'खाड़ी देश जाने से कहीं अच्छा है भारतीय सेना में भर्ती होना', पूर्व गोरखा सैनिकों की मांग-युवाओं के लिए खुले अग्निवीर भर्ती

Image

भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट भी है।

Photo :

PTI

Former Gorkha Soldiers : नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिक चाहते हैं कि भारतीय सेना में उनके देश के युवाओं के लिए भर्ती दोबारा खुले। खासकर, नेपाली युवा अग्निपथ योजना में शामिल होकर 'अग्निवीर' बनें। इस मांग को लेकर पूर्व गोरखा सैनिकों एवं उनके समर्थकों ने पोखरा में प्रदर्शन किया है। बता दें कि भारत की आजादी के बाद से ही नेपाली युवा भारतीय सेना में भर्ती होते आए हैं लेकिन साल 2020 में इस पर रोक लग गई। अब भारतीय सेना में नेपाली युवाओं को दोबारा भर्ती करने की मांग जोर पकड़ रही है। यह मांग ऐसे समय उठी है जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ नेपाल की यात्रा पर जाने वाले हैं।

बुधवार को हुआ पोखरा में प्रदर्शन

नेपाल न्यूज पोर्टल रातोपति के मुताबिक पूर्व गोरखा सैनिकों का यह प्रदर्शन बुधवार को हुआ। इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन एक्स सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड पोखरा की ओर से किया गया। पूर्व सैनिकों के समूह ने जिला प्रशासन कार्यालय के जरिए अपना दो सूत्री मांग वाला ज्ञापन सरकार को सौंपा। इस ज्ञापन में सरकार से भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की बहाली तुरंत सुनिश्चित करने और पूर्व सैनिकों के नाम के आगे 'सैनिक' शब्द के इस्तेमाल की मांग की गई।

युवाओं की भर्ती पर नेपाल सरकार ने लगाई रोक

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिगेड के चैयरमैन कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने कहा कि सुगौली संधि के बाद दो शताब्दियों से अधिक समय तक नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती जारी रही, लेकिन अग्निपथ योजना लागू होने के बाद इस ऐतिहासिक परंपरा के महत्व पर खतरा मंडरा रहा है। खत्री के हवाले से रातोपति ने कहा, 'भारत में नेपाली युवाओं की भर्ती सुगौली संधि के बाद शुरू हुई और 207 वर्षों से जारी है। हालांकि, भारत द्वारा अग्निपथ योजना शुरू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने से वंचित कर दिया है।'

'खाड़ी देशों में काम करने से कहीं बेहतर है भारतीय सेना'

खत्री ने कहा कि भर्ती पर लगी रोक ने नेपाली युवाओं से रोजगार का अवसर छीन लिया है और पीढ़ियों से चली आ रही गोरखा सैनिकों की परंपरा को भी खतरे में डाल दिया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अग्निपथ योजना नेपाली युवाओं के लिए विदेशों में कठिन परिस्थितियों और कम वेतन वाली नौकरियों का बेहतर विकल्प हो सकती है। सरकार को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया, 'चार साल की अवधि में युवा विभिन्न सुविधाओं के साथ लगभग 45 से 50 लाख नेपाली रुपये कमा सकते हैं।' ज्ञापन में यह भी कहा गया, 'यह पेशा (भारतीय सेना में नौकरी) 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में न्यूनतम वेतन पर खाड़ी देशों में काम करने जाने से सैकड़ों गुना बेहतर है।'

चार साल की होती है अग्निवीरों की सेवा अवधि

भारत सरकार ने 2022 में सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए नई व्यवस्था के रूप में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष होती है, जिसके बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को आगे की सैन्य सेवा के लिए बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों के रिटेंशन प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

Alok Rao

आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें

  • Hindi News
  • World

End of Article