 1806 लंदन लिखा हुआ है। लोग बताते हैं कि तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर ने यह घंटी मंदिर में चढ़ाई थी, तब से यह घंटी मंदिर के प्रांगण में लगी हुई है। इसका वजन करीब 15 किलो है। 

लोहे से बनी इस घंटी में कभी जंग नहीं लगती। कहा जाता है कि अपने 14 साल के वनवास के दौरान जब भगवान राम दंडकारण्य से गुजर रहे थे तबउन्होंने यहां मौजूद शिवलिंग में पूजा-अर्चना की थी। इसलिए बस्तर के प्रसिद्ध शिवधाम में से एक रामपाल गांव को रामवनगमन पथ से भी जोड़ा गया है।

पाँचवीं सदी के अवशेषों से जुड़ी मान्यताएँ
पुरातत्व के जानकार कहते हैं कि,  मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान ग्रामीणों को जो ईंट मिली है, वह पांचवीं सदी की है। इसके अवशेष आज भी मंदिर में मौजूद हैं। मान्यता है कि शिवलिंग प्रभु श्रीराम द्वारा स्थापित की गई है। ग्रामीणों के अनुसार शिवलिंग के दर्शन हुए तब से यहां के ग्रामीणों से चंदा एकत्र कर शिवरात्रि के दौरान मेला का आयोजन कर बाबा लिंगेश्वर की पूजा अर्चना करते हैं

सावन में कांवड़ यात्रा व होंगे धार्मिक अनुष्ठान
रामपाल मंदिर के पुजारी कैलाश ठाकुर ने बताया कि,  पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी सावन माह में रामपाल मंदिर में कांवड़ यात्रा एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना
इतिहास असिस्टेंट प्रोफेसर ओम प्रकाश सोनी ने बताया कि यह शिवलिंग नल काल का है तथा यहां स्थित शिवालय का निर्माण पांचवीं छठी शताब्दी में हुआ था। उस समय दंडकारण्य क्षेत्र शैव साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता था। इसी कारण उस कालखंड में गांव-गांव में शिव मंदिरों का निर्माण हुआ। विशेष बात यह है कि पांचवीं छठी शताब्दी का यह प्राचीन शिवालय आज भी पूजित है और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

शिव के उपासक हैं बस्तर के ग्रामीण
बस्तर को आदिकाल से ही शिवधाम कहा जाता है, यहां के ग्रामीण भगवान शिव और भगवान राम की सैकड़ों सालों से उपासना करते आ रहे हैं। यही वजह है कि बस्तर में हजारों की संख्या में भगवान शिव के मंदिर हैं और सभी मंदिर की अलग-अलग विशेषताएं हैं। जगदलपुर शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रामपाल का शिव मंदिर भी प्रसिद्ध है और इंदावती नदी के पास मौजूद मंदिर में खुदाई के दौरान शिवलिंग मिला था। इस शिवलिंग की गोलाई लगभग 3 से 4 फीट है और कुछ साल पहले की जांच में लगभग 30 फीट से अधिक गहराई पाई गई। ग्रामीण इस शिवलिंग को अटल शिवलिंग कहते हैं जो जमीन की नाभि से मिलता है।

आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक
बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप ने बताया कि उनके गृह ग्राम के समीप स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर मेरे लिए केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का केंद्र भी है। बाल्यकाल से ही में यहां भगवान शिव की आराधना करता आया हूं। यह मंदिर हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

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