महिंद्रा ओजेए के तीन साल पूरे, आधुनिक बागवानी को नई ताकत

21 अगस्त 2026, मुंबईमहिंद्रा ओजेए के तीन साल पूरे, आधुनिक बागवानी को नई ताकत – महिंद्रा ट्रैक्टर्स के ओजेए ट्रैक्टर मॉडल ने अपनी सफलता के तीन वर्ष पूरे किये । कंपनी के अनुसार, ओजेए ने भारत में कॉम्पैक्ट और हल्के 4WD ट्रैक्टरों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। इसे खासतौर पर बागवानी, अंगूर व फलों के बाग, गन्ने, अंतर-फसल और कतार वाली फसलों जैसी विशेष खेती के लिए तैयार किया गया है।

ओजेए रेंज अब 21 से 30 एचपी तक के कई मॉडलों में उपलब्ध है। इसका कॉम्पैक्ट आकार, बेहतर पावर-टू-वेट अनुपात, सटीक संचालन और नैरो-ट्रैक डिजाइन इसे सीमित जगह और फसल की कतारों के बीच काम करने के लिए उपयोगी बनाते हैं। इसमें 4WD मानक सुविधा के रूप में दी गई है, जिससे विभिन्न तरह की जमीन पर बेहतर पकड़, स्थिरता और उत्पादकता मिलती है। यह विभिन्न कृषि उपकरणों के साथ भी आसानी से काम कर सकता है।

मजबूत तीन-सिलेंडर इंजन वाली ओजेए रेंज अच्छा टॉर्क, ईंधन की बचत और भरोसेमंद प्रदर्शन देती है। पीआरओजेए टेक पैक में ePTO, EDDC, फॉरवर्ड-रिवर्स शटल और क्रीपर मोड जैसी सुविधाएं हैं, जो कृषि कार्यों में सटीकता और दक्षता बढ़ाती हैं। किसानों की सुविधा के लिए टिल्ट व टेलीस्कोपिक स्टीयरिंग, साइड-शिफ्ट कंट्रोल और एर्गोनॉमिक डिजाइन दिया गया है, जिससे लंबे समय तक काम करने पर थकान कम होती है।

मायओजेए टेक पैक के जरिए टेलीमैटिक्स सुविधा मिलती है, जबकि रोबोजा टेक पैक में ऑटो पीटीओ, ऑटो इम्प्लीमेंट लिफ्ट और ऑटो वन-साइड ब्रेकिंग जैसी ऑटोमेशन सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे संचालन आसान होता है और लागत व रखरखाव को कम रखने में मदद मिलती है।

महिंद्रा ट्रैक्टर्स के सीईओ हर्ष राय ने कहा, “खेती का भविष्य ऐसी आधुनिक और जरूरत के अनुसार तैयार तकनीकों में है, जो किसानों की उत्पादकता और कमाई बढ़ाएं। बागवानी और विशेष फसलों के बढ़ते क्षेत्र के साथ इनके लिए उपयुक्त मशीनों की जरूरत भी बढ़ रही है। ओजेए ने पिछले तीन वर्षों में आधुनिक तकनीक, इंजीनियरिंग और ग्राहक जरूरतों को एक साथ लाकर इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

महिंद्रा ट्रैक्टर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड-मार्केटिंग और नेशनल बिजनेस ऑपरेशंस, परीक्षित घोष ने कहा, “ओजेए बागवानी, अंगूर व फलों के बाग, गन्ने और अन्य विशेष फसलों के किसानों के बीच पसंदीदा विकल्प बन रहा है। यह कई मॉडलों में उपलब्ध है और 3 से 4 एचपी के अंतर पर विकल्प देता है। हमारा लक्ष्य फसल के अनुसार ऐसे समाधान देना है, जिससे किसान कम मेहनत और लागत में अधिक कुशलता से काम कर सकें और बेहतर मुनाफा कमा सकें।”

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