'हमें भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे युवा चाहिए' | Hindi News Portal | Hindi News | Online Hindi News | swatantraawaz

'हमें भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे युवा चाहिए'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन

'भारतीय गणतंत्र की जीत: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' एक लोकतांत्रिक विरासत

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 12 August 2026 02:06:13 PM

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के राष्ट्रपति रहे रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर विश्वास व्यक्त कियाकि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा अपने आपमें भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज केलिए एक धरोहर बनेगी। उन्होंने कहाकि रामनाथ कोविंद ने अपनी आत्मकथा को बहुतही सटीक नाम दिया है-‘भारतीय गणतंत्र की जीत: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ कहने का भाव ये हैकि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमें भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिएं, जो परेशानियों से परास्त न हों, मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। उन्होंने कहाकि इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा, यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा और ऐसे युवाशक्ति के निर्माण केलिए जो प्रेरणा चाहिए रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र केलिए उनका योगदान पाठक किताब पढ़कर ही सर्वत्र जान सकते हैं। उन्होंने कहाकि रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा को उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी, अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसीको काफी कुछ सीखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री ने जीवन अनुभव साझा करते हुए कहाकि इंसान का एक स्वभाव होता हैकि कुछ अपनी सफलता का श्रेय खुदको देते हैं और जीवन की मुश्किलों, कठिनाइयों केलिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन जब व्यक्ति सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहाकि उनका एक बेहद सामान्य परिवार में कानपुर देहात में जन्म हुआ, उन्होंने अपनी किताब में वर्णन भी किया हैकि कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं, उसी कोशिश में आग में फंसकर उनकी माताजी की मृत्यु हो गई। प्रधानमंत्री ने कहाकि छोटीसी उम्र में माँ को इस तरह खो देना, कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूंकि मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही, उसके बावजूद भी आजभी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि संघर्षों केबीच कोविंदजी ने शिक्षा, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया और एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी, वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने। नरेंद्र मोदी ने कहाकि राष्ट्रपति बनने केबाद जब वे अपने गांव परौंख गए तो उन्होंने वहां अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया, गांव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गांव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसपर हर भारतवासी गर्व करता है। प्रधानमंत्री ने जिक्र कियाकि गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूपसे बहुत कुछ खोया था। उन्होंने कहाकि हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया, महात्मा गांधी, बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था, एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुंचने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहाकि रामनाथ कोविंदजी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुदका जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न, विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि कोविंदजी ने अपनी जीवनी में मोरारजी देसाई केसाथ अनुभवों के बारेमें भी इसमें विस्तार से बताया है। उन्होंने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया, वो अपने कर्तव्यों केलिए समर्पित रहे, सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया, संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूपमें भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूपमें भी उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहां तककि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने केबाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभीभी ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं, देश को जगा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। उन्होंने कहाकि सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुए ऑटोबायोग्राफ़ी केलिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने कहाकि कोविंदजी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं, अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त कियाकि रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफ़ी में उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियां सुरक्षित होंगी। प्रधानमंत्री ने खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करते हुए कहाकि रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं, इस शॉर्टकट के युग में भी एकबात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद करके जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसकी भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। प्रधानमंत्री ने कहाकि ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड के इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। आत्मकथा विमोचन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रामनाथ कोविंद के परिजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।