क्या है सफल होने का मंत्र, विकास दिव्यकीर्ति सर ने बताया सही निर्णय लेने का तरीका
एजुकेशन
क्या है सफल होने का मंत्र, विकास दिव्यकीर्ति सर ने बताया सही निर्णय लेने का तरीका
- Authored by: कुलदीप राघवInsights by: डॉ विकास दिव्यकीर्ति
- Updated Aug 6, 2026, 11:49 AM IST
देशभर में कॉलेज एडमिशन की दौड़ जारी है। 12वीं पास करने वाले छात्र करियर की सफल राह तलाश रहे हैं। इस बीच यूपीएससी की कोचिंग देने वाले डॉ विकास दिव्यकीर्ति की वीडियो काफी चर्चा में है, जिसमें वह बता रहे हैं कि सही निर्णय लेने का तरीका क्या है?
![]()
विकास दिव्यकीर्ति ने बताया सही निर्णय लेने का तरीका
Dr Vikas Divyakirit Motivational Speech in Hindi, Dr Vikas Divyakirti Inspirational Video: यूपीएससी की तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के बीच दृष्टि आईएएस के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति एक बेहद लोकप्रिय शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं, जिनमें वे सिविल सेवा अभ्यर्थियों को परीक्षा की रणनीति, सफलता के मंत्र और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव साझा करते हुए प्रेरित करते नजर आते हैं। देशभर में कॉलेज एडमिशन की दौड़ जारी है। 12वीं पास करने वाले छात्र करियर की सफल राह तलाश रहे हैं। इस बीच यूपीएससी की कोचिंग देने वाले डॉ विकास दिव्यकीर्ति की वीडियो काफी चर्चा में है, जिसमें वह बता रहे हैं कि सही निर्णय लेने का तरीका क्या है?
करियर को दिमाग पर हावी ना होने दें
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति युवाओं को सलाह देते हैं कि किसी भी करियर को अपने दिमाग पर इतना हावी ना होने दें कि उसके अलावा कुछ दिखाई ही ना दे। वायरल वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि जीवन में हमेशा करियर के लिए प्लान बी यानी एक दूसरा ऑप्शन लेकर चलें।
सफल होने की संभावना
वह कहते हैं कि सफल होने की संभावना की शुरुआत कॉलेज से होती है। इसलिए अपने स्किल्स, भाषा, समझ, चिंतन को विकसित करने पर ध्यान दें। उनका कहना है कि इस देश में नंबरों के बीच कंपटीशन बहुत है लेकिन व्यक्तित्व का कंपटीशन बहुत कम है।
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के अनुसार, सही निर्णय लेने का सबसे पहला चरण तटस्थ (न्यूट्रल) और निष्पक्ष (इंपार्शियल) होना है। जीवन के किसी महत्वपूर्ण चौराहे पर फैसला केवल समाज, परिवार या दोस्तों के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लेना चाहिए क्योंकि यह बुद्धि और दिल से ज्यादा अंतरात्मा का मामला है। वह सलाह देते हैं कि निर्णय समाज या दूसरों की अपेक्षाओं के आधार पर न लें।
(डिस्क्लेमर: यह लेख डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के व्याख्यान और विचारों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत विश्लेषण और निष्कर्ष मुख्यतः निजी व्याख्या और दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह सामग्री केवल शैक्षणिक और सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से दी गई है। इसे किसी भी विषय पर आधिकारिक या अंतिम सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।)
![]()
कुलदीप राघवauthor
कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।
और पढ़ें
- Hindi News
- Education
End of Article