गिर से गांवों तक शेरों का सफर, गुजरात में आखिर क्यों बदल रहा है जंगल के राजा का ठिकाना?

गिर से गांवों तक शेरों का सफर, गुजरात में आखिर क्यों बदल रहा है जंगल के राजा का ठिकाना?

गुजरात के गांवों में बढ़ रही शेरों की आवाजाही.

Gujarat News: गुजरात के कई जिलों में पिछले कुछ समय से शेरों के गांवों और शहरों के आसपास दिखाई देने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली और राजकोट जैसे इलाकों में शेरों के सड़क, खेत और रिहायशी क्षेत्रों में घूमते हुए कई वीडियो वायरल हुए हैं. इन घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. सवाल उठ रहा है कि आखिर जंगल का राजा अब इंसानी बस्तियों तक क्यों पहुंच रहा है?

शेरों की बढ़ती संख्या बनी बड़ी वजह

वन विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण गुजरात में एशियाई शेरों की तेजी से बढ़ती आबादी है. वर्ष 1990 में राज्य में शेरों की संख्या करीब 284 थी, जो अब बढ़कर 891 हो चुकी है. यह वन विभाग के संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है, लेकिन बढ़ती आबादी के कारण गिर और आसपास के जंगलों पर दबाव भी बढ़ गया है. सीमित जगह होने की वजह से कई शेर नए इलाकों की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं.

ये भी पढ़ें- 7 शेरों से अकेली गाय ने ली टक्कर, बहादुरी देख पीछे हटे शिकारी; गुजरात के अमरेली का Video

युवा नर शेर खोज रहे हैं नया ठिकाना

विशेषज्ञ बताते हैं कि युवा नर शेर अपना अलग इलाका बनाने के लिए जंगल छोड़ देते हैं. उन्हें भोजन, पानी और प्रजनन के लिए नई जगह की जरूरत होती है. इसी तलाश में वे प्राकृतिक रास्तों से होते हुए गांवों और खेतों तक पहुंच जाते हैं. कई बार ये शेर मानव आबादी के बेहद करीब आ जाते हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बन जाता है.

गांवों में आसानी से मिल जाता है शिकार

जंगल के बाहर भी शेरों को भोजन की कमी नहीं होती. गांवों के आसपास पालतू पशु, आवारा मवेशी और छोटे वन्यजीव आसानी से मिल जाते हैं. इसके अलावा खेतों और झाड़ियों वाले इलाकों में पानी की उपलब्धता भी रहती है. यही वजह है कि कई शेर इन इलाकों में लंबे समय तक रुकने लगे हैं. धीरे-धीरे इन्हें अपना नया ठिकाना बना रहे हैं.

वन क्षेत्रों के आसपास तेजी से हो रहे विकास कार्य, खेती का विस्तार और बढ़ते अतिक्रमण ने भी शेरों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित किया है. जंगल और मानव बस्तियों के बीच की दूरी लगातार कम हो रही है. ऐसे में शेरों और इंसानों का आमना-सामना पहले की तुलना में ज्यादा होने लगा है.

गिर से बाहर भी फैल रहा है शेरों का दायरा

पहले एशियाई शेर केवल गिर जंगल तक सीमित थे, लेकिन अब उनका दायरा लगातार बढ़ रहा है. जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली और राजकोट समेत कई नए इलाकों में शेरों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है. कई क्षेत्रों में उनकी स्थायी गतिविधियां भी देखी जा रही हैं, जिससे साफ है कि वे नए आवास विकसित कर रहे हैं.

वन विभाग लगातार शेरों की निगरानी कर रहा है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि शेरों का संरक्षण और मानव जीवन की सुरक्षा दोनों समान रूप से जरूरी हैं. इसके लिए नए वन क्षेत्रों का विकास, प्राकृतिक गलियारों की सुरक्षा और लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी होगा. तभी इंसानों और शेरों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम किया जा सकेगा.

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

Read More

google button