दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी बने 'बैटमैन', कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे पोस्टरों से मची सियासी हलचल

दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी बने 'बैटमैन', कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे पोस्टरों से मची सियासी हलचल

Rahul Gandhi Batman Posters: दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी को रियल लाइफ बैटमैन बताते हुए दिलचस्प पोस्टर लगाए गए हैं. यह पोस्टर उनके इंस्टाग्राम सेशन के बाद चर्चा में आए.

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Rahul Gandhi Batman

Rahul Gandhi Batman Photograph: (ANI)

Rahul Gandhi Batman Posters: देश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है. कभी युवाओं के साथ सीधे संवाद तो कभी सोशल मीडिया पर मजेदार बातचीत के जरिए वे लगातार चर्चा बटोर रहे हैं. इसी कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर लगे कुछ पोस्टरों ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन और भारतीय युवा कांग्रेस दफ्तर के आसपास राहुल गांधी के ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें दुनिया के मशहूर सुपरहीरो बैटमैन के रूप में पेश किया गया है. इन पोस्टरों के सामने आते ही सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है.

दिल्ली में लगे 'रियल लाइफ बैटमैन' के पोस्टर

यह अनोखे पोस्टर दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा की तरफ से लगाए गए हैं. कोटला रोड पर स्थित इंदिरा भवन के प्रवेश द्वार और रायसीना रोड पर यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ बैटमैन की छवि जोड़ी गई है. पोस्टर पर बड़े अक्षरों में 'द साइलेंट गार्जियन' और 'अ वॉचफुल प्रोटेक्टर' जैसे स्लोगन लिखे गए हैं. इसके साथ ही राहुल गांधी को 'रियल लाइफ बैटमैन' बताया गया है. इन पोस्टरों को देखने के लिए सड़कों पर आने जाने वाले लोग भी रुक रहे हैं और यह तस्वीर तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रही है.

इंस्टाग्राम पर दिए जवाब से शुरू हुआ पूरा मामला

दरअसल इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत कुछ दिन पहले राहुल गांधी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर हुए एक सेशन से हुई थी. राहुल गांधी ने युवाओं और खासकर जेन जी पीढ़ी से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम पर 'आस्क मी एनीथिंग' यानी मुझसे कुछ भी पूछिए नाम से एक सवाल जवाब सत्र आयोजित किया था. इस दौरान कई गंभीर मुद्दों के अलावा युवाओं ने उनसे हल्के फुल्के और मजाकिया सवाल भी पूछे थे. इसी बीच एक यूजर ने उनसे पूछ लिया कि क्या वे सच में बैटमैन हैं. इस सवाल पर राहुल गांधी ने बेहद हाजिरजवाबी और मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा था कि किसी ने भी आज तक मुझे और बैटमैन को एक साथ एक कमरे में नहीं देखा है. उनके इस जवाब को इंटरनेट पर खूब पसंद किया गया और उसी के बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह पोस्टर तैयार करवा दिए.

पुणे में महिलाओं से की पितृसत्ता तोड़ने की अपील

एक तरफ जहां दिल्ली में उनके मजाकिया अंदाज वाले पोस्टर चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी महाराष्ट्र के पुणे में बेहद गंभीर और आक्रामक तेवर में नजर आए. पुणे में छात्रों के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी की महिलाओं से खुलकर बात की. उन्होंने लड़कियों से कहा कि वे समाज में अपनी आवाज बुलंद करें, खुद पर गर्व महसूस करें और पितृसत्ता की सोच को पूरी तरह तोड़कर अपना हक छीनें. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि महिलाएं भारत की असली ताकत, बुनियाद, वर्तमान और भविष्य हैं. वे किसी की जागीर नहीं हैं बल्कि सिर्फ अपनी मालिक हैं, इसलिए उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए.

70 करोड़ महिलाओं के सपनों में बसता है असली भारत

पुणे के इस मंच से राहुल गांधी ने देश की ताकत की एक नई परिभाषा पेश की. उन्होंने कहा कि जब भी लोग देश की सबसे बड़ी ताकत के बारे में पूछते हैं तो कोई सेना, कोई अर्थव्यवस्था तो कोई मेडिकल सिस्टम का नाम लेता है. लेकिन मेरी नजर में देश की सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलाओं की अनूठी यात्रा, उनकी कल्पनाएं और उनके बड़े सपने हैं. उन्होंने समाज द्वारा महिलाओं को सिर्फ मां, बेटी या पत्नी के रूप में सीमित कर देने वाली मानसिकता पर भी कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने साफ कहा कि इन पारिवारिक रिश्तों में कोई बुराई नहीं है, लेकिन किसी भी महिला की पहचान सिर्फ इन्हीं दायरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए.

छात्रों की आवाज बन रहा 'छात्रों की गूंज' अभियान

पुणे में आयोजित यह कार्यक्रम राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा था. इस अभियान की शुरुआत उन्होंने साल 2026 में देश भर के विद्यार्थियों को एक खुला मंच देने के लिए की थी. इस अभियान का मुख्य मकसद परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, महंगी होती पढ़ाई, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है. इससे पहले यह कार्यक्रम कोटा, देहरादून और प्रयागराज जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों में भी आयोजित किया जा चुका है. राहुल गांधी इस अभियान के जरिए सीधे छात्रों के बीच जाकर उनकी परेशानियां सुन रहे हैं और उन्हें मुख्य राजनीति का हिस्सा बना रहे हैं.

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