प्रगटे रघुनाथ, मिटे सकल संताप...आगरा के महाकालेश्वर धाम में श्रीराम जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजे 'जय श्रीराम' के जयकारे - Up18 News

आगरा। यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में चल रहे नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, श्री रुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव के तृतीय दिवस प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान भोलेनाथ का महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ।

संध्या में आयोजित श्रीराम कथा के तृतीय दिवस चित्रकूट धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी ने श्रीराम जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। भगवान श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग सुनते ही कथा पांडाल में “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंज उठे और श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान मानवता के कल्याण के लिए अवतार धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान का अवतार भारतवर्ष की पावन भूमि पर इसलिए होता है क्योंकि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और धर्म की आत्मा है।

भारतवर्ष से ही धर्म, अध्यात्म और मानवता का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित होता है। भगवान के अवतार का उद्देश्य धर्म की पुनर्स्थापना, सज्जनों की रक्षा और अधर्म का विनाश करना है।

उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान ने राजा दशरथ के यहां अवतार लिया। ‘दशरथ’ का अर्थ है वह व्यक्ति जिसने अपनी दसों इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो, जबकि दशानन रावण उन दसों इन्द्रियों के भोग-विलास का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का संदेश है कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में दशानन नहीं, बल्कि दशरथ बनने का प्रयास करना चाहिए। जब मनुष्य अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तभी उसके जीवन में भगवान का वास्तविक प्राकट्य होता है।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम के चारों स्वरूपों के जन्म से संपूर्ण अयोध्या आनंद और उल्लास से भर उठी थी। राजा दशरथ और माता कौशल्या को बधाई देने के लिए अयोध्यावासी उमड़ पड़े थे। श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भी भक्तिरस में डूब गए और भजन-कीर्तन के बीच वातावरण पूरी तरह राममय हो गया।

श्री महाकालेश्वर दरबार के श्री महंत आचार्य पंडित सुनील वशिष्ठ ने रुद्राभिषेक की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि श्री महाकालेश्वर दरबार में आयोजित श्री रुद्र महायज्ञ, रुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है।

इस अवसर पर पंडित रामचरण शर्मा, सुभाष गिरि, सरिता तिवारी, मोहित, दिव्यांश, प्रियंका अग्रवाल, प्रदीप द्विवेदी, नीलू पांडेय आदि उपस्थित रहे।