आखिरी विदाई भी नसीब नहीं, आबान के जनाजे में नहीं जाएंगे अतीक के बड़े बेटे,मां शाइस्ता देख पाएगी बेटे का चेहरा?
आखिरी विदाई भी नसीब नहीं, आबान के जनाजे में नहीं जाएंगे अतीक के बड़े बेटे,मां शाइस्ता देख पाएगी बेटे का चेहरा?
Published: Friday, August 7, 2026, 9:18 [IST]
Abaan Ahmed Son Aban Janaza Funeral: माफिया अतीक अहमद के परिवार पर एक और बड़ा संकट आ गया है। सड़क हादसे में सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की मौत के बाद अब पूरा परिवार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ हादसे की नहीं, बल्कि उस दर्द की भी है जिसमें एक भाई दूसरे भाई को आखिरी विदाई भी नहीं दे पाएगा।
झांसी जेल में बंद अली अहमद और लखनऊ जेल में बंद उमर अहमद ने जनाजे में शामिल होने के लिए अदालत से अंतरिम जमानत या पैरोल की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि तीन साल से फरार चल रही शाइस्ता परवीन क्या अपने बेटे को आखिरी बार देखने के लिए सामने आएगी या नहीं।
अदालत ने क्यों खारिज कर दी अली और उमर की अर्जी?
आबान की मौत के बाद उसके बड़े भाई अली अहमद और उमर अहमद ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उन्हें अंतिम दर्शन और सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने की अनुमति दी जाए। दोनों ने अपनी अर्जी में कहा कि छोटे भाई को अंतिम विदाई देना उनका पारिवारिक, धार्मिक और मानवीय दायित्व है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि इस्लाम में परिवार के सदस्यों की मौजूदगी जनाजे की रस्म में खास मानी जाती है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में ऐसे पारिवारिक दायित्व भी शामिल हैं। लेकिन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश मिश्रा ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि विचारण न्यायालय के पास विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। हालांकि अदालत ने यह छूट दी कि दोनों सक्षम प्राधिकारी या सक्षम न्यायालय के सामने नई अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
कहां होगा आबान का अंतिम संस्कार?
झांसी में पोस्टमार्टम के बाद आबान का शव प्रयागराज लाया गया। शुक्रवार (07 अगस्त) सुबह करीब चार बजे शव हटवा गांव पहुंचा, जहां गुस्ल की रस्म पूरी की गई। चकिया वाले मकान ध्वस्त होने के बाद परिवार के लोग हटवा में ही शिफ्ट हो गए थे। जुमे की नमाज के बाद जनाजे की नमाज पढ़ी जाएगी। इसके बाद आबान को कसारी मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यही अतीक अहमद का खानदानी कब्रिस्तान है।
इसके बाद आबान के जनाजे की नमाज कब्रिस्तान की मस्जिद में अदा की जाएगी। गौरतलब है कि यह वही मस्जिद है जिसके इमाम ने अतीक, अशरफ और असद की नमाज-ए-जनाजा पढ़ाई थी। नमाज के बाद आबान को कसारी-मसारी वाले खानदानी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। पिता अतीक, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्र के ठीक बगल में ही आबान के लिए जगह तैयार की गई है। इस दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।

क्या इस बार सामने आएंगी शाइस्ता परवीन?
आबान की मौत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को लेकर हो रही है। शाइस्ता 2023 से फरार है और उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है। जब अप्रैल 2023 में असद अहमद एनकाउंटर में मारा गया था, तब भी माना जा रहा था कि शाइस्ता जनाजे में आएगी। लेकिन वह नहीं आई। इसके बाद अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद भी वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई।
अब एक बार फिर यही सवाल उठ रहा है कि क्या मां अपने सबसे छोटे बेटे की आखिरी विदाई के लिए सामने आएगी। पुलिस भी इस संभावना को लेकर सतर्क है। सुरक्षा एजेंसियां जनाजे के दौरान हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।
अतीक अहमद, अशरफ और असद की मौत के बाद परिवार के बचे हुए लोग चकिया छोड़कर हटवा गांव में अपनी रिश्तेदारी में रहने लगे थे। चकिया स्थित पांच मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद से हटवा ही उनका ठिकाना बना हुआ था। अतीक के छोटे बेटे आबान और अहजम भी यहीं रहते थे और अक्सर दिल्ली आते-जाते रहते थे।
हालांकि स्थानीय चर्चाओं की मानें तो शाइस्ता और जैनब हटवा के ही किसी घर में छिपाकर रखी गई हैं। इस आशंका को देखते हुए पुलिस-प्रशासन हटवा गांव और आसपास के इलाकों में हर संदिग्ध हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।

परिवार की फरार महिलाओं पर भी पुलिस की नजर
शाइस्ता परवीन अकेली फरार नहीं है। अतीक की बहन आयशा नूरी और अशरफ की पत्नी जैनब भी लंबे समय से फरार हैं।
- शाइस्ता परवीन पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है।
- जैनब और आयशा नूरी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम है।
- पुलिस को आशंका रही है कि ये नेपाल या दुबई भाग सकती हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
- कुछ स्थानीय चर्चाओं में यह भी दावा किया जाता रहा है कि परिवार की कुछ महिलाएं प्रयागराज के हटवा इलाके में छिपी हो सकती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि पुलिस ने नहीं की है।
कैसे हुआ था आबान अहमद का हादसा?
गुरुवार 6 अगस्त 2026 सुबह करीब 10:30 बजे आबान अहमद अपने दोस्तों के साथ प्रयागराज से झांसी जेल जा रहा था। वहां उसे अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करनी थी। झांसी से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई।
घायल साथियों के शुरुआती बयान के मुताबिक, कार के सामने अचानक एक जानवर आ गया था। उसे बचाने की कोशिश में वाहन का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। पुलिस इस दावे समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस हादसे में आबान और उसके साथी सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए।
आबान अहमद के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक हादसा बेहद भीषण था। आबान के शरीर पर 23 गंभीर चोटों के निशान मिले। उसका लीवर, फेफड़े और तिल्ली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। कई पसलियां टूट गई थीं। शरीर के अंदर ज्यादा मात्रा में खून बहने से उसकी मौत हुई है। वहीं सोनू के दोनों हाथ टूटे मिले और सिर में भी गंभीर चोट थी। डॉक्टरों ने दोनों की मौत की वजह सड़क हादसे में आई गंभीर अंदरूनी चोटें बताई हैं।
हादसे के बाद फिर चर्चा में अतीक का परिवार
आबान अहमद की मौत ने अतीक अहमद परिवार को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ अदालत से राहत नहीं मिलने के कारण दोनों बड़े भाई अंतिम विदाई में शामिल नहीं हो पाएंगे। दूसरी तरफ सबकी नजरें फरार शाइस्ता परवीन पर टिकी हैं कि क्या वह अपने बेटे को आखिरी बार देखने सामने आएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कानून, सुरक्षा व्यवस्था और अतीक परिवार की मौजूदा स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।