Surya Dev Ko Arghya Dene Ke Niyam : तांबे के लोटे में जल के साथ क्या डालकर सूर्य को दें अर्घ्य? पूजा से पहले जान लें
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य और करियर का कारक माना गया है। सही नियम और सही सामग्री के साथ सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
Surya Dev Ko Arghya Dene Ke Niyam : शास्त्रों और ज्योतिष परंपरा में भगवान सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। वे पिता, आत्मा, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और सरकारी नौकरी के मुख्य कारक हैं।
जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, उन्हें समाज में पद-प्रतिष्ठा और करियर में सफलता आसानी से मिलती है।
इसके विपरीत सूर्य कमजोर होने पर पिता से तालमेल बिगड़ना, काम में रुकावटें और सेहत से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं।
सूर्य ग्रह को अनुकूल बनाने का सबसे सरल और असरदार माध्यम है रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देना। हालांकि, केवल जल चढ़ाना ही काफी नहीं होता, जल में सही सामग्री मिलाना और सही नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
जल में क्या मिलाएं और क्या हैं इसके फायदे
तांबे के पात्र में साफ जल लेकर उसमें अपनी जरूरत या मनोकामना के अनुसार ये चीजें मिला सकते हैं:
रोली या लाल चंदन: जल में लाल चंदन या रोली मिलाकर अर्घ्य देने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। यह रक्त से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में भी राहत देने वाला माना जाता है।
लाल फूल: लाल रंग सूर्य देव को बेहद प्रिय है। जल में लाल फूल डालने से आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है।
गुड़: गुड़ का संबंध सूर्य और मंगल दोनों से है। अर्घ्य के जल में थोड़ा सा गुड़ मिलाने से वाणी में मिठास आती है, पारिवारिक कलह शांत होते हैं और बिगड़े काम बनने लगते हैं।
गेहूं: जल में गेहूं के कुछ दाने डालकर अर्घ्य देने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और करियर में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
हल्दी: हल्दी बृहस्पति ग्रह का प्रतीक है और शुभता लाती है। यदि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं या विवाह में देरी हो रही है, तो गुरुवार के दिन जल में चुटकी भर हल्दी मिलाकर अर्घ्य देना लाभकारी होता है।
अर्घ्य के जल में भूलकर भी न डालें ये चीजें
सूर्य देव को जल अर्पित करते समय कुछ चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों से जुड़ी सामग्री जल में मिलाने से दोष लग सकता है:
अक्षत (चावल) और दूध: इन दोनों का संबंध चंद्रमा से है, इसलिए सूर्य अर्घ्य में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
नमक: रविवार के व्रत और पूजा में नमक का प्रयोग वर्जित माना गया है।
तेल और घी: तेल और घी का संबंध शनि और राहु से है। सूर्य और शनि के स्वभाव में भिन्नता होने के कारण अर्घ्य के पानी में तेल या घी की बूंदें न डालें।
रोजाना और रविवार के अर्घ्य में अंतर
सप्ताह के बाकी दिनों में सामान्य जल में रोली, लाल फूल या गुड़ मिलाकर अर्घ्य दिया जा सकता है। लेकिन रविवार का दिन सूर्य देव का विशेष दिन माना जाता है।
यदि कुंडली में पितृ दोष है, मानसिक तनाव रहता है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो रविवार के दिन जल में थोड़ा सा काला तिल मिलाकर अर्घ्य दे सकते हैं।
काला तिल मिलाने का यह उपाय रोजाना नहीं करना चाहिए। इसे केवल रविवार, सूर्य ग्रहण, संक्रांति, अमावस्या या पितृ पक्ष के दौरान ही अपनाना चाहिए।
सूर्य को अर्घ्य हमेशा तांबे के बर्तन से दें और जल अर्पित करते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ या सूर्य मंत्रों का जप करते रहें।