होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते के करीब अमेरिका और ईरान, कई शर्तों पर अब भी मतभेद बरकरार
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होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते के करीब अमेरिका और ईरान, कई शर्तों पर अब भी मतभेद बरकरार
- Edited by: पूजा कुमारी
- Updated Aug 6, 2026, 05:45 AM IST
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। ओमान की मध्यस्थता में तैयार मसौदे पर दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है। हालांकि जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद कायम हैं।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर जल्द हो सकता है बड़ा समझौता (File Photo)
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AP
US Iran Talks: विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब समझौते की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा कि ओमान की मध्यस्थता में तैयार किया जा रहा समझौते का मसौदा अंतिम चरण में है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि इस सप्ताह इस संबंध में बड़ी घोषणा की जा सकती है।
अगर यह समझौता सफल होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी भी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।
ओमान निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ओमान की मध्यस्थता में तैयार किया जा रहा समझौते का मसौदा अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अगर किसी पक्ष की ओर से इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली गई तो जल्द ही संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, ईरान और ओमान के वार्ताकार इस मसौदे को तैयार कर चुके हैं, लेकिन अभी इसे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है।
समझौते में सबसे बड़ा विवाद क्या है?
प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने की योजना है, लेकिन इसके लिए अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, अमेरिका पहले ही साफ कह चुका है कि वह किसी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जिससे ईरान को जलडमरूमध्य पर स्थायी नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार मिले। वहीं ईरान का कहना है कि युद्ध से पहले जैसी पूरी तरह खुली अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी और उसे इस रणनीतिक जलमार्ग पर कुछ स्तर तक नियंत्रण चाहिए।
युद्ध के बाद बढ़ा था तनाव
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। अमेरिका ने बताया था कि इस अभियान का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और तेहरान की सरकार पर दबाव बनाना था। हालांकि युद्ध अपने घोषित लक्ष्यों तक नहीं पहुंच पाया और धीरे-धीरे संघर्ष का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया। ईरान द्वारा जहाजरानी पर नियंत्रण बढ़ाने और कुछ हमलों के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी। मार्ग बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त आई। इसके साथ ही ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा के जरूरी सामानों के दाम भी बढ़े, जिससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया।
परमाणु वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि यह समझौता केवल समुद्री मार्ग खोलने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर रुकी हुई बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना भी बन सकती है। बताया जा रहा है कि जून में दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने और जलडमरूमध्य खोलने को लेकर एक प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी थी। नया मसौदा उसी प्रयास का संशोधित स्वरूप माना जा रहा है।
जहाजों के लिए अलग-अलग मार्ग का प्रस्ताव
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरान के नियंत्रण वाले मार्ग से गुजरेंगे, जबकि बाहर निकलते समय ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग का इस्तेमाल करेंगे। सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए सेवा शुल्क लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। हालांकि अमेरिका ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें ईरान जहाजों से शुल्क वसूले।
दोनों देशों की अभी अंतिम मंजूरी बाकी
फिलहाल समझौते का मसौदा तैयार बताया जा रहा है, लेकिन इसे लागू करने से पहले दोनों देशों की अंतिम राजनीतिक मंजूरी जरूरी होगी। जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और शुल्क जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहने की वजह से समझौते का भविष्य अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि सहमति बनती है तो इससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
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पूजा कुमारीauthor
पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।
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