फिजिकल हेल्थ- बच्चे के सिर का आकार बड़ा है: इग्नोर न करें, ये हाइड्रोसेफेलस हो सकता है, डॉक्टर से समझें इस बीमारी से बचाव और इलाज

फिजिकल हेल्थ- बच्चे के सिर का आकार बड़ा है:इग्नोर न करें, ये हाइड्रोसेफेलस हो सकता है, डॉक्टर से समझें इस बीमारी से बचाव और इलाज

2 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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क्या आपने कभी किसी ऐसे बच्चे को देखा है, जिसका सिर सामान्य से ज्यादा बड़ा हो। जन्म के बाद अगर किसी बच्चे का सिर सामान्य से ज्यादा तेजी से बढ़ने लगे, बार-बार उल्टी हो, सुस्ती रहे या उसकी आंखें नीचे की ओर टिकी दिखाई दें तो इसे सामान्य विकास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह 'हाइड्रोसेफेलस' का संकेत हो सकता है।

इसे आम भाषा में 'ब्रेन में पानी भरना' कहते हैं। लेकिन इसमें पानी नहीं, बल्कि CSF (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) नाम का तरल जमा होता है। समय पर इलाज न मिले तो यह दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि सही समय पर पहचान और उपचार से ज्यादातर मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (NIH) में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 4 लाख से ज्यादा बच्चों में हाइड्रोसेफेलस के नए मामले सामने आते हैं। वहीं, हर 1 लाख लोगों में औसतन 85 लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हाइड्रोसेफेलस के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • हाइड्रोसेफेलस क्याें होता है?
  • इसके शुरूआती संकेत क्या हैं?
  • किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है?

एक्सपर्ट- डॉ. सोनिया लाल गुप्ता, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, नोएडा

सवाल- हाइड्रोसेफेलस क्या है? क्या यह सिर्फ 'दिमाग में पानी भर जाना' है या मामला इससे अलग है?

जवाब- 'हाइड्रोसेफेलस' शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। 'हाइड्रो' यानी पानी और 'सेफेलस' का मतलब है- सिर। इसी वजह से इसे 'दिमाग में पानी भर जाना' कहते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।

इसमें पानी नहीं, बल्कि CSF (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) नाम का साफ, कलरलेस फ्लूइड जमा होता है। यह ब्रेन और रीढ़ की हड्डी को प्रोटेक्ट करता है। CSF जमा होने से ब्रेन पर प्रेशर बढ़ने लगता है और उसका सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है।

सवाल- ब्रेन में सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) क्या काम करता है?

जवाब- CSF ब्रेन और रीढ़ की हड्डी के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। नीचे पॉइंटर्स से डिटेल में समझिए-

  • ब्रेन और रीढ़ की हड्डी को झटकों और चोटों से बचाता है।
  • ब्रेन तक जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है।
  • ब्रेन की सेल्स से बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में मदद करता है।
  • यह ब्रेन के अंदर लगातार बनता और बहता रहता है। काम पूरा होने के बाद शरीर इसे रक्त में दोबारा अवशोषित कर लेता है। जब यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, तब CSF ब्रेन में जमा होने लगता है।

सवाल- हाइड्रोसेफेलस कैसे विकसित होता है?

जवाब- सामान्य स्थिति में ब्रेन के अंदर जितना CSF बनता है, उतना ब्लड में अवशोषित हो जाता है। लेकिन अगर किसी वजह से CSF का फ्लो रुक जाए या ब्लड इसे ठीक से अवशोषित न कर पाए, तो यह ब्रेन में जमा होने लगता है। इससे ब्रेन के अंदर मौजूद वेंट्रिकल्स बड़े हो जाते हैं और ब्रेन पर प्रेशर बढ़ने लगता है। यही स्थिति हाइड्रोसेफेलस कहलाती है।

सवाल- हाइड्रोसेफेलस कितने प्रकार का होता है?

जवाब- हाइड्रोसेफेलस मुख्य रूप से 4 प्रकार का होता है।

1. कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसेफेलस

इसमें CSF बाहर निकलने के बाद उसका फ्लो रुक जाता है या वह ठीक से एब्जॉर्ब नहीं हो पाता।

2. नॉन-कम्युनिकेटिंग (ऑब्स्ट्रक्टिव) हाइड्रोसेफेलस

CSF का रास्ता ब्रेन के अंदर ही ब्लॉक हो जाता है, जिससे फ्लूइड जमा होने लगता है।

3. नॉर्मल प्रेशर हाइड्रोसेफेलस (NPH)

CSF धीरे-धीरे जमा होता है। वेंट्रिकल्स बड़े हो जाते हैं, लेकिन दबाव सामान्य रहता है। यह अक्सर बुजुर्गों में होता है।

4. हाइड्रोसेफेलस एक्स-वैकुओ

सिर में चोट या स्ट्रोक के बाद ब्रेन सिकुड़ने से बनी खाली जगह में CSF भर जाता है। इसमें आमतौर पर दबाव नहीं बढ़ता।

सवाल- किन लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। जैसे-

  • प्री-मेच्याेर बेबी, जिनके ब्रेन में ब्लीडिंग हुई हो।
  • जिन नवजात और छोटे बच्चों को जन्म से ब्रेन से जुड़ी समस्या हो।
  • जिन्हें ब्रेन ट्यूमर या मेनिन्जाइटिस हाे।
  • जिन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ हो।
  • जिनके सिर में गंभीर चोट लगी हो।
  • जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो।

सवाल- हाइड्रोसेफेलस क्यों होता है?

जवाब- इसके कारणों को 2 हिस्सों में बांटा जाता है।

1. जन्मजात

कुछ बच्चों में जन्म से ही यह समस्या होती है। इसकी वजह प्रेग्नेंसी के दौरान जेनेटिक या भ्रूण के विकास से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

2. जन्म के बाद होने वाला

यह किसी भी उम्र में हो सकता है। ग्राफिक में सभी कारण देखिए-

सवाल- अलग-अलग उम्र में इसके लक्षण कैसे बदलते हैं?

जवाब- हाइड्रोसेफेलस के लक्षण हर उम्र में एक जैसे नहीं होते। शिशुओं, बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों में इसके संकेत अलग-अलग हो सकते हैं। ग्राफिक में उम्र के अनुसार इसके सभी संकेत देखिए।

सवाल- कौन-से शुरुआती संकेत ऐसे हैं, जिन्हें लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं?

जवाब- कई बार लोग सिरदर्द, मतली, लड़खड़ाकर चलने या भूलने जैसी समस्याओं को सामान्य परेशानी या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ग्राफिक में सामान्य संकेत देखिए-

सवाल- डॉक्टर हाइड्रोसेफेलस की पुष्टि कैसे करते हैं? इसके लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

जवाब- डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर जरूरत के अनुसार ये टेस्ट कराते हैं-

  • MRI स्कैन- ब्रेन में CSF की मात्रा और वेंट्रिकल्स का साइज देखने के लिए।
  • CT स्कैन- ब्रेन में सूजन, ब्लीडिंग या CSF जमा होने का पता लगाने के लिए।
  • अल्ट्रासाउंड- साउंड वेव्स से नवजात के ब्रेन की तस्वीरें लेकर CSF और वेंट्रिकल्स की स्थिति देखने के लिए।
  • न्यूरोलॉजिकल और मेमोरी टेस्ट- बैलेंस, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता का आकलन करने के लिए।
  • स्पाइनल टैप- कुछ मामलों में CSF निकालकर जांच की जाती है। इससे नॉर्मल प्रेशर हाइड्रोसेफेलस (NPH) का आकलन करने में मदद मिलती है।

सवाल- हाइड्रोसेफेलस का इलाज क्या है? क्या यह दवा से ठीक हो सकता है?

जवाब- इसका इलाज बीमारी के कारण, गंभीरता और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ दवाओं से ठीक नहीं होता। जब ब्रेन में CSF ज्यादा जमा हो जाता है, तो उसे बाहर निकालने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। जैसेकि–

  • शंट सर्जरी: एक पतली ट्यूब लगाकर एक्स्ट्रा CSF को शरीर के दूसरे हिस्से, जैसे पेट में पहुंचाया जाता है।
  • एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रिकुलोस्टॉमी (ETV): कुछ मरीजों में ब्रेन के अंदर CSF के फ्लो के लिए नया रास्ता बनाया जाता है।

सवाल- इलाज में देरी हो तो क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं?

जवाब- समय पर इलाज न होने पर कई तरह के कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं, जैसेकि-

  • याददाश्त और सीखने की क्षमता में कमी।
  • चलने-फिरने और संतुलन बनाने में दिक्कत।
  • नजर कमजोर होना या दृष्टि चली जाना।
  • बार-बार दौरे पड़ना।
  • ब्रेन को स्थायी नुकसान।
  • गंभीर मामलों में जान जा सकती है।

सवाल- सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है? क्या मरीज उसके बाद सामान्य जीवन जी सकता है?

जवाब- हां, लेकिन सर्जरी के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसेकि-

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेगुलर फॉलोअप करें।
  • सर्जरी वाली जगह में दर्द, सूजन या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • अचानक सिरदर्द, उल्टी, धुंधला दिखना या चलने में दिक्कत हो, तो टेस्ट कराएं।
  • दवाएं समय पर लें और खुद से बंद न करें।
  • बच्चों में सिर के आकार, विकास और पढ़ाई-लिखाई पर नजर रखें।

सवाल- क्या हाइड्रोसेफेलस को होने से रोका जा सकता है? किन मामलों में जोखिम कम हो सकता है?

जवाब- हर मामले में हाइड्रोसेफेलस को रोका नहीं जा सकता, खासकर अगर यह जेनेटिक हो। लेकिन कुछ उपायों से इसका रिस्क कम किया जा सकता है। इसके लिए-

  • प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर चेकअप कराएं।
  • प्रेग्नेंसी में संक्रमण से बचाव करें।
  • सिर की चोट से बचने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें।
  • मेनिन्जाइटिस जैसे इन्फेक्शन का समय पर इलाज कराएं।
  • ब्रेन से जुड़ी समस्या का समय पर इलाज कराएं।

सवाल- किन लक्षणों को मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए और तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए?

जवाब- इन स्थितियों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए-

  • अगर मरीज बेहोश हो जाए या दौरे पड़ें।
  • बार-बार तेज उल्टी होने लगे।
  • बोलने, चलने या देखने में अचानक परेशानी हो।
  • तेज सिरदर्द के साथ कन्फ्यूजन, सुस्ती या रिस्पॉन्स कम होने लगे।
  • शिशु दूध पीना बंद कर दे, लगातार सुस्त रहे या दौरे पड़ने लगें।

सवाल- इस बीमारी से जुड़े कॉमन मिथ क्या हैं और उनकी सच्चाई क्या है?

जवाब- हाइड्रोसेफेलस को लेकर लोगों के मन में कई गलतफहमियां हैं। इनकी वजह से कई बार बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो जाती है। ग्राफिक में इससे जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई देखिए-

हाइड्रोसेफेलस एक गंभीर बीमारी है, लेकिन लाइलाज नहीं है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसके कारण होने वाली कई जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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