जेंडर जस्टिस एंड चाइल्ड राइट्स क्लब की पहल: वैदिक साक्षरता के जरिए

नोएडा, 14 अगस्त 2026: जेंडर जस्टिस एंड चाइल्ड राइट्स क्लब, एमिटी लॉ स्कूल, एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश (AUUP), नोएडा द्वारा 14 अगस्त 2026 को “Empowering Women on Mental Health Through Vedic Literacy Tools” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं Article Writing Competition का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम क्लब की Domain Level Activity के अंतर्गत आयोजित किया गया।
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कार्यक्रम में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के संदर्भ में वैदिक ज्ञान एवं भारतीय दार्शनिक परंपराओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई। वैदिक काल की विदुषियों गार्गी और मैत्रेयी के बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए मंत्र-जप, स्वाध्याय, दिनचर्या, धर्म, योग एवं ध्यान जैसी वैदिक जीवन-पद्धतियों के माध्यम से मानसिक दृढ़ता, आत्म-जागरूकता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुश्री प्रीति पांडे, संस्थापक, दुलारी देवी फाउंडेशन; एडवोकेट विशाल मेहन, संस्थापक, एसएसजी लॉ चैंबर्स एलएलपी; तथा प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी, वेद वेदांगना के प्रमुख, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय उपस्थित रहे।
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कार्यशाला का मुख्य Theme “Basic values embodied in India culture and their relevance to national reconstruction” था, जिसमें ‘Empowering Bharat’ तथा दार्शनिक दृष्टिकोण से महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) डीके बंधौपाध्याय, मुख्य सलाहकार, एफपीओ एवं अध्यक्ष, एमिटी लॉ स्कूल, एयूयूपी तथा प्रो. (डॉ.) शेफाली रायज़ादा, निदेशक, एमिटी लॉ स्कूल, AUUP के मार्गदर्शन में किया गया।
आयोजन समिति में डॉ. एकता गुप्ता, चेयरपर्सन, जेंडर जस्टिस एंड चाइल्ड राइट्स क्लब, एसोसिएट प्रोफेसर, एमिटी लॉ स्कूल, AUUP और कन्वेनर; डॉ. चिहिनिता बरुआ, असिस्टेंट प्रोफेसर, एमिटी लॉ स्कूल, AUUP और को-कन्वेनर; श्री धैर्य ढींगरा, स्टूडेंट कन्वेनर, BALLB (H) 9th सेमेस्टर; और सुश्री जुविश पुंडीर, स्टूडेंट को-कन्वेनर, BALLB (H) 9th सेमेस्टर। शामिल रहे।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों एवं हितों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक दृढ़ता को प्रोत्साहित करना तथा वैदिक परंपराओं की शाश्वत ज्ञान-परंपरा को महिलाओं की समकालीन मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ना था।