रिसॉर्ट बनाने उजाड़ रहे थे पेड़, तो ग्रामीणों ने काम ही रुकवा दिया - Mahasamund News

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महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत कोकड़ी में निस्तारी जमीन को रिसॉर्ट और औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित किया जा रहा है। इससे गांव के पशुपालन और आजीविका पर सीधा और गंभीर संकट आ गया है। इससे नाराज कोकड़ी के 120 से ज्यादा ग्रामीण शुक्रवार को कलेक्टर दफ्तर पहुंचे।

गुरुवार को फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी जेसीबी लेकर गांव में पहुंचे। वहां जमीन का सीमांकन कराने के लिए लगे पेड़ काटने लगे। जेसीबी से पेड़ उखाड़ने लगे। करीब 50 से ज्यादा पेड़ जेसीबी से उखाड़कर फेंक दिए गए। यह देख ग्रामीण नाराज हो गए। ग्रामीणों ने काम रुकवाया। उन्होंने तत्काल तहसीलदार से बात की। इसके बाद जेसीबी को वापस लौटाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम कोकड़ी, ग्राम पंचायत खट्टा, रा.नि.मं. पटेवा, उपतहसील पटेवा में स्थित खसरा नंबर 162, 163, 164 और 289 की कुल 20.71 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में घास-चारागाह मद में दर्ज है। यह भूमि पीढ़ियों से गांव के मवेशियों की चराई और निस्तार का एकमात्र साधन रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, इसी भूमि में से 2.40 हेक्टेयर को रिसॉर्ट निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को आवंटित करने का प्रस्ताव है। शेष भूमि को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को देने का प्रस्ताव है। ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव क्रमांक 01 (1 जनवरी 2025) के माध्यम से इस आवंटन पर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद आदेश जारी कर दिए गए। इस मौके पर हेमंत पटेल, शिवचरण, लक्ष्मीलाल, प्रमोद, मोहित, महेश्वर, पवन, सुखराम, सोमन, नामदेव, पप्पू यादव, संतु राम कामता, गीतकुमार, हरिराम, विष्णु पटेल, झाड़ू राम बांधे, गणेश राम, टारजन, निरंजन, रेखा, यशवंत, शकुंतला, गायत्री, सरिता, चांदनी पटेल, कुलेश्वरी, ईश्वरी, शांति, प्रेमिन, मंजू, दुर्गा पटेल मौजूद थे। ग्रामीणों का कहना है कि बिना उनकी सहमति के जमीन का अधिग्रहण करना पूरी तरह अन्याय है। गांव में पहले से ही चारागाह के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है। यदि यह भूमि भी औद्योगिक और रिसॉर्ट के नाम पर ले ली गई, तो यहां के किसानों और पशुपालकों के सामने चारागाह का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा। इससे मवेशी भूखे मरने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। किसान बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। यहां 5 एकड़ जमीन में करीब 3 हजार से ज्यादा पौधे लगे हैं। इससे हरियाली भी खत्म हो जाएगी। ग्रामीण ओमप्रकाश, कन्हैया लाल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के तहत किसी भी गांव की कुल कृषि भूमि के 2 प्रतिशत से अधिक भूमि को अन्य प्रयोजन के लिए नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर यह आवंटन किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर ग्रामीणों के अधिकारों पर हमला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा नंबर 164 की 11.22 हेक्टेयर सहित सभी विवादित भूमि का आवंटन आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। जमीन को सुरक्षित चारागाह घोषित किया जाए।