'उसने मेरा रेप किया फिर मेरी बेटी का, कैसे छोड़ती': रूपम पाठक ने कैसे भाजपा विधायक को घोंपा चाकू, स्कूल में मुलाकात से दुश्मनी की कहानी - Patna News

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कड़ाके की ठंड। सर्द हवा चल रही थी। चारों तरफ घना कोहरा। पूर्णिया के तत्कालीन विधायक राजकिशोर केसरी हर रोज की तरह सिपाही टोला स्थित अपने आवास पर समर्थकों से मिल रहे थे। घर के ठीक सामने बड़े से लॉन के बीच बने एक छोटे से फूस की कॉटेज (झोपड़ी) में चाय की चुस्कियों के साथ हंसी ठहाके लग रहे थे।

इसी बीच शॉल ओढ़े एक 40 साल की महिला लॉन में दाखिल हुई। फूलों की रखवाली करने वाले गार्ड से पूछा- ‘विधायक जी कहां हैं?’

गार्ड ने कॉटेज की तरफ इशारा करते हुए कहा- ‘अंदर बैठे हैं। कुछ लोग मिलने आए हैं। उनसे बात कर रहे हैं।’

महिला तेजी से कॉटेज की तरफ बढ़ी। जैसे ही नजदीक पहुंची विधायक राजकिशोर केसरी उसे आते देख कुर्सी से उठे और कॉटेज के बाहर निकल आए। महिला के नजदीक पहुंच उसे डांटते हुए कहा- ‘तुम.. तुम यहां क्या करने आई हो? अंदर कैसे आई?

गार्ड की तरफ देखते हुए पूछा- ‘किसने इसको अंदर आने दिया?’

महिला ने बड़ी शांति से कहा- ‘आपका आशीर्वाद लेने की इच्छा हो रही थी तो मिलने आ गई।’

4 जनवरी 2011 को रूपम पाठक ने भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी पर हमला किया था।

4 जनवरी 2011 को रूपम पाठक ने भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी पर हमला किया था।

इतना कहते ही महिला विधायक के पैर छूने झुकी और तेजी से अपने शॉल को उतार कर फेंक दिया। विधायक कुछ समझ पाते तब तक महिला ने अपने पर्स से धारदार चाकू निकाला और पूरा जोर लगाकर विधायक के पेट में घोंप दिया। चाकू लगते ही विधायक जोर से चीखे और वहीं गिर गए।

विधायक की चीख सुनते ही गार्ड और समर्थक भागे-भागे पहुंचे। चाकू घोंपने के बाद महिला वहां से तेजी से बाहर की तरफ भागी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है। तभी मौके पर मौजूद एक 25 साल का समर्थक समझ गया कि विधायक को महिला ने चाकू मार दिया है। वह चिल्लाया, ‘अरे पकड़ उस $#@%& को, $#@%& ने विधायक जी को मार दिया।’

इतना सुनते ही तीन चार लोग महिला की तरफ भागे और उसे पकड़ लिया। बाल पकड़कर घसीटते हुए उसे जमीन पर पटका और पीटना शुरू कर दिया।

अब सबके मन में सवाल था कि चाकू घोंपने वाली महिला कौन है? उसने चाकू क्यों मारा? विधायक के पेट से खून बह रहा था। वह पूरी तरह खून से सन गए। कुछ बोलना चाह रहे थे, लेकिन बोल नहीं पा रहे थे। अफरा-तफरी मच गई। कोई एम्बुलेंस बुलाने को बोल रहा था तो कोई जल्दी से पुलिस वाले को बुलाने के लिए चिल्ला रहा था।

इसी बीच एक समर्थक चिल्लाया- ‘अरे अपनी ही गाड़ी निकाल, जल्दी से हॉस्पिटल चल।’

एक समर्थक तेजी से अपनी गाड़ी लेकर आया। 4-5 लोगों ने मिलकर विधायक को गाड़ी में लादा और अस्पताल के लिए निकल गए। विधायक के घर से सदर हॉस्पिटल करीब 500 मीटर दूर था। आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल पहुंचते ही जल्दी-जल्दी बेड खाली किया गया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया।

खबर तेजी से पूर्णिया में फैल गई कि किसी महिला ने विधायक को चाकू मार दिया है। सदर हॉस्पिटल में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ गई। भीड़ इतनी कि पैर रखने के लिए जगह नहीं। सायरन बजाते हुए पुलिस की गाड़ी भीड़ के बीच से आई।

रूपम पाठक से रेप मामले में राजकिशोर केसरी के तत्कालीन निजी सचिव विपिन राय को कोर्ट ने 10 साल पहले 10 साल जेल की सजा सुनाई थी।

रूपम पाठक से रेप मामले में राजकिशोर केसरी के तत्कालीन निजी सचिव विपिन राय को कोर्ट ने 10 साल पहले 10 साल जेल की सजा सुनाई थी।

दूसरी तरफ पिटाई से महिला बेहोश हो गई। पुलिस उसे हिरासत में लेकर इलाज के लिए सदर हॉस्पिटल पहुंची। हमला करने वाली महिला इलाज के लिए आई है, यह जानकर भीड़ बेकाबू हो गई। लगा जैसे लोग हॉस्पिटल में घुसकर महिला को मार डालेंगे। हालात बिगड़े नहीं, इसलिए पूर्णिया के तत्कालीन एसपी ने तुरंत चारों तरफ पुलिस की तैनाती कर दी।

इलाज के दौरान विधायक की मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि काफी ताकत से पेट में चाकू मारकर अंदर घुमा दिया गया है। इससे अंदर के हिस्से जख्मी हुए। काफी खून बह जाने की वजह से उनकी मौत हुई है।

चारों तरफ खबर फैल गई कि विधायक राजकिशोर केसरी की किसी महिला ने चाकू गोदकर हत्या कर दी। आक्रोशित समर्थक सड़क पर उतर आए। जगह-जगह आगजनी होने लगी। पूर्णिया शहर बंद हो गया। नेशनल मीडिया से लेकर इंटरनेशनल मीडिया में यह खबर प्रमुखता से दिखाई जाने लगी। न्यूज चैनल लाइव टेलीकास्ट करने लगे।

बिहार के बड़े-बड़े नेता बिना देर किए उनके आवास पर पहुंचने लगे। लोगों के मन में एक ही सवाल था आखिर यह महिला कौन है और उसने विधायक की हत्या क्यों की? महिला और विधायक के बीच ऐसा क्या संबंध है कि उसने हत्या कर दी?

रूपम बोली- उसने मेरा रेप किया फिर मेरी बेटी का, कैसे छोड़ देती

पुलिस ने जब गिरफ्तार महिला से पूछताछ की तो उसने अपना नाम रूपम पाठक बताया। रूपम ने बताया कि वह पूर्णिया में एक प्राइवेट स्कूल (राजहंस पब्लिक स्कूल) चलाती है।

विधायक को क्यों मारा? इस सवाल पर रूपम ने बताया, ‘मैं अपने परिवार के साथ इम्फाल में रहती थी। इम्फाल से पूर्णिया आई और पति के साथ मिलकर 2006 में स्कूल खोला। मेरे पति स्कूल का उद्घाटन यहां के सबसे सम्मानित व्यक्ति से कराना चाह रहे थे। इसलिए स्थानीय विधायक राजकिशोर केसरी को न्योता दिया।’

‘वह स्कूल आए। यहीं पहली मुलाकात हुई। इसके बाद विधायक से हमारे परिवार की नजदीकियां बढ़ गई थी। उनका हमारे घर आना-जाना था। हमने 18 अप्रैल 2007 को स्कूल के वार्षिक महोत्सव में विधायक को बुलाया। उस दौरान उनका पीए विपिन राय भी आया था। विपिन ने विधायक कोटे से स्कूल तक सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। बोला- घर आकार विधायक जी से बात कर लेना।’

‘बाद में जब विधायक के आवास पर मिलने पहुंची तो विपिन ने मुझे विधायक के कमरे में भेज दिया। जहां विधायक ने मेरे साथ रेप किया। जब मैं कमरे से बाहर निकली तो विपिन हंस रहा था। बाद में विपिन मेरे घर पहुंचा और कहा कि अगर चाहो तो जल्दी सड़क बन जाएगी। इसके बाद मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा। मैंने विरोध किया तो विपिन ने मेरा रेप किया। दोनों सड़क बनाने के नाम पर मुझे बुलाते थे। इस दौरान दोनों ने मिलकर कई बार मेरा रेप किया।’

‘मैंने 25 मई 2010 को केवट थाने में विधायक और उनके पीए के खिलाफ FIR दर्ज कराई। इसके बाद विधायक और उनके लोग बार-बार मेरे बेटे-बेटी को किडनैप कर मार डालने की धमकी देने लगे। डर कर मैंने केस वापस ले लिया।’

‘केस वापस लेते ही विधायक की गलत नजर मेरी बेटी पर पड़ गई। उसने मौका पाकर मेरी बेटी के साथ भी रेप किया। मैंने विरोध किया तो मुझे जान से मारने की धमकी मिलने लगी।’

रूपम के आरोप पर विधायक ने कहा था यह विरोधियों की साजिश

विधायक जिंदा थे तब ही रूपम पाठक ने अपने साथ रेप करने का आरोप लगाया था। 25 मई 2010 को रूपम ने थाने में FIR दर्ज कराई। राजकिशोर ने आरोप नकारते हुए कहा था, ‘यह आरोप पूरी तरीके से राजनीति से प्रेरित है। विरोधी मेरी इज्जत धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से मेरे ऊपर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।’

यह पूरा मामला पहले पुलिस देख रही थी। मामला जैसे ही तूल पकड़ने लगा CBI को हैंड ओवर कर दिया गया। CBI ने रूपम पाठक के खिलाफ सुनियोजित हत्या का केस बनाया। हालांकि रूपम पाठक ने दलील दी कि वह मेंटली डिस्टर्ब और डिप्रेशन में थी।

10 जून 2011 को रूपम पाठक के खिलाफ आरोप तय हुए। CBI के अनुसार यह हत्या आत्मरक्षा या अचानक उकसावे में नहीं हुई थी। बल्कि पूरी तैयारी के साथ की गई थी। CBI ने कहा,

  • रूपम पाठक पहले से जानती थी कि राजकिशोर केसरी अपने आवास पर लोगों से मिलते हैं।
  • रूपम पाठक ने जानबूझकर ऐसा समय चुना जब विधायक लॉन में अकेले मिल सकें।
  • चाकू छुपाकर ले जाना इस बात का सबूत है कि इरादा पहले से हत्या का ही था।
  • हमला विधायक के आवास पर हुआ, जहां कई लोग थे। मतलब, रूपम को पूरी समझ थी कि क्या करने जा रही है और इसका नतीजा क्या होगा।
  • हत्या की वजह रूपम पाठक द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोप को नहीं माना जा सकता, क्योंकि किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने भी CBI की दलीलों को माना। 31 मार्च 2012 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने रूपम को दोषी करार दिया। कहा कि चाकू पहले से लाना और सीधे पेट पर हमला करना पूरी तरीके से सोची समझी हत्या है। रूपम पढ़ी लिखी है, इसका अंजाम उसे पता था।

रूपम को 10 अप्रैल 2012 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वह अभी भागलपुर जेल में बंद हैं। कोरोना महामारी के समय थ्री लेयर मास्क बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की फाइल फोटो। हत्या के बाद उनकी पत्नी विधायक बनी थीं।

भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की फाइल फोटो। हत्या के बाद उनकी पत्नी विधायक बनी थीं।

कौन थे विधायक राजकिशोर केसरी?

सीनियर जर्नलिस्ट अशोक कुमार बताते हैं कि राजकिशोर केसरी छात्र राजनीति से एक्टिव थे। आर्थिक रूप से भी मजबूत थे। शुरू के दिनों में बीजेपी के नेता दिलीप कुमार दीपक के साथ रहते थे। सीमांचल में बीजेपी का कोई आधार नहीं था तब से बीजेपी के लिए काम कर रहे थे। धीरे-धीरे इनका संपर्क बीजेपी के राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से बढ़ा। सुशील मोदी के काफी करीब हो गए थे। बीजेपी के लिए काम करते थे।

फरवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में इन्हें पहली बार पूर्णिया सीट से बीजेपी का टिकट मिला और जीत गए। अक्टूबर 2005 में फिर से चुनाव हुआ तो भाजपा ने वापस टिकट दिया। वह जीते। 2010 में तीसरी बार टिकट मिला और उन्होंने जीत दर्ज की।

राजकिशोर की हत्या के बाद बीजेपी ने उनकी पत्नी को टिकट दिया। उन्होंने चुनाव जीता। हालांकि इनका परिवार अब पॉलिटिकली उतना ज्यादा एक्टिव नहीं है।