Dadraul Assembly Caste Equations ददरौल विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027
Dadraul Assembly Caste Equations में लोधी-वर्मा, ठाकुर, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, यादव और कश्यप मतदाता 2027 की चुनावी लड़ाई की प्रमुख सामाजिक धुरियां हैं। शाहजहांपुर जिले की विधानसभा संख्या 136 ददरौल में 10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 3,21,880 मतदाता हैं। मौजूदा विधायक भाजपा के अरविंद कुमार सिंह हैं, जिन्होंने 2024 के उपचुनाव में सपा के अवधेश कुमार वर्मा को 16,795 वोट से हराया था। उसी दिन हुए लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने ददरौल विधानसभा खंड में सपा पर 18,467 वोट की बढ़त बनाई। यानी 2022, 2024 उपचुनाव और 2024 लोकसभा—तीनों हालिया चुनावी परीक्षणों में भाजपा यहां आगे रही है।
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।
उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
शाहजहांपुर जिले के ददरौल विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।
ददरौल सामान्य यानी अनारक्षित विधानसभा सीट है और शाहजहांपुर अनुसूचित जाति आरक्षित लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट 1967 में अस्तित्व में आई और 2008 के परिसीमन के बाद इसे मौजूदा विधानसभा संख्या 136 मिली। वर्तमान क्षेत्र में मदनापुर, कांट, जमौर, ददरौल और सेहरामऊ दक्षिणी से जुड़े इलाके शामिल हैं। 2011 आधारित सामाजिक प्रोफाइल में करीब 94.72 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 5.28 प्रतिशत शहरी बताई जाती है, जबकि अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी लगभग 19.76 प्रतिशत है।
ददरौल विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | ददरौल |
| विधानसभा संख्या | 136 |
| जिला | शाहजहांपुर |
| लोकसभा क्षेत्र | शाहजहांपुर (SC) |
| आरक्षण स्थिति | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | अरविंद कुमार सिंह |
| पार्टी | भाजपा |
| 2026 कुल मतदाता | 3,21,880 |
| पुरुष मतदाता | 1,78,531 |
| महिला मतदाता | 1,43,321 |
| थर्ड जेंडर | 28 |
| SIR से पहले मतदाता | 3,73,978 |
| SIR नेट कमी | 52,098 |
| SIR कमी | 13.93% |
| 2022 विजेता | मानवेंद्र सिंह, BJP |
| 2022 उपविजेता | राजेश कुमार वर्मा, SP |
| 2022 जीत का अंतर | 9,701 वोट |
| 2024 उपचुनाव विजेता | अरविंद कुमार सिंह, BJP |
| 2024 उपचुनाव अंतर | 16,795 वोट |
| 2024 लोकसभा में BJP वोट | 1,06,866 |
| 2024 लोकसभा में SP वोट | 88,399 |
| 2024 BJP बढ़त | 18,467 वोट |
| ग्रामीण सामाजिक हिस्सा | करीब 94.72% |
| SC सामाजिक हिस्सा | करीब 19.76% |
| प्रमुख सामाजिक समूह | लोधी-वर्मा, ठाकुर, मुस्लिम, SC, ब्राह्मण, यादव, कश्यप |
2026 SIR से पहले ददरौल में 3,73,978 मतदाता थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 3,21,880 रह गई। यानी 52,098 मतदाताओं की नेट कमी हुई, जो करीब 13.93 प्रतिशत है। शाहजहांपुर जिले की छह विधानसभा सीटों में संख्या के लिहाज से ददरौल में सबसे कम नेट कमी दर्ज हुई।
Dadraul Assembly Caste Equations को समझने के लिए केवल एक जाति को देखना पर्याप्त नहीं है। पुराने चुनावी आकलनों में किसान/लोधी सामाजिक आधार को करीब 85 हजार, ठाकुर 71 हजार, मुस्लिम 70 हजार, दलित 55 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, यादव 40 हजार और कश्यप करीब 11 हजार बताया गया था। एक अन्य पुराने आकलन में ब्राह्मण, लोधी, ठाकुर और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या इससे काफी अलग बताई गई थी। इसलिए जाति-वार संख्या को केवल संकेतात्मक राजनीतिक अनुमान माना जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग विधानसभा स्तर पर जाति-वार मतदाता संख्या जारी नहीं करता। पुराने अनुमानों में कई श्रेणियां एक-दूसरे से ओवरलैप भी करती हैं—जैसे ‘किसान/लोधी’। इसलिए नीचे की तालिका को 2026 की आधिकारिक जातिगत गणना नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव का पुराना चुनावी संकेत माना जाए।
ददरौल विधानसभा का संकेतात्मक जातीय समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराना संकेतात्मक अनुमान | 2027 में महत्व |
|---|---|---|
| किसान/लोधी | करीब 85 हजार* | BJP-SP दोनों के लिए प्रमुख OBC आधार |
| ठाकुर | करीब 71 हजार* | मौजूदा विधायक की सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण भी अहम |
| मुस्लिम | करीब 70 हजार* | विपक्ष के लिए बड़ा स्वतंत्र सामाजिक ब्लॉक |
| अनुसूचित जाति/दलित | करीब 55 हजार* | BJP-SP-BSP तीनों के लिए महत्वपूर्ण |
| ब्राह्मण | करीब 45 हजार* | सवर्ण राजनीति की प्रमुख धुरी |
| यादव | करीब 40 हजार* | SP का महत्वपूर्ण सामाजिक आधार |
| कश्यप | करीब 11 हजार* | गैर-यादव OBC स्विंग वोट |
| अन्य OBC/सवर्ण | क्षेत्रवार प्रभाव | करीबी मुकाबलों में महत्वपूर्ण |
| 2026 कुल मतदाता | 3,21,880 | — |
*ये पुराने और गैर-आधिकारिक चुनावी अनुमान हैं। इनका योग कुल मतदाता से मिलाना उचित नहीं है, क्योंकि श्रेणियों और आकलन पद्धति में ओवरलैप है।
लोधी-वर्मा वोट ददरौल की राजनीति की बड़ी OBC धुरी
ददरौल की राजनीति में लोधी-वर्मा सामाजिक आधार लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। 2002 और 2007 में अवधेश कुमार वर्मा ने बसपा के टिकट पर लगातार दो चुनाव जीते। 2012 में राममूर्ति सिंह वर्मा सपा से विधायक बने। 2022 में भी सपा ने राजेश कुमार वर्मा को उम्मीदवार बनाया और 2024 के उपचुनाव में अवधेश कुमार वर्मा को मैदान में उतारा।
यह लगातार उम्मीदवार चयन बताता है कि वर्मा-लोधी सामाजिक आधार को अलग-अलग दलों ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना है।
2022 में सपा के राजेश कुमार वर्मा को 91,256 वोट मिले थे। 2024 उपचुनाव में अवधेश कुमार वर्मा ने 89,177 वोट हासिल किए। दोनों बार सपा मुख्य मुकाबले में रही, लेकिन भाजपा को नहीं हरा सकी।
2027 में सपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि वह अपने लोधी-वर्मा समर्थन को मुस्लिम, यादव, दलित और दूसरे OBC समुदायों के साथ कितना व्यापक बना पाती है।
ठाकुर वोट और वर्तमान भाजपा नेतृत्व
मौजूदा विधायक अरविंद कुमार सिंह ठाकुर सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं। वह दिवंगत विधायक मानवेंद्र सिंह के पुत्र हैं और 2024 के उपचुनाव में पहली बार विधायक चुने गए। मानवेंद्र सिंह ने 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते थे। उनके निधन के बाद भाजपा ने अरविंद कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया और परिवार की राजनीतिक पकड़ बरकरार रही।
पुराने चुनावी अनुमान में ठाकुर मतदाता करीब 71 हजार बताए गए थे, हालांकि एक दूसरे अनुमान में संख्या लगभग 30 हजार थी। यह बड़ा अंतर बताता है कि वास्तविक जाति-वार संख्या पर भरोसेमंद आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
फिर भी राजनीतिक इतिहास में वर्तमान विधायक परिवार और पुराने ठाकुर नेतृत्व की मौजूदगी इस समुदाय को 2027 की भाजपा रणनीति के केंद्र में रखती है।
भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि ठाकुर समर्थन केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित न रहे, बल्कि लोधी, ब्राह्मण, दलित और दूसरे OBC मतों के साथ 2024 जैसा व्यापक गठजोड़ बना रहे।
मुस्लिम मतदाता निर्णायक, लेकिन अकेले नहीं बनता जीत का समीकरण
पुराने विस्तृत चुनावी अनुमान में ददरौल के मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 70 हजार बताई गई थी। एक पुरानी विधानसभा-वार सूची में मुस्लिम हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत तक मानी गई थी। दोनों आंकड़े 2026 की आधिकारिक गणना नहीं हैं, लेकिन इतना जरूर स्पष्ट करते हैं कि मुस्लिम समुदाय सीट के बड़े सामाजिक समूहों में शामिल है।
ददरौल के पुराने चुनावी इतिहास में मुस्लिम नेतृत्व भी मजबूत रहा है। 1977 में मंसूर अली निर्दलीय और 1980 में नाजिर अली चुनाव जीते थे। 2007 में सपा के अनवर अली उर्फ जकीउर्रहमान 37,599 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। 2012 में बसपा के रिजवान अली 57,088 वोट के साथ उपविजेता रहे।
2017 के बाद चुनावी ध्रुवीकरण बदल गया और सपा के गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों ने मुख्य विपक्षी स्थान संभाला।
2027 में मुस्लिम मतों की दिशा SP के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। लेकिन पिछले तीन चुनाव बताते हैं कि मुस्लिम समर्थन के साथ लोधी-वर्मा, यादव, दलित और दूसरे ग्रामीण समुदायों में मजबूत हिस्सेदारी के बिना भाजपा को चुनौती देना कठिन है।
ब्राह्मण वोट ददरौल में पुराने कांग्रेस आधार से लेकर BJP गठजोड़ तक अहम
पुराने जातीय आकलनों में ददरौल में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 45 हजार बताई गई थी। इस संख्या को 2026 का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता, लेकिन विधानसभा का पुराना इतिहास ब्राह्मण नेतृत्व की राजनीतिक ताकत जरूर दिखाता है।
रामऔतार मिश्र इस सीट से चार बार विधायक रहे। उन्होंने 1985, 1989, 1993 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इससे पहले 1974 में गिरजा किशोर मिश्र निर्दलीय विधायक बने थे।
यानी ददरौल में ब्राह्मण वोट का राजनीतिक महत्व केवल भाजपा के हालिया दौर तक सीमित नहीं है।
आज BJP के लिए ब्राह्मण मतदाता उसके ठाकुर और गैर-यादव OBC आधार के साथ महत्वपूर्ण सवर्ण समर्थन हैं। सपा यदि 2027 में इस वर्ग में कुछ हजार वोट की सेंध लगाती है तो मुकाबले का अंतर कम हो सकता है।
दलित वोट करीब पांचवां सामाजिक हिस्सा, BSP की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण
2011 आधारित सामाजिक प्रोफाइल में ददरौल की अनुसूचित जाति आबादी करीब 19.76 प्रतिशत बताई जाती है। पुराने चुनावी अनुमान दलित मतदाताओं की संख्या करीब 55 हजार तक रखते थे। यह संख्या मौजूदा 2026 वोटर लिस्ट की जाति-वार गणना नहीं है, लेकिन SC सामाजिक आधार को सीट की बड़ी ताकत बनाती है।
बसपा का ददरौल में मजबूत राजनीतिक इतिहास रहा है।
2002 में बसपा ने सीट जीती।
2007 में फिर बसपा जीती।
2012 में पार्टी 57,088 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रही।
2017 में उसे 50,762 वोट मिले।
2022 में बसपा का वोट घटकर 21,671 रह गया।
2024 उपचुनाव में पार्टी फिर 20,742 वोट हासिल करने में सफल रही।
ददरौल में BSP का चुनावी प्रदर्शन
| चुनाव | BSP वोट | स्थिति |
|---|---|---|
| 2007 | 43,425 | विजेता |
| 2012 | 57,088 | दूसरा |
| 2017 | 50,762 | तीसरा |
| 2022 | 21,671 | तीसरा |
| 2024 उपचुनाव | 20,742 | तीसरा |
इन सभी वोटों को दलित मत कहना गलत होगा। बसपा उम्मीदवार की जाति और दूसरे समुदायों का समर्थन भी कुल वोट में शामिल रहता है।
फिर भी 20 हजार के आसपास बना BSP वोट 2027 में महत्व रखता है, क्योंकि 2022 में BJP की जीत सिर्फ 9,701 वोट की थी। मजबूत BSP उम्मीदवार BJP और SP दोनों का गणित बदल सकता है।
यादव वोट SP के लिए महत्वपूर्ण लेकिन संख्या से आगे गठजोड़ जरूरी
पुराने चुनावी अनुमान में ददरौल में करीब 40 हजार यादव मतदाता बताए गए थे। यह सपा के लिए महत्वपूर्ण परंपरागत OBC आधार है।
लेकिन ददरौल की राजनीति में SP ने हालिया चुनावों में यादव प्रत्याशी के बजाय वर्मा-लोधी नेतृत्व को प्राथमिकता दी है। 2012 में राममूर्ति सिंह वर्मा ने पार्टी को जीत दिलाई। 2017 में वही 69,037 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। 2022 में राजेश कुमार वर्मा और 2024 उपचुनाव में अवधेश वर्मा मुख्य उम्मीदवार बने।
इसका अर्थ है कि SP का संभावित ददरौल मॉडल यादव + मुस्लिम + लोधी-वर्मा + दलित/OBC गठजोड़ पर आधारित रहा है।
2027 में PDA रणनीति की सफलता इसी बात से तय होगी कि पार्टी यादव-मुस्लिम आधार से बाहर कितना गैर-यादव OBC और SC समर्थन जोड़ पाती है।
कश्यप और दूसरे छोटे OBC करीबी मुकाबले में कर सकते हैं बड़ा असर
पुराने चुनावी अनुमान में कश्यप मतदाता करीब 11 हजार बताए गए थे। इनके अलावा पाल, मौर्य, कुर्मी और दूसरे छोटे OBC समूह भी अलग-अलग गांवों में मौजूद हैं।
11 हजार की संख्या देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों के अंतर से तुलना करें तो महत्व बढ़ जाता है।
2022 में BJP की जीत 9,701 वोट की थी।
यानी किसी 10-15 हजार के सामाजिक समूह में कुछ हजार वोट का बदलाव भी अंतिम परिणाम से बड़ा हो सकता है।
इसीलिए भाजपा गैर-यादव OBC समर्थन को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि सपा इसी हिस्से में सेंध को जीत के संभावित रास्ते के रूप में देखेगी।
ददरौल वोटर लिस्ट 2026: कुल 3,21,880 मतदाता
10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची में ददरौल विधानसभा में कुल 3,21,880 मतदाता हैं। इनमें 1,78,531 पुरुष, 1,43,321 महिला और 28 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
ददरौल विधानसभा वोटर लिस्ट 2026
| मतदाता वर्ग | संख्या |
|---|---|
| पुरुष | 1,78,531 |
| महिला | 1,43,321 |
| थर्ड जेंडर | 28 |
| कुल मतदाता | 3,21,880 |
पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच 35,210 का अंतर है। वहीं 1.43 लाख से अधिक महिला मतदाता किसी भी एक पुराने जातिगत अनुमान से बड़ा चुनावी वर्ग हैं।
इसलिए 2027 में जातीय गणित के साथ महिला मतदाताओं की स्वतंत्र प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण होंगी। राशन, आवास, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, बिजली, सुरक्षा, सड़क और घरेलू अर्थव्यवस्था जैसे सवाल जाति से अलग मतदान को प्रभावित कर सकते हैं।
SIR में ददरौल से 52,098 मतदाता कम
27 अक्टूबर 2025 की सूची में ददरौल विधानसभा में 3,73,978 मतदाता थे। इनमें 2,00,480 पुरुष, 1,73,449 महिला और 49 थर्ड जेंडर मतदाता थे। 10 अप्रैल 2026 की अंतिम सूची में यह संख्या 3,21,880 रह गई।
| विवरण | मतदाता |
|---|---|
| SIR से पहले | 3,73,978 |
| 2026 अंतिम सूची | 3,21,880 |
| नेट कमी | 52,098 |
| कमी प्रतिशत | 13.93% |
शाहजहांपुर जिले में मतदाता संख्या की सबसे कम नेट कटौती ददरौल में हुई, लेकिन 52 हजार से अधिक का बदलाव फिर भी चुनावी दृष्टि से बहुत बड़ा है।
इस कमी को किसी पार्टी, जाति या धर्म के वोट से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
इसका असली असर बूथ स्तर पर होगा। राजनीतिक दलों को 2022 और 2024 के बूथ डेटा को 2026 की नई मतदाता सूची के साथ दोबारा मिलाना होगा।
2012 से 2026 तक कैसे बदला ददरौल का मतदाता आधार?
2012 विधानसभा चुनाव में ददरौल में 3,02,477 मतदाता थे। 2017 तक यह संख्या बढ़कर 3,30,219 हो गई। 2022 में कुल मतदाता करीब 3,55,882 थे। 2024 लोकसभा चुनाव में सेवा मतदाताओं सहित कुल मतदाता 3,73,862 दर्ज हुए। 2026 की अंतिम सूची में संख्या घटकर 3,21,880 रह गई।
ददरौल में मतदाताओं का ट्रेंड
| वर्ष | कुल मतदाता |
|---|---|
| 2012 | 3,02,477 |
| 2017 | 3,30,219 |
| 2022 | 3,55,882 |
| 2024 लोकसभा | 3,73,862 |
| SIR पूर्व 2025 | 3,73,978 |
| 2026 अंतिम सूची | 3,21,880 |
2024 से 2026 की अलग-अलग आधार तिथियों वाली सूचियों की तुलना में करीब 51,982 मतदाताओं की नेट कमी दिखाई देती है। SIR की आधिकारिक तत्काल पूर्व सूची के मुकाबले कमी 52,098 है।
2024 उपचुनाव ने बदली ददरौल की राजनीतिक तस्वीर
ददरौल की 2027 की राजनीति समझने के लिए केवल 2022 का चुनाव पर्याप्त नहीं है। जनवरी 2024 में भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के निधन के बाद सीट खाली हुई और लोकसभा चुनाव के साथ 13 मई 2024 को उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने उनके पुत्र अरविंद कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया।
अरविंद कुमार सिंह को 1,05,972 वोट मिले।
सपा के अवधेश कुमार वर्मा को 89,177 वोट।
बसपा के सर्वेश चंद्र मिश्रा को 20,742 वोट।
भाजपा ने 16,795 वोट से सीट जीत ली।
ददरौल विधानसभा उपचुनाव 2024
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| अरविंद कुमार सिंह | BJP | 1,05,972 |
| अवधेश कुमार वर्मा | SP | 89,177 |
| सर्वेश चंद्र मिश्रा | BSP | 20,742 |
| रामपाल | अन्य | 796 |
| स्वयं प्रकाश कौशल | अन्य | 664 |
| कंचन | निर्दलीय | 577 |
| राशिद खान | निर्दलीय | 512 |
| NOTA | — | 1,322 |
| BJP की जीत | — | 16,795 वोट |
2022 में BJP की जीत 9,701 वोट की थी। उपचुनाव में बढ़त 7,094 वोट बढ़कर 16,795 हो गई।
उपचुनाव में मतदान करीब 58.66 प्रतिशत रहा, जबकि 2022 विधानसभा चुनाव में लगभग 61.50 प्रतिशत मतदान हुआ था।
2022 में BJP ने 9,701 वोट से बचाई थी सीट
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा के मानवेंद्र सिंह को 1,00,957 वोट मिले। समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार वर्मा ने 91,256 वोट हासिल किए। भाजपा की जीत का अंतर 9,701 वोट था। बसपा के चंद्रकेतु मौर्य को 21,671 वोट मिले।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| मानवेंद्र सिंह | BJP | 1,00,957 |
| राजेश कुमार वर्मा | SP | 91,256 |
| चंद्रकेतु मौर्य | BSP | 21,671 |
| अन्य प्रत्याशी | — | शेष |
| BJP की जीत | — | 9,701 वोट |
2022 तक ददरौल का चुनाव काफी हद तक BJP-SP के बीच केंद्रित हो गया था। बसपा 2017 के 50 हजार से अधिक वोट से घटकर 21 हजार के आसपास रह गई।
2017 में BJP ने पहली बार जीती ददरौल सीट
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के मानवेंद्र सिंह ने 86,435 वोट हासिल किए। सपा के राममूर्ति सिंह वर्मा को 69,037 वोट, जबकि बसपा के रिजवान अली को 50,762 वोट मिले। BJP ने 17,398 वोट से जीत दर्ज की।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2017
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| मानवेंद्र सिंह | BJP | 86,435 | 40.36% |
| राममूर्ति सिंह वर्मा | SP | 69,037 | 32.23% |
| रिजवान अली | BSP | 50,762 | 23.70% |
| रूपा | CPI | 2,387 | 1.11% |
| NOTA | — | 2,383 | 1.11% |
| BJP की जीत | — | 17,398 वोट | — |
यह भाजपा की ददरौल में पहली विधानसभा जीत थी। उससे पहले सीट पर कांग्रेस, बसपा, सपा, जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार अलग-अलग दौर में जीतते रहे थे।
2012 में SP ने सिर्फ 4,879 वोट से जीती सीट
2012 विधानसभा चुनाव में सपा के राममूर्ति सिंह वर्मा को 61,967 वोट मिले। बसपा के रिजवान अली को 57,088, भाजपा के अवधेश कुमार वर्मा को 28,845 और महान दल के देवेंद्र पाल सिंह को 28,241 वोट मिले। सपा की जीत का अंतर सिर्फ 4,879 वोट था।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2012
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| राममूर्ति सिंह वर्मा | SP | 61,967 | 29.35% |
| रिजवान अली | BSP | 57,088 | 27.04% |
| अवधेश कुमार वर्मा | BJP | 28,845 | 13.66% |
| देवेंद्र पाल सिंह | महान दल | 28,241 | 13.38% |
| कौशल कुमार मिश्रा | कांग्रेस | 21,186 | 10.04% |
| SP की जीत | — | 4,879 वोट | — |
2012 में वोट पांच बड़े राजनीतिक खेमों में बंटा हुआ था। सपा 30 प्रतिशत से कम वोट लेकर भी सीट जीत गई।
2022 और 2024 की तुलना में यह बिल्कुल अलग चुनावी संरचना थी, जब मुकाबला BJP-SP के बीच अधिक केंद्रित हो चुका था।
2007 में BSP ने 5,826 वोट से दर्ज की थी जीत
2007 विधानसभा चुनाव में बसपा के अवधेश कुमार वर्मा को 43,425 वोट मिले। समाजवादी पार्टी के अनवर अली उर्फ जकीउर्रहमान ने 37,599 वोट हासिल किए। बसपा ने 5,826 वोट से सीट जीती।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2007
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| अवधेश कुमार वर्मा | BSP | 43,425 |
| अनवर अली उर्फ जकीउर्रहमान | SP | 37,599 |
| नरवीर सिंह | कांग्रेस | 13,337 |
| नत्थू लाल | निर्दलीय | 7,795 |
| मुकेश | निर्दलीय | 4,599 |
| BJP प्रत्याशी | BJP | 4,203 |
| BSP की जीत | — | 5,826 वोट |
2007 का चुनाव 2008 के परिसीमन से पहले की सीमा पर हुआ था, इसलिए उसके गांववार और जातीय भूगोल को 2012 के बाद की सीट पर सीधे लागू करना सही नहीं होगा।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2007-2024 का तुलनात्मक इतिहास
| वर्ष | विजेता | पार्टी | विजेता वोट | उपविजेता | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|
| 2007* | अवधेश कुमार वर्मा | BSP | 43,425 | अनवर अली, SP | 5,826 |
| 2012 | राममूर्ति सिंह वर्मा | SP | 61,967 | रिजवान अली, BSP | 4,879 |
| 2017 | मानवेंद्र सिंह | BJP | 86,435 | राममूर्ति सिंह वर्मा, SP | 17,398 |
| 2022 | मानवेंद्र सिंह | BJP | 1,00,957 | राजेश कुमार वर्मा, SP | 9,701 |
| 2024 उपचुनाव | अरविंद कुमार सिंह | BJP | 1,05,972 | अवधेश कुमार वर्मा, SP | 16,795 |
*2007 का चुनाव परिसीमन से पहले की सीमा पर हुआ था।
इस क्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव 2017 के बाद दिखाई देता है। 2007 में BJP सिर्फ 4,203 वोट पर थी, लेकिन 2017 में उसने पहली बार सीट जीती और उसके बाद 2022 तथा 2024 उपचुनाव में भी जीत बरकरार रखी।
2024 लोकसभा चुनाव में भी BJP ने बनाई 18,467 वोट की बढ़त
2024 लोकसभा चुनाव और ददरौल उपचुनाव एक ही दिन हुए थे। लोकसभा चुनाव में ददरौल विधानसभा खंड से भाजपा को 1,06,866 वोट, जबकि सपा को 88,399 वोट मिले। भाजपा यहां 18,467 वोट आगे रही।
ददरौल विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024
| पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|
| BJP | 1,06,866 | 48.54% |
| SP | 88,399 | 40.15% |
| BJP की बढ़त | 18,467 | करीब 8.39 अंक |
उसी मतदान में विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार को 1,05,972 और सपा उम्मीदवार को 89,177 वोट मिले। यानी मतदाताओं ने लोकसभा और विधानसभा दोनों मतपत्रों/ईवीएम में लगभग समान BJP-SP अंतर बनाया।
यह 2027 के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि उपचुनाव के परिणाम को केवल सहानुभूति लहर का नतीजा मानने की सीमा भी सामने आती है—लोकसभा खंड में भी भाजपा लगभग 18.5 हजार वोट आगे थी। हालांकि दोनों चुनाव एक ही राजनीतिक माहौल में हुए थे, इसलिए इन्हें दो पूरी तरह स्वतंत्र परीक्षण नहीं माना जा सकता।
2022 से 2024 तक BJP की बढ़त बढ़ी
ददरौल के हालिया चुनावी मार्जिन देखें—
| चुनाव | BJP की बढ़त |
|---|---|
| 2017 विधानसभा | 17,398 |
| 2022 विधानसभा | 9,701 |
| 2024 उपचुनाव | 16,795 |
| 2024 लोकसभा खंड | 18,467 |
2017 के मुकाबले 2022 में भाजपा की बढ़त लगभग आधी हो गई थी, लेकिन 2024 में पार्टी ने उपचुनाव और लोकसभा दोनों में अंतर फिर बढ़ाया।
इसलिए 2027 में ददरौल को BJP की मजबूत सीट कहा जा सकता है, लेकिन सुरक्षित सीट मानना जल्दबाजी होगी। 2012 और 2022 दोनों में यहां मुकाबले का अंतर दस हजार से कम रहा है और उम्मीदवार बदलने पर सामाजिक गठजोड़ तेजी से बदलने का पुराना इतिहास है।
94 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र, किसान राजनीति सबसे बड़ा साझा मुद्दा
ददरौल की करीब 94.72 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है। इसलिए जातिगत समीकरण के समानांतर किसान और गांव की बुनियादी सुविधाएं चुनाव में बड़ा प्रभाव डालती हैं।
ददरौल, मदनापुर, कांट, जमौर और सेहरामऊ दक्षिणी से जुड़े क्षेत्रों में कृषि बड़ी आजीविका है। पुराने स्थानीय चुनावी मुद्दों में सिंचाई के साधनों की कमी, ग्रामीण सड़क और पेयजल प्रमुख समस्याओं में शामिल रहे हैं।
2027 में किसान आय, धान-गेहूं खरीद, गन्ना भुगतान, खाद-बीज, बिजली, सिंचाई, ग्रामीण सड़क और आवारा पशु जैसे सवाल अलग-अलग जातियों को समान रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
उद्योग सबसे ज्यादा, फिर भी रोजगार रहेगा चुनावी सवाल
ददरौल की दूसरी विशेषता इसका औद्योगिक आधार है। पुराने क्षेत्रीय प्रोफाइल में इसे शाहजहांपुर जिले की सबसे अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयों वाली विधानसभा बताया गया है। जमौर-पिपरोला क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक और ऊर्जा इकाइयों की मौजूदगी रही है।
इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर रोजगार में हिस्सेदारी पुराने चुनावी विमर्श का मुद्दा रही है। औद्योगिक गतिविधि के साथ प्रदूषण और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार अवसरों का सवाल भी उठता रहा है।
2027 में भाजपा इस औद्योगिक आधार और विकास कार्यों को उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष स्थानीय रोजगार, प्रदूषण और उद्योग से आसपास के गांवों को मिले वास्तविक लाभ का सवाल उठा सकता है।
गर्रा-खन्नौत और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र भी स्थानीय राजनीति का हिस्सा
ददरौल का एक हिस्सा हरदोई जिले की सीमा की ओर जाता है और कुछ क्षेत्र गर्रा तथा खन्नौत नदियों से प्रभावित होते रहे हैं। पुराने स्थानीय मुद्दों में बाढ़ और ग्रामीण संपर्क व्यवस्था की समस्या दर्ज रही है।
बाढ़, जलनिकासी, नदी किनारे संपर्क मार्ग और पुल जैसे विषय जातीय राजनीति से अलग साझा ग्रामीण मुद्दे बन सकते हैं।
ऐसे गांवों में मतदान व्यवहार स्थानीय विधायक और प्रशासन की उपलब्धता, राहत और बुनियादी कामों से भी प्रभावित हो सकता है।
महिला मतदाता 1.43 लाख, जातीय समीकरण से बड़ा स्वतंत्र वर्ग
2026 की अंतिम सूची में ददरौल में 1,43,321 महिला मतदाता हैं।
यह संख्या पुराने लोधी, ठाकुर, मुस्लिम या किसी दूसरे एकल जातीय अनुमान से काफी बड़ी है।
इसलिए महिला वोट को केवल परिवार या जाति के साथ स्वतः जुड़ा हुआ मानना चुनावी विश्लेषण को अधूरा कर सकता है।
राशन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क, सुरक्षा, घरेलू आय और महंगाई जैसे विषय महिला मतदान में स्वतंत्र असर डाल सकते हैं।
BJP के लिए 2027 का संभावित सामाजिक फॉर्मूला
ददरौल में भाजपा का संभावित 2027 सामाजिक फॉर्मूला इस तरह देखा जा सकता है—
ठाकुर + ब्राह्मण-सवर्ण + लोधी/गैर-यादव OBC का हिस्सा + SC मतों का हिस्सा + कश्यप व दूसरे OBC + महिला लाभार्थी वोट + मुस्लिम-यादव में सीमित सेंध
भाजपा के पक्ष में सबसे मजबूत तथ्य 2017, 2022 और 2024 उपचुनाव की लगातार तीन विधानसभा जीत हैं। 2024 लोकसभा में भी पार्टी ने ददरौल खंड से 18,467 वोट की बढ़त बनाई।
अरविंद कुमार सिंह के पास पारिवारिक राजनीतिक विरासत, वर्तमान विधायक होने का लाभ और 2024 की 16,795 वोट की व्यक्तिगत चुनावी जीत है।
2027 में भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि उपचुनाव में मौजूद सहानुभूति फैक्टर के बिना भी वही सामाजिक गठजोड़ कायम रहे।
SP के लिए लोधी-मुस्लिम-यादव के साथ दलित वोट जोड़ना जरूरी
सपा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला हो सकता है—
लोधी-वर्मा + मुस्लिम + यादव + SC का हिस्सा + कश्यप/मौर्य/अन्य OBC + ब्राह्मणों में सीमित सेंध
2012 में SP इस सीट को जीत चुकी है। 2017, 2022 और 2024 उपचुनाव में वह लगातार दूसरे स्थान पर रही।
2022 में पार्टी 91,256 और 2024 उपचुनाव में 89,177 वोट तक पहुंची। यानी लगभग 90 हजार का मजबूत आधार मौजूद है।
लेकिन BJP को हराने के लिए उसे बस अपना वर्तमान वोट बचाना पर्याप्त नहीं होगा। उसे BSP के करीब 20 हजार वोट, गैर-यादव OBC और सवर्ण मतदाताओं में अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल करनी होगी।
BSP की भूमिका ददरौल में अभी खत्म नहीं
ददरौल BSP के पुराने मजबूत क्षेत्रों में रहा है। पार्टी ने 2002 और 2007 में लगातार दो चुनाव जीते थे। 2012 में 57 हजार और 2017 में 50 हजार से अधिक वोट मिले। हाल के दोनों चुनावों—2022 और 2024 उपचुनाव—में उसका वोट करीब 20-21 हजार रहा।
यानी बसपा मुख्य लड़ाई से पीछे जरूर गई है, लेकिन उसका वोट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
यदि 2027 में BSP मजबूत दलित, ब्राह्मण, मुस्लिम या OBC उम्मीदवार उतारती है तो उसके वोट का सामाजिक स्रोत BJP-SP मुकाबले को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है।
20 हजार वोट वाली तीसरी पार्टी उस सीट पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहती है जहां 2022 की जीत 9,701 वोट की थी।
2026 की नई वोटर लिस्ट 2027 का सबसे बड़ा नया डेटा फैक्टर
ददरौल की रणनीति में तीन आंकड़े खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं—
| चुनावी डेटा | संख्या |
|---|---|
| 2022 BJP जीत | 9,701 |
| 2024 उपचुनाव BJP जीत | 16,795 |
| 2024 लोकसभा BJP बढ़त | 18,467 |
| 2026 SIR नेट कमी | 52,098 |
SIR में मतदाता आधार का बदलाव 2022 की जीत के अंतर से पांच गुना से अधिक और 2024 उपचुनाव के अंतर से तीन गुना से अधिक है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि कम हुए 52 हजार नाम BJP, SP या किसी खास जाति से जुड़े थे।
असल चुनावी असर बूथ स्तर पर है।
2024 में भाजपा जिस बूथ पर 200 वोट आगे थी या SP जहां 300 वोट आगे थी, नई सूची में वहां कुल मतदाता आधार बदल सकता है।
यही कारण है कि 2027 का सबसे उपयोगी राजनीतिक डेटा पुराने जातिगत अनुमान नहीं, बल्कि 3,21,880 मतदाताओं वाली नई बूथवार सूची होगी।
2027 में किन सामाजिक समूहों पर सबसे ज्यादा नजर?
सबसे पहला सवाल लोधी-वर्मा मतदाताओं का होगा। पुराने चुनावी अनुमान और लगातार SP-BSP उम्मीदवार चयन इस सामाजिक धुरी की बड़ी राजनीतिक भूमिका दिखाते हैं।
दूसरा, ठाकुर मतदाता। मौजूदा विधायक और उनका राजनीतिक परिवार इसी सामाजिक पृष्ठभूमि से है। 2024 की जीत के बाद BJP इस आधार को बरकरार रखना चाहेगी।
तीसरा, मुस्लिम मतदाता। पुराने अनुमान में करीब 70 हजार और पुराने राजनीतिक इतिहास में मजबूत प्रतिनिधित्व उन्हें विपक्ष के सबसे बड़े सामाजिक आधारों में रखता है।
चौथा, अनुसूचित जाति मतदाता। 2011 आधारित सामाजिक हिस्सेदारी करीब 19.76 प्रतिशत है और BSP का पुराना इतिहास इस वोट को BJP-SP-BSP तीनों के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
पांचवां, ब्राह्मण मतदाता। ददरौल के पुराने कांग्रेस इतिहास और मौजूदा BJP सवर्ण गठजोड़ में इस वर्ग का महत्व लगातार रहा है।
छठा, यादव और दूसरे OBC समूह। SP को यादव आधार के साथ कश्यप, मौर्य, पाल और दूसरे गैर-यादव पिछड़े समूहों में समर्थन बढ़ाना होगा।
सातवां, महिला मतदाता। 1.43 लाख से ज्यादा महिला वोटरों का मतदान किसी भी जातिगत गणित से बड़ा स्वतंत्र प्रभाव पैदा कर सकता है।
ददरौल विधानसभा चुनाव 2027 का जातीय गणित क्या संकेत देता है?
ददरौल के पिछले चुनाव, 2024 के दोहरे चुनावी परीक्षण और 2026 की नई मतदाता सूची को एक साथ रखें तो तस्वीर इस तरह बनती है—
| चुनावी संकेत | स्थिति |
|---|---|
| 2007 विधानसभा* | BSP +5,826 |
| 2012 विधानसभा | SP +4,879 |
| 2017 विधानसभा | BJP +17,398 |
| 2022 विधानसभा | BJP +9,701 |
| 2024 उपचुनाव | BJP +16,795 |
| 2024 लोकसभा खंड | BJP +18,467 |
| 2012 मतदाता | 3,02,477 |
| 2017 मतदाता | 3,30,219 |
| 2022 मतदाता | 3,55,882 |
| 2024 मतदाता | 3,73,862 |
| SIR पूर्व 2025 | 3,73,978 |
| 2026 मतदाता | 3,21,880 |
| SIR नेट कमी | 52,098 |
*2007 का चुनाव परिसीमन से पहले की सीमा पर हुआ था।
हालिया चुनावी इतिहास में भाजपा की स्थिति स्पष्ट रूप से मजबूत है। उसने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीते, 2024 उपचुनाव में सीट बचाई और उसी दिन लोकसभा चुनाव में भी ददरौल खंड से करीब 18.5 हजार वोट की बढ़त बनाई।
फिर भी Dadraul Assembly Caste Equations को 2027 में एकतरफा भाजपा सीट नहीं बनाते।
2012 में SP यहां जीत चुकी है।
2022 में उसकी हार सिर्फ 9,701 वोट की थी।
BSP अभी भी करीब 20 हजार वोट हासिल कर रही है।
और 2026 में मतदाता सूची का आधार 52 हजार से ज्यादा बदल चुका है।
भाजपा के लिए सबसे मजबूत रास्ता ठाकुर नेतृत्व के साथ ब्राह्मण, लोधी और दूसरे गैर-यादव OBC, अनुसूचित जाति के हिस्से और महिला मतदाताओं का व्यापक गठजोड़ बनाए रखने का है।
सपा के लिए लोधी-वर्मा, मुस्लिम और यादव समर्थन को अनुसूचित जाति तथा दूसरे OBC समुदायों के साथ जोड़ना जरूरी होगा। 90 हजार के आसपास का हालिया वोट बेस उसे मुकाबले में रखता है, लेकिन जीत के लिए अतिरिक्त सामाजिक विस्तार आवश्यक है।
बसपा यदि अपने 2012-17 के पुराने 50 हजार वाले स्तर की ओर लौटती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है। यदि वह 20 हजार के आसपास रहती है तो उसके उम्मीदवार की जातीय पृष्ठभूमि यह तय करेगी कि BJP या SP में से किसका गणित ज्यादा प्रभावित होगा।
जातीय समीकरण के समानांतर किसान, सिंचाई, बाढ़, ग्रामीण सड़क, पेयजल, स्थानीय उद्योगों में रोजगार, प्रदूषण, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे भी ददरौल में प्रभावी रहेंगे। करीब 95 प्रतिशत ग्रामीण सामाजिक संरचना के बावजूद यहां बड़ी औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी कृषि और उद्योग—दोनों को चुनावी विमर्श में रखती है।
यानी ददरौल विधानसभा चुनाव 2027 को केवल ठाकुर बनाम लोधी या BJP बनाम SP की लड़ाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली फैसला लोधी-वर्मा वोट की दिशा, ठाकुर समर्थन, मुस्लिम मतों की एकजुटता, अनुसूचित जाति वोट का बंटवारा, ब्राह्मण मतदाताओं का रुख, यादव-कश्यप और दूसरे OBC समूह, BSP उम्मीदवार की सामाजिक पृष्ठभूमि, अरविंद कुमार सिंह की व्यक्तिगत पकड़ और 2026 की नई मतदाता सूची के बूथवार बदलाव मिलकर करेंगे।
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समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।
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