खिलौने की कैटेगरी में निकाला खाद का टेंडर: जैविक खेती में करोड़ों का घोटाला बीज निगम से दोगुने में खाद खरीदी - Raipur News

खिलौने की कैटेगरी में निकाला खाद का टेंडर:जैविक खेती में करोड़ों का घोटाला बीज निगम से दोगुने में खाद खरीदी

रायपुर44 मिनट पहलेलेखक: अश्विनी पांडेय

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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो

परंपरागत कृषि​ विकास योजना और जैविक खेती मिशन में अजब घोटाला सामने आया है। वर्ष 2026-27 में जैविक खेती की सामग्री खरीदने के लिए जिलों में 10 करोड़ रुपए बांटे गए। अफसरों ने मिलकर इस राशि में बंदरबांट कर डाली। बीज निगम में जो खाद 470 रुपए में खरीदी जाती थी, उसे जेम के माध्यम से 1100 रुपए में खरीदा गया। यही नहीं हर सामान दोगुने-तीन गुने रेट पर खरीदी की जा रही है।

टेंडर की शुरुआत से ही अफसरों ने खेल करना शुरू कर दिया था। जब जिलों में यह टेंडर निकाले गए तब उनकी कैटेगरी दिव्यांगजन, उपहार सामग्री, बैंडमिटन रैकेट जैसी डाल दी गई। यानी उपहार सामग्री की दुकान से जैविक खाद खरीदने का टेंडर निकाला गया। ऐसा अफसरों ने इसलिए किया जिससे प्रतिस्पर्धा न हो और उनकी चहेती कंपनियां ही भाग ले सकें। हुआ भी वही, सात जिलों का काम दो कंपनियों को बांट दिया गया।

इसमें एक कंपनी ऑल्विन इंडस्ट्रीज पर डीएमएफ घोटाले में फंसे होने की वजह से ईडी की जांच भी पहले से चल रही है। बंच बिड करके किया खेल जेम में जैविक खेती के 10-20 प्रकार के सामानों की खरीदी करने के लिए बंच बिड निकाली गई। इसमें सभी सामान जिस कंपनी के पास होते हैं, वहीं पार्टिसिपेट कर सकता है। इससे अगर किसी कंपनी के पास एक-दो सामान हैं, तो वह इस प्रति​स्पर्धा से बाहर हो जाता है। अफसरों ने अपने चहेती कंपनियों के पास जो सामान उपलब्ध थे, उन्हीं को बंच बिड के तौर पर निकाला। ऐसे में छोटी कंपनियां इससे बाहर हो गईं।

कैटेगरी बदलने का खेल जेम में कोई भी टेंडर जब निकलता है तो उसमें कैटेगरी बतानी पड़ती है। जैसे अगर जैविक खाद का टेंडर है तो कैटेगरी में जैविक खाद से जुड़े उत्पाद लिखने होंगे। जिससे जब कोई इससे जुड़ा व्यवसायी टेंडर खोजे तो उसे नजर आ जाए। लेकिन यहां कैटेगरी बदलने से किसी को यह टेंडर नजर ही नहीं आया। कुछ कंपनियों ने अफसरों से साथ मिलकर सिंडिकेट तैयार किया। जिसे जेम नंबर अफसर ने बताया वही कंपनी पार्टिसिपेट कर पाई। जब जिलों के अफसरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन पर ऐसा करने के लिए दबाव था।

तीन जिले से समझें पूरा मामला

  • दंतेवाड़ा- यहां 97 लाख रुपए की खरीदी की जा रही है। इसका काम सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज को दिया गया है। ये 15 तरह के सामान खरीदी कर रहे हैं। सभी के रेट बीज निगम से दोगुने अधिक हैं।
  • कोंडागांव- इस जिले में 1.10 करोड़ का काम सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज को दिया गया है। यहां जेम में कैटेगरी बदलने की वजह से जो कंपनियां आईं वह भी सब मिली हुईं थीं। कई कंपनियों को तो टेंडर नजर तक नहीं आया।
  • कोरबा- इस जिले में 48 लाख रुपए का काम ऑल्विन इंडस्ट्रीज को मिला है। यह कंपनी पहले से डीएमएफ घोटाले में फंसी हुई हैं। ईडी की रेड भी कंपनी के कई ठिकानों पर पड़ चुकी है। ऐसे में काम मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिलों से टेंडर होते हैं। अगर कोई शिकायत करता है, तो उसकी जांच की जाएगी और कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। -राहुल देव, संचालक, कृषि विभाग

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