Tundla Assembly Caste Equations: टुंडला विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027
Tundla Assembly Caste Equations फिरोजाबाद जिले की उस अनुसूचित जाति आरक्षित विधानसभा का सामाजिक और राजनीतिक गणित सामने रखते हैं, जहां दलित मतदाता सबसे बड़ी चुनावी धुरी हैं। जाटव, बघेल और धनगर समुदायों के साथ ठाकुर, यादव और ब्राह्मण मतदाताओं की अच्छी मौजूदगी है, जबकि निषाद, कुशवाह, लोधी, वाल्मीकि, दिवाकर, शंखवार और दूसरे छोटे सामाजिक समूह बूथवार नतीजों पर असर डालते हैं। SIR 2026 की अंतिम मतदाता सूची में टुंडला विधानसभा के 3,59,796 मतदाता हैं। इनमें 1,96,515 पुरुष, 1,63,272 महिला और 9 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।
टुंडला विधानसभा संख्या 95 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 के परिसीमन के बाद 2012 के चुनाव से यह सीट SC आरक्षित हुई। वर्तमान स्वरूप में पूरी टुंडला तहसील के साथ फिरोजाबाद तहसील के नरखी, नगला बीच और पचोखरा क्षेत्र भी शामिल हैं। विधानसभा का करीब 82 प्रतिशत मतदाता आधार ग्रामीण क्षेत्रों में माना जाता है।
वर्तमान विधायक भाजपा के प्रेमपाल सिंह धनगर हैं। वह 2020 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बने और 2022 में दोबारा जीत दर्ज की। उपलब्ध विधायक प्रोफाइल में उनकी सामाजिक पहचान अनुसूचित जाति (धनगर), शिक्षा स्नातक और व्यवसाय कृषि दर्ज है। 2022 में उन्हें 1,22,881 वोट मिले और उन्होंने समाजवादी पार्टी के राकेश बाबू को 47,691 वोट से हराया।
फिरोजाबाद जिले के टुंडला विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।
टुंडला विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | टुंडला |
| विधानसभा संख्या | 95 |
| जिला | फिरोजाबाद |
| लोकसभा क्षेत्र | फिरोजाबाद |
| आरक्षण | अनुसूचित जाति (SC) |
| वर्तमान विधायक | प्रेमपाल सिंह धनगर |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| सामाजिक पहचान | अनुसूचित जाति (धनगर) |
| 2026 कुल मतदाता | 3,59,796 |
| पुरुष मतदाता | 1,96,515 |
| महिला मतदाता | 1,63,272 |
| थर्ड जेंडर | 9 |
| 2022 कुल मतदाता | करीब 3,72,750 |
| 2022 से 2026 कमी | 12,954 |
| कमी प्रतिशत | करीब 3.47% |
| 2022 BJP वोट | 1,22,881 |
| 2022 SP वोट | 75,190 |
| 2022 BSP वोट | 40,977 |
| BJP जीत 2022 | 47,691 वोट |
| BJP लोकसभा-खंड बढ़त 2024 | 17,196 वोट |
| प्रमुख सामाजिक समूह | जाटव, बघेल, धनगर, ठाकुर, यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम |
वर्ष 2026 की अंतिम SIR सूची पूरे फिरोजाबाद जिले में 10 अप्रैल को प्रकाशित हुई। जिले में कुल 17,31,838 मतदाता रहे, जिनमें 9,44,570 पुरुष, 7,87,207 महिला और 61 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। जिले की पांच विधानसभा सीटों में टुंडला का वोटर बेस 3.59 लाख से अधिक है।
Tundla Assembly Caste Equations की सबसे बड़ी विशेषता अनुसूचित जाति मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी है। उपलब्ध मौजूदा चुनावी प्रोफाइल में SC मतदाताओं को कुल वोटर बेस का 40 प्रतिशत से अधिक बताया गया है। इनमें जाटव, बघेल और धनगर सबसे महत्वपूर्ण समूह माने जाते हैं। ठाकुर, यादव और ब्राह्मण समुदाय की भी मजबूत मौजूदगी है। जाट, निषाद, कुशवाह, लोधी और दूसरे OBC समुदाय अपेक्षाकृत छोटे लेकिन कई गांवों में प्रभावी हैं। मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी का पुराना अनुमान लगभग 6.10 प्रतिशत है।
2022 के आसपास उपलब्ध एक पुराने जातीय आकलन में जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 65 हजार, ठाकुर 40 हजार, बघेल 40 हजार, यादव 40 हजार और ब्राह्मण लगभग 26 हजार बताई गई थी। मुस्लिम मतदाताओं का अनुमान करीब 20 हजार था। निषाद और कुशवाह करीब 15-15 हजार, लोधी 12 हजार, वाल्मीकि और दिवाकर 10-10 हजार तथा शंखवार करीब आठ हजार के पुराने अनुमान पर थे।
टुंडला विधानसभा का पुराना संकेतात्मक जातीय समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराना चुनावी अनुमान |
| जाटव | लगभग 65,000 |
| ठाकुर/राजपूत | लगभग 40,000 |
| बघेल | लगभग 40,000 |
| यादव | लगभग 40,000 |
| ब्राह्मण | लगभग 26,000 |
| मुस्लिम | लगभग 20,000 |
| निषाद | लगभग 15,000 |
| कुशवाह | लगभग 15,000 |
| लोधी | लगभग 12,000 |
| वाल्मीकि | लगभग 10,000 |
| दिवाकर | लगभग 10,000 |
| नाई | लगभग 8,000 |
| शंखवार | लगभग 8,000 |
| चक | लगभग 5,500 |
| राठौर | लगभग 5,000 |
| कुम्हार | लगभग 5,000 |
| कश्यप | लगभग 4,000 |
| नट | लगभग 1,000 |
| 2026 आधिकारिक कुल वोटर | 3,59,796 |
ये आंकड़े 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं हैं। यह 2022 के आसपास उपलब्ध पुराने चुनावी अनुमान हैं। निर्वाचन आयोग मतदाता सूची जाति के आधार पर जारी नहीं करता और SIR 2026 में किस समुदाय के कितने नाम जुड़े या हटे, इसका भी कोई आधिकारिक जाति-वार विवरण नहीं है। इसलिए इन संख्याओं को वर्तमान जाति-वार वोटर टोटल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
टुंडला वोटर लिस्ट 2026: 3,59,796 मतदाता
SIR 2026 के बाद टुंडला विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 3,59,796 हो गई है। 2022 में उपलब्ध चुनावी आंकड़ों में यहां करीब 3,72,750 मतदाता थे। यानी मौजूदा सूची 2022 के मुकाबले लगभग 12,954 मतदाता छोटी है। यह करीब 3.47 प्रतिशत की नेट गिरावट है।
फिरोजाबाद जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026
| विधानसभा | पुरुष | महिला | अन्य | कुल मतदाता |
| टुंडला | 1,96,515 | 1,63,272 | 9 | 3,59,796 |
| जसराना | 1,95,141 | 1,61,746 | 5 | 3,56,892 |
| फिरोजाबाद | 2,04,039 | 1,74,031 | 36 | 3,78,106 |
| शिकोहाबाद | 1,78,258 | 1,48,050 | 9 | 3,26,317 |
| सिरसागंज | 1,70,617 | 1,40,108 | 2 | 3,10,727 |
| जिला कुल | 9,44,570 | 7,87,207 | 61 | 17,31,838 |
फिरोजाबाद जिले में SIR के बाद कुल मतदाता संख्या पहले के करीब 19.02 लाख से घटकर 17.31 लाख रह गई। टुंडला में कटौती जिला स्तर पर हुई कुल कमी की तुलना में सीमित रही, इसलिए विधानसभा का ग्रामीण वोटर बेस अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई देता है।
2012 से 2026 तक कैसे बदला टुंडला का वोटर बेस?
टुंडला में 2012 से 2024 तक मतदाता संख्या लगातार बढ़ी। 2012 में करीब 3.26 लाख वोटर थे, 2017 में संख्या 3.50 लाख के आसपास पहुंची, 2019 में 3.64 लाख, 2022 में 3.72 लाख और 2024 में करीब 3,80,204 मतदाता दर्ज थे। SIR 2026 के बाद संख्या घटकर 3,59,796 रह गई।
| वर्ष | कुल मतदाता |
| 2012 | करीब 3,25,746 |
| 2017 | करीब 3,49,702 |
| 2019 लोकसभा | करीब 3,64,312 |
| 2022 विधानसभा | करीब 3,72,750 |
| 2024 लोकसभा | करीब 3,80,204 |
| 2026 SIR | 3,59,796 |
2024 से 2026 के बीच वोटर बेस लगभग 20,408 मतदाता छोटा हुआ है। यानी 2027 के चुनाव में 2024 के लोकसभा बूथ आंकड़ों को भी बिना नई सूची से मिलाए सीधे इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा।
SC आरक्षित सीट पर जाटव वोट सबसे महत्वपूर्ण क्यों?
टुंडला में अनुसूचित जाति मतदाता कुल वोटर बेस का बहुत बड़ा हिस्सा हैं। पुराने आकलन में जाटव मतदाता करीब 65 हजार बताए गए थे, जबकि मौजूदा सामाजिक प्रोफाइल पूरे SC वोट को 40 प्रतिशत से अधिक रखती है।
यही वजह है कि BJP, SP और BSP तीनों के लिए दलित वोट चुनावी रणनीति के केंद्र में है।
BSP का यहां पुराना आधार जाटव मतदाताओं से जुड़ा रहा है।
BJP ने 2017 के बाद अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के साथ अपने सवर्ण और गैर-यादव OBC वोट को जोड़कर लगातार चुनाव जीते हैं।
SP 2027 से पहले PDA रणनीति के जरिए दलित वोट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
टुंडला में चुनाव का वास्तविक सवाल इसलिए केवल “SC वोट किसे मिलेगा” नहीं है, बल्कि जाटव, बघेल, धनगर, वाल्मीकि, दिवाकर, शंखवार और चक जैसे अलग-अलग दलित समूह किस अनुपात में किस पार्टी के साथ जाते हैं—यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
धनगर वोट और प्रेमपाल सिंह की सामाजिक ताकत
वर्तमान विधायक प्रेमपाल सिंह की प्रोफाइल में उनकी जाति अनुसूचित (धनगर) दर्ज है। वह 2020 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बने और 2022 में दूसरी जीत हासिल की।
यह टुंडला के BJP मॉडल की एक खास रणनीतिक ताकत है।
पार्टी का परंपरागत सवर्ण और गैर-यादव OBC समर्थन,
धनगर प्रत्याशी,
जाटव और दूसरे SC मतदाताओं में हिस्सेदारी,
और केंद्र-राज्य सरकार की लाभार्थी योजनाओं से जुड़ा वोट—
इन सभी को जोड़कर BJP 2022 में करीब आधे वोट तक पहुंची। प्रेमपाल सिंह को 49.46 प्रतिशत मत मिले थे।
बघेल मतदाता भी करीब 40 हजार के पुराने अनुमान पर
पुराने सामाजिक आकलन में बघेल मतदाता करीब 40 हजार बताए गए थे। टुंडला और आसपास के फिरोजाबाद-आगरा क्षेत्र में बघेल सामाजिक राजनीति लंबे समय से प्रभावशाली रही है। 2017 में BJP ने एस.पी. सिंह बघेल को टुंडला से उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने 56 हजार से अधिक वोट की बड़ी जीत हासिल की।
हालांकि किसी बघेल प्रत्याशी को मिले सभी वोटों को बघेल समाज का वोट मानना गलत होगा।
2017 में BJP प्रत्याशी को 1,18,584 वोट मिले थे, जो किसी एक जाति की ताकत से कहीं अधिक था।
इससे स्पष्ट है कि पार्टी ने बघेल चेहरे के साथ बड़ा बहुजातीय गठबंधन खड़ा किया था।
ठाकुर वोट करीब 40 हजार का पुराना अनुमान
पुराने चुनावी आकलन में ठाकुर/राजपूत मतदाता करीब 40 हजार बताए गए थे। टुंडला SC आरक्षित सीट है, इसलिए ठाकुर समुदाय से विधायक प्रत्याशी नहीं हो सकता, लेकिन जीत के लिए उसका समर्थन महत्वपूर्ण रहता है।
BJP के लिए ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता उसके गैर-SC सामाजिक आधार की मजबूत कड़ी रहे हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में BJP ने फिरोजाबाद सीट पर ठाकुर विश्वदीप सिंह को प्रत्याशी बनाया था। पूरे संसदीय क्षेत्र में पार्टी चुनाव हार गई, लेकिन टुंडला विधानसभा खंड में BJP ने अपनी बढ़त बरकरार रखी।
इससे संकेत मिलता है कि टुंडला का BJP आधार केवल विधायक की SC उपजाति पर निर्भर नहीं है।
यादव वोट: SP की सबसे बड़ी गैर-दलित ताकत
टुंडला में यादव मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 40 हजार है।
फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र लंबे समय से समाजवादी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा है और 2024 में SP के अक्षय यादव ने संसदीय सीट 89,312 वोट से जीती। पूरे लोकसभा क्षेत्र में यादव और मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता को SP की जीत के प्रमुख कारणों में गिना गया, जबकि दलित और दूसरे OBC समूहों में भी पार्टी ने BJP के वोट में सेंध लगाई।
लेकिन टुंडला विधानसभा खंड में तस्वीर अलग रही।
पूरे फिरोजाबाद में SP जीती, लेकिन टुंडला में BJP आगे रही।
यही फर्क 2027 की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मुस्लिम वोट सीमित, लेकिन SP के सामाजिक गठजोड़ में अहम
टुंडला में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी का वर्तमान चुनावी अनुमान करीब 6.10 प्रतिशत है। 2022 के पुराने जातीय आकलन में संख्या लगभग 20 हजार बताई गई थी।
संख्या के लिहाज से मुस्लिम वोट फिरोजाबाद शहर विधानसभा जितना बड़ा नहीं है।
लेकिन SP के लिए यादव + मुस्लिम आधार की शुरुआत यहीं से होती है।
अगर उसके साथ जाटव, बघेल, धनगर या दूसरे दलित समूहों का बड़ा हिस्सा जुड़ता है तो BJP को सीधी चुनौती बन सकती है।
2024 लोकसभा चुनाव में SP ने पूरे फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में यही व्यापक सामाजिक विस्तार किया, लेकिन टुंडला में BJP की बढ़त बरकरार रही।
ब्राह्मण वोट पुराने अनुमान में करीब 26 हजार
पुराने सामाजिक आंकड़ों में ब्राह्मण मतदाता करीब 26 हजार बताए गए थे।
SC आरक्षित सीट होने के कारण ब्राह्मण मतदाता प्रत्याशी के बजाय पार्टी, स्थानीय नेतृत्व और व्यापक सामाजिक गठबंधन को अधिक महत्व दे सकता है।
BJP के लिए ठाकुर-ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण वोट उसके मजबूत गैर-दलित आधार का हिस्सा हैं।
2027 से पहले समाजवादी पार्टी भी अपने PDA समीकरण को विस्तार देते हुए ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
टुंडला जैसी सीट पर अगर SP सवर्ण वोट के छोटे हिस्से को भी अपने दलित-OBC गठजोड़ के साथ जोड़ती है तो मुकाबला 2022 से ज्यादा कठिन हो सकता है।
निषाद, कुशवाह और लोधी छोटे लेकिन महत्वपूर्ण स्विंग ब्लॉक
पुराने चुनावी अनुमान में निषाद और कुशवाह मतदाता करीब 15-15 हजार और लोधी करीब 12 हजार बताए गए थे।
इन समुदायों की संख्या जाटव, ठाकुर या यादव से छोटी है, लेकिन सामूहिक रूप से ये बड़ा गैर-यादव OBC वोट तैयार करते हैं।
BJP की 2027 रणनीति में गैर-यादव OBC सामाजिक समूहों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
SP का PDA अभियान इन्हीं मतदाताओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है।
अगर टुंडला में निषाद-कुशवाह-लोधी वोट में कुछ हजार मतों का बदलाव होता है तो 2024 की सिर्फ 17,196 वोट की BJP लोकसभा-खंड बढ़त के संदर्भ में उसका राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
2022 में BJP ने 47,691 वोट से जीती टुंडला सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में टुंडला में मुख्य मुकाबला BJP और SP के बीच था।
टुंडला विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
| प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | 1,22,881 | 49.46% |
| राकेश बाबू | SP | 75,190 | 30.26% |
| अमर सिंह | BSP | 40,977 | 16.49% |
| यतेंद्र कुमार | विकासशील इंसान पार्टी | 2,168 | 0.87% |
| योगेश दिवाकर | कांग्रेस | 1,949 | 0.78% |
| NOTA | — | 1,110 | 0.45% |
| BJP जीत | — | 47,691 | — |
कुल मतदान लगभग 2,48,451 रहा और मतदान प्रतिशत करीब 66.65 प्रतिशत था।
2022 के परिणाम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SP और BSP दोनों के पास बड़ा दलित-पिछड़ा आधार था, लेकिन BJP लगभग आधे वोट तक पहुंच गई।
BSP को 40,977 वोट मिलने के कारण दलित वोट तीनों प्रमुख दलों में बंटा हुआ दिखाई देता है।
राकेश बाबू का BSP से SP जाना भी नहीं रोक पाया BJP की जीत
राकेश बाबू टुंडला की राजनीति का पुराना नाम हैं। वह 2007 और 2012 में BSP से विधायक बने थे। 2017 में BSP से चुनाव हारने के बाद 2022 में SP उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे।
उनके पास पुराने BSP-दलित नेटवर्क और SP के यादव-मुस्लिम आधार—दोनों को जोड़ने का अवसर था।
फिर भी उन्हें 75,190 वोट मिले और BJP उनसे 47,691 वोट आगे रही।
इसका एक राजनीतिक अर्थ यह है कि केवल दल बदलने से पूरा पुराना सामाजिक वोट उम्मीदवार के साथ ट्रांसफर नहीं होता।
यही बात 2027 के संभावित उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
2020 उपचुनाव ने प्रेमपाल सिंह को पहली जीत दिलाई
2017 में टुंडला से BJP के एस.पी. सिंह बघेल विधायक बने थे। 2019 में वह आगरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए, जिसके बाद टुंडला में उपचुनाव हुआ।
2020 के उपचुनाव में BJP ने प्रेमपाल सिंह धनगर को मैदान में उतारा।
टुंडला उपचुनाव 2020
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | 72,950 |
| महाराज सिंह धनगर | SP | 55,267 |
| संजीव कुमार चक | BSP | 41,010 |
| अशोक कुमार | अन्य | 4,953 |
| BJP जीत | — | 17,683 |
दो साल बाद 2022 में प्रेमपाल सिंह की जीत का अंतर 17,683 से बढ़कर 47,691 वोट हो गया।
यानी पहली विधायकी के बाद BJP उम्मीदवार ने अपना चुनावी आधार काफी बढ़ाया।
2017 में BJP ने BSP से छीनी थी सीट
2017 में BJP ने एस.पी. सिंह बघेल को टुंडला से प्रत्याशी बनाया।
उन्हें 1,18,584 वोट मिले।
BSP के राकेश बाबू को 62,514 वोट और SP के शिव सिंह चक को 54,888 वोट मिले।
BJP ने 56,070 वोट से सीट जीती।
टुंडला विधानसभा चुनाव 2017
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| एस.पी. सिंह बघेल | BJP | 1,18,584 |
| राकेश बाबू | BSP | 62,514 |
| शिव सिंह चक | SP | 54,888 |
| गंगा प्रसाद पुष्कर | RLD | 2,576 |
| NOTA | — | 1,381 |
| BJP जीत | — | 56,070 |
2017 में BSP और SP के वोट लगभग बराबर बंटे थे।
इसी चुनाव से टुंडला में BJP के मौजूदा राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत हुई।
2012 में सिर्फ 7,946 वोट से जीती थी BSP
2012 टुंडला का पहला चुनाव था जिसमें सीट वर्तमान परिसीमन के तहत SC आरक्षित थी।
BSP के राकेश बाबू ने 67,949 वोट हासिल किए।
SP के अखिलेश कुमार को 60,003 और BJP के शिव सिंह चक को 58,536 वोट मिले।
BSP ने सिर्फ 7,946 वोट से चुनाव जीता।
टुंडला विधानसभा चुनाव 2012
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| राकेश बाबू | BSP | 67,949 |
| अखिलेश कुमार | SP | 60,003 |
| शिव सिंह चक | BJP | 58,536 |
| अन्य | विभिन्न | शेष |
| BSP जीत | — | 7,946 |
2012 में तीनों प्रमुख दल करीब 58 से 68 हजार वोट के दायरे में थे।
2017 तक BJP का वोट दोगुने से अधिक होकर 1.18 लाख पहुंच गया।
2012 से 2022: BSP से BJP की ओर कैसे बदली सीट?
| चुनाव | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
| 2012 | राकेश बाबू | BSP | 67,949 | 7,946 |
| 2017 | एस.पी. सिंह बघेल | BJP | 1,18,584 | 56,070 |
| 2020 उपचुनाव | प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | 72,950 | 17,683 |
| 2022 | प्रेमपाल सिंह धनगर | BJP | 1,22,881 | 47,691 |
इस तालिका से टुंडला की राजनीति का बड़ा बदलाव साफ दिखाई देता है।
2012 में BSP।
2017 में BJP।
2020 में BJP।
2022 में BJP।
यानी पिछले तीन मुकाबलों में भाजपा ने सीट लगातार अपने पास रखी है।
लेकिन 2024 का लोकसभा परिणाम यह भी दिखाता है कि BJP की बढ़त अजेय नहीं है।
2024 में पूरे फिरोजाबाद में SP जीती, टुंडला में BJP आगे
2024 लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद संसदीय सीट से SP के अक्षय यादव ने 5,43,037 वोट हासिल कर BJP के विश्वदीप सिंह को 89,312 वोट से हराया। BJP को पूरे लोकसभा क्षेत्र में 4,53,725 और BSP को 90,948 वोट मिले।
लेकिन टुंडला विधानसभा खंड में तस्वीर उलटी रही।
टुंडला विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024
| पार्टी | वोट |
| BJP | 1,07,422 |
| SP | 90,226 |
| BJP की बढ़त | 17,196 |
यानी SP पूरे फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में लगभग 89 हजार से जीती, लेकिन टुंडला में BJP ने 17,196 वोट की बढ़त बचाए रखी।
यह 2027 का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है।
2022 में BJP +47,691, 2024 में बढ़त +17,196
| चुनावी संकेत | वोट |
| BJP विधानसभा जीत 2022 | 47,691 |
| BJP लोकसभा-खंड बढ़त 2024 | 17,196 |
| बढ़त में अंतर | 30,495 |
दो चुनावों को सीधे वोट स्विंग के रूप में देखना उचित नहीं होगा, क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार और मुद्दे अलग होते हैं।
फिर भी BJP की बढ़त का 47 हजार से 17 हजार के स्तर तक आना विपक्ष के लिए राजनीतिक अवसर का संकेत देता है।
SP के लिए चुनौती यह होगी कि वह लोकसभा चुनाव में BJP से पीछे रहे इन 17 हजार वोटों की दूरी को विधानसभा स्तर पर कैसे खत्म करती है।
2019 में BJP की बढ़त 29,518 वोट थी
टुंडला के लोकसभा-खंड इतिहास में BJP ने 2014 के बाद लगातार बढ़त बनाए रखी है।
2009 में BSP, SP से 16,684 वोट आगे थी।
2014 में BJP ने SP पर 31,077 वोट की बढ़त बनाई।
2019 में BJP की बढ़त 29,518 वोट रही।
2024 में बढ़त घटकर 17,196 वोट रह गई।
इससे एक दिलचस्प राजनीतिक रुझान निकलता है—
BJP अभी भी टुंडला में आगे है,
लेकिन लोकसभा स्तर पर उसका अंतर धीरे-धीरे कम हुआ है।
2027 में SP इसी संकेत को विधानसभा चुनौती में बदलने की कोशिश करेगी।
BSP टुंडला में अभी भी क्यों महत्वपूर्ण?
टुंडला कभी BSP की मजबूत सीटों में रही है।
2007—BSP जीत
2012—BSP जीत
2017—BSP दूसरे स्थान पर
2020 उपचुनाव—BSP को 41 हजार वोट
2022—BSP को 40,977 वोट।
इसलिए पार्टी को यहां समाप्त मानना सही नहीं होगा।
जाटव मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी BSP को हमेशा एक स्वाभाविक सामाजिक आधार देती है।
लेकिन समस्या यह है कि दलित वोट अब कई दिशाओं में बंट रहा है।
BJP का उम्मीदवार खुद SC समुदाय से है।
SP PDA के जरिए दलित वोट चाहता है।
आजाद समाज पार्टी जैसे विकल्प भी SC राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे हैं।
इसलिए BSP का 2027 प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने पुराने जाटव आधार को कितना वापस केंद्रित करती है।
SP के लिए PDA की असली परीक्षा टुंडला जैसी सीट पर
समाजवादी पार्टी पिछले पांच विधानसभा मुकाबलों में टुंडला नहीं जीत सकी है और 2027 से पहले वह दलित वोट में सेंध लगाने के लिए PDA रणनीति पर जोर दे रही है।
टुंडला में SP का संभावित सामाजिक मॉडल साफ दिखाई देता है—
यादव,
मुस्लिम,
जाटव का हिस्सा,
बघेल-धनगर का हिस्सा,
निषाद-कुशवाह-लोधी जैसे पिछड़े समूह,
और BJP से असंतुष्ट सवर्ण वोट।
लेकिन इस मॉडल की सबसे कठिन कड़ी दलित वोट का वास्तविक ट्रांसफर है।
2022 में राकेश बाबू जैसा पुराना BSP चेहरा SP के पास था, फिर भी पार्टी 47 हजार से ज्यादा वोट से हारी।
इसलिए 2027 में केवल प्रत्याशी की SC जाति नहीं बल्कि संगठन, बूथ नेटवर्क और दूसरे समुदायों की स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण होगी।
BJP के लिए 2027 की सबसे बड़ी ताकत
टुंडला में BJP के पक्ष में कई महत्वपूर्ण चुनावी संकेत हैं।
पहला—2017, 2020 और 2022 के लगातार तीन मुकाबलों में जीत।
दूसरा—2022 में करीब 49.5 प्रतिशत वोट शेयर।
तीसरा—वर्तमान विधायक स्वयं बड़े SC सामाजिक समूह धनगर का प्रतिनिधित्व करते हैं।
चौथा—ठाकुर, ब्राह्मण और गैर-यादव OBC वोट में पार्टी की मजबूत पकड़।
पांचवां—2024 की SP लहर में भी टुंडला विधानसभा खंड से BJP आगे रही।
यही वजह है कि BJP 2027 से पहले स्पष्ट शुरुआती बढ़त वाली पार्टी दिखाई देती है।
लेकिन उसकी बढ़त अब 2017 जैसी एकतरफा नहीं मानी जा सकती।
BJP की सबसे बड़ी चुनौती: दलित वोट में विपक्ष की सेंध
2024 लोकसभा चुनाव में पूरे फिरोजाबाद क्षेत्र में SP की जीत के पीछे यादव-मुस्लिम एकजुटता के साथ SC और दूसरे BJP वोट समूहों में सेंध को भी महत्वपूर्ण माना गया।
टुंडला में BJP ने बढ़त बचाई, लेकिन मार्जिन 17 हजार तक सीमित रहा।
अगर 2027 में BSP मजबूत होती है तो BJP विरोधी दलित वोट फिर तीन हिस्सों में बंट सकता है, जिसका फायदा BJP को हो सकता है।
अगर BSP कमजोर होती है और उसका बड़ा हिस्सा SP की ओर जाता है तो मुकाबला कहीं ज्यादा करीबी हो सकता है।
यही टुंडला की सबसे महत्वपूर्ण 2027 राजनीतिक पहेली है।
खारे पानी की समस्या सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा
जुलाई 2026 की विधानसभा समीक्षा में टुंडला के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में खारे पानी की समस्या सबसे बड़ी अधूरी चुनौती के रूप में सामने आई। जल जीवन मिशन के तहत काम जारी है, लेकिन कई गांव अब भी मीठे पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं।
खारा पानी किसी एक जाति का मुद्दा नहीं है।
जाटव बस्ती,
धनगर परिवार,
बघेल गांव,
ठाकुर किसान,
यादव और ब्राह्मण परिवार—
सभी पेयजल समस्या से प्रभावित होते हैं।
यही वजह है कि 2027 में पानी का सवाल जातीय वोटिंग के ऊपर साझा ग्रामीण मुद्दा बन सकता है।
सड़कें BJP का सबसे बड़ा विकास कार्ड
वर्तमान विधायक ने अपने कार्यकाल में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण को प्रमुख उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार 12 बड़ी सड़कों का चौड़ीकरण कराया गया और 50 नई सड़कों को स्वीकृति मिली है। एटा रोड के चौड़ीकरण के लिए बजट पास होने और रोडवेज बस स्टैंड के कायाकल्प की योजना भी उनके विकास दावों में शामिल है।
इसके अलावा क्षेत्र में उच्च क्षमता वाली लाइट लगाने और जल जीवन मिशन के कार्यों को आगे बढ़ाने का दावा किया गया है।
जुलाई 2026 की समीक्षा में विधायक ने मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र से जुड़े 452 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के शिलान्यास का भी उल्लेख किया।
2027 में BJP सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने प्रमुख विकास नैरेटिव के रूप में सामने रख सकती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा
टुंडला में जुलाई 2026 तक स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी कमजोरी माना गया। विधानसभा क्षेत्र में कोई बड़ा सरकारी अस्पताल नहीं है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चिकित्सकों तथा संसाधनों की कमी की शिकायत सामने आई। 100 बेड अस्पताल का प्रस्ताव भी लंबित बताया गया।
गंभीर मरीजों को कई बार आगरा जाना पड़ता है।
इसलिए स्वास्थ्य का सवाल गांव और कस्बे दोनों के मतदाताओं को प्रभावित करता है।
SC आरक्षित सीट में अगर विपक्ष स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को जाति से ऊपर साझा मुद्दा बनाने में सफल रहता है तो BJP के पुराने सामाजिक आधार पर दबाव बन सकता है।
शिक्षा और रोजगार भी 2027 की चुनौती
2026 की क्षेत्रीय समीक्षा में स्वास्थ्य के साथ शिक्षा और रोजगार पर भी अपेक्षित काम न होने की आलोचना सामने आई। विपक्ष ने कहा कि विकास का फोकस केवल सड़कों तक सीमित नहीं होना चाहिए और शिक्षा, रोजगार तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार जरूरी है।
टुंडला रेलवे जंक्शन के कारण देशभर से जुड़ा हुआ शहर है।
लेकिन आसपास का बड़ा इलाका कृषि प्रधान है।
स्थानीय युवाओं के लिए—
रेलवे रोजगार,
उद्योग,
तकनीकी शिक्षा,
छोटे व्यवसाय,
कृषि आधारित उद्योग और
सरकारी नौकरी
महत्वपूर्ण सवाल हैं।
2027 में युवा वोट इन मुद्दों को जातीय पहचान के साथ तौल सकता है।
मिर्च और आलू की खेती किसान वोट का आधार
टुंडला विधानसभा क्षेत्र में मिर्च और आलू उत्पादन की मजबूत कृषि पहचान रही है। पुराने चुनावी प्रोफाइल में किसानों के मुद्दे, बिजली और यमुना तलहटी क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुख राजनीतिक सवाल बताया गया था।
इसका राजनीतिक अर्थ यह है कि ठाकुर, यादव, बघेल, कुशवाह, लोधी और दूसरे किसान समुदायों का मतदान केवल जाति से तय नहीं होगा।
फसल का भाव,
कोल्ड स्टोरेज,
सिंचाई,
बिजली,
खाद-बीज और
आवारा पशुओं से नुकसान
जैसे आर्थिक सवाल भी असर डाल सकते हैं।
महिला मतदाता 1.63 लाख से अधिक
SIR 2026 की अंतिम सूची में टुंडला विधानसभा में 1,63,272 महिला मतदाता हैं।
यह संख्या किसी भी एक जातीय समूह के पुराने अनुमान से कहीं बड़ी है।
महिला मतदाता के लिए—
पेयजल,
राशन,
महंगाई,
स्वास्थ्य,
सुरक्षा,
आवास,
बिजली और
सरकारी योजनाएं
स्वतंत्र चुनावी मुद्दे हो सकते हैं।
खास तौर पर खारे पानी की समस्या का घरेलू बोझ महिलाओं पर ज्यादा पड़ता है, इसलिए पेयजल का सवाल 2027 में महिला मतदान व्यवहार पर भी असर डाल सकता है।
2026 की नई वोटर लिस्ट से कितनी बदली चुनावी जमीन?
2022 में कुल मतदाता—3,72,750
2026 में कुल मतदाता—3,59,796
अंतर—12,954
गिरावट—करीब 3.47 प्रतिशत।
यह बदलाव 2022 की BJP जीत के 47,691 वोट से काफी छोटा है।
लेकिन 2024 की BJP लोकसभा-खंड बढ़त केवल 17,196 वोट थी।
तीन महत्वपूर्ण चुनावी आंकड़े
| संकेत | वोट |
| BJP जीत 2022 | 47,691 |
| 2022 से 2026 वोटर कमी | 12,954 |
| BJP लोकसभा-खंड बढ़त 2024 | 17,196 |
इन तीन आंकड़ों को साथ पढ़ने पर साफ है कि SIR ने सीट का पूरा स्वरूप नहीं बदला, लेकिन 2024 के अपेक्षाकृत छोटे अंतर के कारण कुछ हजार वोट का स्विंग भी 2027 में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
2027 में बूथवार कौन से सवाल सबसे अहम?
नई वोटर सूची के बाद पार्टियों को बूथ स्तर पर कई सवालों के जवाब खोजने होंगे—
जाटव बहुल गांवों में वर्तमान वोटर संख्या कितनी है?
धनगर और बघेल प्रभाव वाले बूथों में BJP का आधार कितना मजबूत है?
ठाकुर और ब्राह्मण बहुल गांवों में 2024 का मतदान पैटर्न क्या था?
यादव बहुल बूथों में SP कितनी मजबूत हुई?
BSP के पुराने जाटव बूथ 2022 और 2024 में किस दिशा में गए?
निषाद, कुशवाह और लोधी मतदाताओं का नया रुख क्या है?
नरखी और पचोखरा क्षेत्र में पार्टीवार वोट कितना बदला?
और 2026 की सूची में किन बूथों से सबसे अधिक नाम घटे या जुड़े?
यही माइक्रो डेटा 2027 के वास्तविक जातिगत समीकरण को पुराने विधानसभा-स्तरीय अनुमानों से बेहतर बताएगा।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण
टुंडला के अलावा प्रदेश की बाकी सीटों के सामाजिक समूह, मतदाता संख्या, चुनावी इतिहास और बदलते राजनीतिक गठजोड़ को समझने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विधानसभा-वार विशेष श्रृंखला देखी जा सकती है।
फिरोजाबाद जिले की पांचों सीटों का सामाजिक चरित्र अलग है। टुंडला में SC आरक्षण के भीतर जाटव-बघेल-धनगर वोट और ठाकुर-यादव-ब्राह्मण गैर-SC आधार चुनाव की मुख्य धुरी बनता है, जबकि जिले की दूसरी सीटों पर यादव, मुस्लिम, लोधी और सवर्ण समुदायों का वजन अलग-अलग है।
2027 के विधानसभा चुनाव में टुंडला पर क्यों रहेगी नजर?
टुंडला की 2027 राजनीतिक तस्वीर कुछ प्रमुख आंकड़ों में समझी जा सकती है।
| चुनावी संकेत | आंकड़ा |
| 2012 BSP जीत | 7,946 वोट |
| 2017 BJP जीत | 56,070 वोट |
| 2020 BJP उपचुनाव जीत | 17,683 वोट |
| 2022 BJP जीत | 47,691 वोट |
| BJP वोट 2022 | 1,22,881 |
| SP वोट 2022 | 75,190 |
| BSP वोट 2022 | 40,977 |
| BJP लोकसभा-खंड वोट 2024 | 1,07,422 |
| SP लोकसभा-खंड वोट 2024 | 90,226 |
| BJP बढ़त 2024 | 17,196 |
| 2022 कुल मतदाता | करीब 3,72,750 |
| 2026 कुल मतदाता | 3,59,796 |
| 2022 से वोटर कमी | 12,954 |
इन आंकड़ों के बीच 2027 के कई बड़े सवाल खड़े हैं।
क्या BJP प्रेमपाल सिंह धनगर को फिर टिकट देगी?
अगर टिकट मिलता है तो क्या वह तीसरी बार विधानसभा पहुंचेंगे?
क्या जाटव वोट में BJP अपनी हिस्सेदारी कायम रख पाएगी?
धनगर और बघेल मतदाता कितना एकजुट होकर BJP के साथ जाएंगे?
क्या BSP अपना पुराना जाटव आधार वापस हासिल कर पाएगी?
SP का PDA मॉडल दलित वोट में कितनी बड़ी सेंध लगा सकेगा?
यादव-मुस्लिम वोट के साथ जाटव या बघेल वोट जुड़ा तो मुकाबला कितना बदलेगा?
ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता BJP के साथ कितनी मजबूती से रहेंगे?
निषाद, कुशवाह और लोधी जैसे छोटे OBC समूह किस ओर जाएंगे?
क्या खारे पानी, स्वास्थ्य और रोजगार का मुद्दा जातीय वोट से ऊपर जाएगा?
और सबसे महत्वपूर्ण—2024 में BJP की बढ़त 17,196 वोट तक सिमटने के बाद क्या विपक्ष 2027 में यह अंतर खत्म कर पाएगा?
टुंडला सहित प्रदेश की सीटवार टिकट दावेदारी, गठबंधन, उम्मीदवार और चुनावी रणनीति की विस्तृत कवरेज के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विशेष श्रृंखला देखी जा सकती है।
9 अगस्त 2026 तक टुंडला विधानसभा के लिए 2027 की अंतिम प्रत्याशी सूची और मतदान कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। प्रेमपाल सिंह धनगर वर्तमान BJP विधायक हैं, लेकिन किसी वर्तमान विधायक को अगले चुनाव का निश्चित उम्मीदवार तभी माना जाना चाहिए जब पार्टी आधिकारिक टिकट घोषित करे।
Tundla Assembly Caste Equations की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीट SC आरक्षित है और अनुसूचित जाति मतदाताओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है, लेकिन दलित वोट खुद कई उपसमूहों में बंटा हुआ है। जाटव सबसे बड़ा दलित समूह है, जबकि बघेल और धनगर भी मजबूत भूमिका रखते हैं। इनके साथ ठाकुर, यादव और ब्राह्मण बड़े गैर-SC सामाजिक समूह हैं। निषाद, कुशवाह, लोधी, वाल्मीकि, दिवाकर और शंखवार जैसे छोटे समूह अंतिम जीत का अंतर तैयार करते हैं।
3,59,796 मतदाताओं वाली टुंडला विधानसभा में 2027 की असली लड़ाई BJP के धनगर-दलित + सवर्ण + गैर-यादव OBC सामाजिक गठजोड़, SP के यादव-मुस्लिम-PDA विस्तार और BSP की अपने पुराने जाटव वोट को वापस संगठित करने की क्षमता के बीच होगी। BJP 2017 से लगातार तीन चुनावी मुकाबले जीत चुकी है, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में उसकी विधानसभा-खंड बढ़त घटकर 17,196 वोट रह गई। इसलिए 2027 का नतीजा जाटव-बघेल-धनगर वोट के वितरण, SP की दलित सेंध, BSP की वापसी, उम्मीदवार के चेहरे और खारे पानी-स्वास्थ्य जैसे स्थानीय मुद्दों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
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समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।
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