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देश की स्मार्ट कूटनीति ने भगोड़ों पर कसा शिकंजा!

नरेंद्र मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाया

वर्ष 2019 से अबतक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधी भारत लाए गए

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 5 August 2026 01:42:57 PM

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार में भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 2019 से अबतक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। देश में 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' लागू है और भारत ने भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया आधारित और प्रौद्योगिकी संचालित मॉडल विकसित किया है, जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता साफ हुआ है। ज्ञातव्य हैकि वर्ष 2014 से पहले प्रत्यर्पण के कानून कालबाह्य हो गए थे और केवल 37 देशों केसाथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने केलिए कोई अलग कानून नहीं था। वर्ष 2004 से 2013 केबीच एकवर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था, जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। अधूरे दस्तावेज़ और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल हो थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थीं। कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं जैसे-दोहरे अभियोजन से बचाव और दोहरे अपराध के सिद्धांत के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द कर दिए जाते थे। गृह मंत्रालय और ऐसे कई विभागों में समन्वय व एकीकृत रणनीति का अभाव था और भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमे थे।
नरेंद्र मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाया। भगोड़ों के खिलाफ तीन स्तंभों-वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति पर जोर दिया गया है। भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया है। मोदी सरकार 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 केबाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया मिशन मोड में आगे बढ़ी। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा। वर्ष 2024 में तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। पहलीबार बीएनएसएस की धारा 355 और 356 में 'अनुपस्थिति में मुकद्मा' का प्रावधान रखा गया, इससे भगौड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी। भारत की 2022 में 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी में वैश्विक पुलिसिंग में कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन का संदेश दिया गया।
भारत और वैश्विक एजेंसियों केबीच समन्वय, संपर्क और संवाद केलिए जनवरी 2025 में भारतपोल लॉंच किया गया। भारतपोल ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृतकर व्यापक इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर निर्मित किया। इसके तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के 1400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं। इस कारण सीबीआई और कानून प्रवर्तन एजेंसियों केबीच इन्फार्मेशन शेयरिंग के रिस्पॉन्स टाइम में भारी कमी आई है। अब सीबीआई की मांगी गई जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियां 10 से 20 दिन में और कुछ मामलों में मात्र 3 से 10 दिन में साझा करती हैं। भारत सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून को सख्ती से लागू किया है, इससे वर्ष 2019 से 2026 तक भगौड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 2019 से 2026 तक ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी की गई, इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है। सीबीआई ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने केलिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर स्थापित किया, यह इंटरपोल से दुनियाभर की पुलिस से रियलटाइम समन्वय करता है।
सीबीआई ने सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान केलिए हर राज्य व केंद्रीय जांच एजेंसी में इंटरपोल सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी हुए हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने केलिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई। भगोड़ों द्वारा विदेश में नाम या पहचान बदल ली गई थी, लेकिन फिरभी तकनीक और प्रोफाइल-मैपिंग के ज़रिये उन्हें खोज निकाला गया। प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज करने केलिए वीडियो कॉंफ्रेंसिंग से मुकद्मों की सुनवाई जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। वापस लाए गए भगोड़ों में टेररिस्ट, गैंगस्टर, फाइनेंशियल ऑफेंडर्स, नार्कोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज्म, प्रो-खालिस्तान एक्स्ट्रीमिज्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से एक्स्ट्राडिशन भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है।
जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को टेरर और क्रॉस बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था। देश के अंदर समन्वय में आईबी, सीबीआई, रॉ, एनआईए, ईडी, एमईए, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस की साझा भूमिका रही है। यह मॉडल संपूर्ण सरकार को दर्शाता है, जहां केंद्र और राज्य एजेंसियां मिलकर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही हैं। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर केतहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। यह समूह फ्यूजिटिव प्रायोरिटी, डॉसियर स्टैंडर्डाइजेशन, सूचना गैप हटाने, विदेशी पार्टनर्स से फॉलोअप और राज्य मामलों को राष्ट्रीय समर्थन देता है। विदेशों में बैठे भगोड़े निष्क्रिय केस फाइल्स नहीं, बल्कि लाइव ऑपरेशनल थ्रेट्स हैं। भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सफलता का आधार केवल संयोग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, लीगल तैयारी, डिप्लोमैटिक पर्सिस्टेंस और सतत फॉलो-अप है।