चीन में गोल्ड जीतकर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान, अब एशियाई खेलों में तिरंगा लहराने को तैयार ईशा सिंह
चीन में गोल्ड जीतकर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान, अब एशियाई खेलों में तिरंगा लहराने को तैयार ईशा सिंह
Esha Singh: भारतीय निशानेबाजी में ईशा सिंह ने हाल ही में चीन हुए ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा ने गोल्ड मेडल जीता था. अब वो एशियन गेम्स में धमाल मचाने के लिए तैयार हैं.
Published byRoshni Singh
Esha Singh: भारतीय निशानेबाजी में ईशा सिंह ने हाल ही में चीन हुए ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा ने गोल्ड मेडल जीता था. अब वो एशियन गेम्स में धमाल मचाने के लिए तैयार हैं.
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Esha Singh
Esha Singh: भारतीय निशानेबाजी में ईशा सिंह ने 2026 में एक बार फिर देश को गर्व करने का मौका दिया है. हाल ही में चीन के हांगझोउ में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसी मुकाबले में भारत की मनु भाकर ने कांस्य पदक जीतकर पोडियम पर जगह बनाई, जबकि तीसरे स्थान की लड़ाई में एक चीनी निशानेबाज भी मौजूद रही. ईशा का यह प्रदर्शन ऐसे समय आया है जब भारतीय निशानेबाजी की नई पीढ़ी लगातार दुनिया के शीर्ष निशानेबाजों को चुनौती दे रही है. अब उनकी नजर आने वाले एशियाई खेलों पर है, जहां वह भारत के लिए एक और बड़ा पदक जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाने की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं.
25 मीटर पिस्टल में भारत का शानदार प्रदर्शन, मनु भाकर का ब्रॉन्ज
हांगझोउ की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा भारत के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पोडियम पर ईशा सिंह और मनु भाकर दोनों ने जगह बनाई. ईशा ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनु भाकर ने कांस्य पदक अपने नाम किया. इस मुकाबले में चीनी निशानेबाज ने भी शीर्ष तीन में जगह बनाकर घरेलू दर्शकों के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. भारतीय निशानेबाजों का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि विश्व स्तर पर भारत की पिस्टल शूटिंग लगातार मजबूत हो रही है.
13 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर, अंतरराष्ट्रीय मंचों लहराया तिरंगा
ईशा सिंह ने महज 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. हैदराबाद में जन्मी ईशा ने कम उम्र में बड़े मुकाबलों का अनुभव हासिल करने के बाद धीरे-धीरे अपने खेल में निरंतरता और तकनीकी मजबूती विकसित की लेकिन साल 2026 उनके लिए सबसे महत्पूर्ण रहा क्युकी इस साल म्यूनिख से लेकर चीन तक दोनों बार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने तिरंगे की शान बधाई है. म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप के दौरान महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतने के साथ उन्होंने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. लगातार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के कारण ईशा सिंह भारत की प्रमुख युवा पिस्टल निशानेबाजों में शामिल हो चुकी हैं.
एशियाई खेलों में बड़ा लक्ष्य, पिछली बार चार पदक किया था अपने नाम
एशियाई खेल ईशा के लिए खास महत्व रखते हैं. पिछले संस्करण में उन्होंने चार पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था और अब वह उससे भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही हैं. आने वाले महीनों में एशियाई खेलों के अलावा आईएसएसएफ विश्व चैंपियनशिप और दिसंबर में रोम में होने वाला विश्व कप फाइनल भी उनके सामने है. ईशा के लिए ये प्रतियोगिताएं सिर्फ मौजूदा सत्र की चुनौती नहीं, बल्कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी का हिस्सा भी हैं. उनका लक्ष्य लगातार अपनी तकनीक, निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को बेहतर करना है, ताकि जब ओलंपिक का मंच आए तो वह भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें.
भारत को ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने की तैयारी
विश्व रिकॉर्ड, विश्व कप के स्वर्ण और एशियाई खेलों में पिछली सफलता के बाद ईशा सिंह के सामने अब एक बड़ा लक्ष्य है. उम्मीद है की भारत को ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने की उनकी कोशिश को आने वाले वक़्त में सफलता मिलेगी. ईशा आने वाले हर मुकाबले को लॉस एंजिल्स 2028 की तैयारी के तौर पर देख रही हैं. लगातार मेहनत और सफलता के साथ ईशा देशभर के युवा निशानेबाजों के लिए प्रेरणा बनती जा रही हैं. कम उम्र में उनके नाम जुड़ी बड़ी उपलब्धियां नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल बन रही हैं. 2026 में जिस तरह ईशा ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है, उससे भारतीय खेल प्रशंसकों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं. अब नजर एशियाई खेलों पर है, जहां एक बार फिर ईशा के सटीक निशाने से तिरंगे को ऊंचाई मिलने की उम्मीद है.
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