लुधियाना से गूंजा फ्री तिब्बत का नारा: चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' के खिलाफ लुधियाना की सड़कों पर उतरे तिब्बती,कहा तिब्बत कोई 'अल्पसंख्यक' गुट नहीं - Ludhiana News

लुधियाना में तिब्बती युवाओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ जोरदार हल्ला बोला। तिब्बती युवा कांग्रेस (TYC) के नेतृत्व में डिवीजन नंबर 3 से लेकर सुंदर नगर तक एक विशाल शांतिपूर्ण रोष मार्च निकाला गया जिसमें 500 से अधिक त

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शहीद लोबगा रांगजेन का बलिदान और ग्लोबल चेन प्रोटेस्ट

यह प्रदर्शन कोई आम धरना नहीं बल्कि तिब्बती युवा कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय चेन प्रोटेस्ट का हिस्सा है। यह आंदोलन शहीद लोबगा रांगजेन के सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में किया जा रहा है। उन्होंने दुनिया को यह याद दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) हेडक्वार्टर के सामने आत्मदाह कर लिया था कि तिब्बत एक कब्जा किया हुआ देश है और तिब्बती अपनी आजादी के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि धर्मशाला से शुरू हुई यह चेन भूख हड़ताल,कैंडल मार्च और रैलियां पूरी दुनिया में तब तक जारी रहेंगी, जब तक चीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती।

एथनिक यूनिटी लॉ: सांस्कृतिक नरसंहार और UN प्रवक्ता पर निशाना

प्रदर्शनकारियों ने 1 जुलाई को चीन द्वारा लागू किए गए तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ (Ethnic Unity Law) को सिरे से खारिज कर दिया। संगठन के अनुसार यह कोई एकता का कानून नहीं, बल्कि तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान,दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया जैसे देशों को जबरन चीन में मिलाने की एक राजनीतिक साजिश है।

चीन सरकार कॉलोनियल बोर्डिंग स्कूलों के जरिए बच्चों को उनके समुदायों से अलग कर रही है ताकि उनकी राष्ट्रीय पहचान को मिटाकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी थोपी जा सके।

युवा कांग्रेस ने UN सेक्रेटरी-जनरल के स्पोक्सपर्सन मिस्टर स्टीफन दुजारिक (Stephane Dujarric) के उस हालिया बयान की भी कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने तिब्बत को चीन की माइनॉरिटी (अल्पसंख्यक) कहा था।

संगठन ने इसे ऐतिहासिक रूप से गलत और भ्रामक बताते हुए कहा कि तिब्बत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और UN को ऐसी भाषा के इस्तेमाल से बचना चाहिए जो चीन के अवैध कब्जे को सही ठहराती हो।

आंदोलन की 5 प्रमुख मांगें: UN की जवाबदेही तय हो: संयुक्त राष्ट्र तिब्बत में हो रहे मानवाधिकारों के गंभीर हनन पर ध्यान दे और शहीद लोबगा रांगजेन के आत्मदाह का औपचारिक जवाब दे।

चीन पर कार्रवाई: आत्मदाह के लिए मजबूर हुए 160-170 तिब्बतियों की मौतों के लिए सीधे तौर पर चीनी सरकार की दमनकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जाए।

काला कानून रद्द हो: तिब्बती पहचान को मिटाने वाले "एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ" को तुरंत रद्द किया जाए।

कैदियों की तुरंत रिहाई: दुनिया के सबसे कम उम्र के तिब्बती पॉलिटिकल कैदी (पंचेन लामा) के साथ-साथ जेल में बंद सभी पर्यावरण एक्टिविस्ट, तिब्बती कलाकारों और मानव अधिकार रक्षकों को बिना शर्त रिहा किया जाए।

संप्रभुता को मान्यता: अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह स्वीकार करे कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के कब्जे से पहले तिब्बत एक आजाद देश था।

तिब्बत एक राष्ट्र था,तिब्बत एक राष्ट्र है, और जल्द ही तिब्बत आजाद होगा। चीन को तिब्बत से बाहर निकालो के नारों के साथ यह प्रदर्शन तिब्बती अवाम के अटूट संकल्प का प्रतीक बन गया है।