गंगा का जलस्तर बढ़ा, उन्नाव में बढ़ी मुश्किलें: तटवर्ती इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी; नाव बनी आवागमन का सहारा - Unnao News

गंगा का जलस्तर बढ़ा, उन्नाव में बढ़ी मुश्किलें:तटवर्ती इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी; नाव बनी आवागमन का सहारा

विशाल मौर्य | उन्नाव44 मिनट पहले

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उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने से गलियों और रास्तों पर आवागमन प्रभावित हो गया है। कई जगह लोगों को घर से बाहर निकलने और जरूरी सामान लाने-ले जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार सुबह गंगा का जलस्तर 112.23 मीटर दर्ज किया गया। बुधवार शाम यह 112.13 मीटर और गुरुवार सुबह 112.160 मीटर था। मंगलवार शाम से शुक्रवार सुबह तक जलस्तर में करीब 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है, हालांकि बढ़ने की रफ्तार फिलहाल धीमी है।

रविदास नगर समेत कई मोहल्लों में पहुंचा पानी

रविदास नगर के अलावा सैय्यद कंपाउंड, गोताखोर और कर्बला जैसे तटवर्ती मोहल्लों में बाढ़ का पानी अब लोगों के चबूतरों तक पहुंच गया है। गलियों में पानी भरने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहनों से निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में नाव लोगों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का प्रमुख साधन बनी हुई है।

बच्चों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर निकलने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। जरूरी सामान, दवा और अन्य जरूरतों के लिए भी लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई परिवार जलस्तर और बढ़ने की आशंका से चिंतित हैं।

घरों में रखा सामान खराब होने का डर

रविदास नगर में पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों को घरों में रखे खाद्यान्न, कपड़े और अन्य जरूरी सामान के खराब होने की चिंता सताने लगी है। लोगों का कहना है कि जलस्तर में तेजी भले न हो, लेकिन लगातार बढ़ता पानी नए हिस्सों में पहुंच रहा है। तटवर्ती इलाकों के लोगों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि जलस्तर और बढ़ने पर हालात और मुश्किल हो सकते हैं।

बिजली-पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भी चिंता

बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ प्रभावित मोहल्लों में बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जलभराव से गंदगी और जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है। लंबे समय तक पानी जमा रहने पर मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई, पीने के पानी और दवाओं की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नावों और राहत व्यवस्था की तैयारी की मांग की जा रही है।

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