गाजियाबाद: बिल्डिंग से कूद जान देने वाली डॉ हमीका कौन थीं? डिप्रेशन का इलाज करने वाली डॉक्टर खुद डेढ़ साल से दर्द में थीं
Ghaziabad News Psychiatrist Death: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित ऑफिसर सिटी-2 सोसाइटी में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई. यहां एक महिला मनोचिकित्सक ने कथित तौर पर पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी. घटना के बाद सोसाइटी में हड़कंप मच गया. आसपास के लोगों ने गंभीर रूप से घायल डॉक्टर को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है.
मृतका की पहचान डॉ. हमीका अग्रवाल के रूप में हुई है. उनके पिता डॉ. आर. चंद्रा गाजियाबाद के जाने-माने मनोचिकित्सक हैं. परिजनों के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पहले डॉ. हमीका का अपने पति से तलाक हो गया था. परिवार का कहना है कि तलाक के बाद वह मानसिक तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थीं. परिजनों के मुताबिक, इस कठिन दौर से उबरने की कोशिशें लगातार की जा रही थीं, लेकिन वह मानसिक रूप से पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रही थीं.
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. एसीपी जियाउद्दीन ने बताया कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
कोई सुसाइड नोट नहीं मिला
पुलिस के अनुसार, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आ सकेगी. स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि तलाक के बाद डॉ. हमीका पर दोबारा विवाह करने का सामाजिक और पारिवारिक दबाव महसूस किया जा रहा था. हालांकि, इस संबंध में अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इसलिए इन दावों को जांच का विषय माना जा रहा है.
इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अवसाद एक ऐसी स्थिति है, जिससे कोई भी व्यक्ति प्रभावित हो सकता है और समय पर इलाज, पारिवारिक सहयोग तथा भावनात्मक समर्थन बेहद जरूरी होता है. डॉ. हमीका स्वयं मनोचिकित्सक थीं और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों का उपचार करती थीं. उनकी मौत ने यह संदेश भी दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं, चाहे वह स्वयं चिकित्सा क्षेत्र से ही क्यों न जुड़ा हो.

संजीव शर्मा, ग़ाज़ियाबाद