'मेरी जवानी के सपने मत देखो'कंगना रनौत के इस बयान पर अब बाबा रामदेव ने तोड़ी चुप्पी, दिया करारा जवाब
'मेरी जवानी के सपने मत देखो'कंगना रनौत के इस बयान पर अब बाबा रामदेव ने तोड़ी चुप्पी, दिया करारा जवाब
Published: Sunday, August 23, 2026, 22:22 [IST]
Kangana Ranaut vs Baba Ramdev: बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच शुरू हुआ विवाद अब थमता दिख रहा है। कंगना ने रामदेव की टिप्पणी के जवाब में उन्हें अपनी जवानी और निजी जिंदगी पर टिप्पणी नहीं करने की सलाह दी थी।
अब रामदेव ने कहा है कि वह इस मामले को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि देश उनके काम और योगदान को जानता है।
कैसे शुरू हुआ कंगना-रामदेव विवाद?
पूरी कहानी कंगना के Gen Z को लेकर दिए गए बयान से शुरू हुई। कंगना ने कुछ युवा प्रदर्शनकारियों और युवाओं के एक हिस्से पर निशाना साधते हुए उन्हें "Generation Gutter" कहा था। बाद में उन्होंने साफ किया कि उनका निशाना पूरी Gen Z नहीं थी, बल्कि कुछ खास लोगों और महिलाओं के व्यवहार पर उनकी टिप्पणी थी।
कंगना के इस बयान पर रामदेव ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को इस तरह संबोधित करना सही नहीं है। रामदेव ने सवाल उठाते हुए कंगना के बचपन, जवानी और पुराने बयानों का जिक्र भी किया।
रामदेव ने कहा,
"किसी भी देश के युवाओं को 'गटर' कहना गलत सोच की निशानी है। युवाओं में कुछ गलत चीजें हो सकती हैं, लेकिन पूरा युवा वर्ग देश की बड़ी ताकत है। किसी एक चेहरे या व्यक्ति को युवाओं की पूरी आवाज नहीं माना जा सकता।"
कंगना ने कहा- मेरी जवानी और बेडरूम के सपने मत देखो
रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए जवाब दिया। उनका जवाब काफी तीखा था। उन्होंने रामदेव से कहा कि वह उनकी निजी जिंदगी और जवानी को लेकर अनुमान न लगाएं। साथ ही उन्होंने रामदेव को अपने चरित्र पर सीख देने से भी मना किया।
कंगना ने लिखा,
"बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम को लेकर दिन में सपने मत देखिए। ऐसी बातें सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही कही जा सकती हैं। मुझे चरित्र का पाठ पढ़ाने से पहले अपने विवादों को देखिए। मेरा चरित्र आपसे बेहतर है और मेरे नाम से कोई फ्रॉड नहीं जुड़ा है।"
कंगना ने इसी पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट और पतंजलि के 2024 के भ्रामक विज्ञापन मामले का भी जिक्र किया। उस मामले में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट के सामने बिना शर्त माफी मांगी थी।
अब रामदेव ने क्यों कहा- विवाद नहीं बढ़ाना
रविवार को रामदेव ने इस पूरे विवाद पर आगे टिप्पणी करने से दूरी बनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वह मामले को बढ़ाना नहीं चाहते। रामदेव ने कहा,
"मैं इस विवाद को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता। स्वामी रामदेव कौन हैं और देश के लिए मेरा योगदान क्या रहा है, यह लोग जानते हैं। इसलिए मैं ऐसे लोगों पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।"
यानी रामदेव की तरफ से फिलहाल विवाद पर ब्रेक लगाने का संकेत है। हालांकि, दोनों के बीच हुई बयानबाजी ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी है। बयानबाजी ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी है।
वंदे मातरम् पर भी रामदेव ने रखी बात
इसी बातचीत के दौरान रामदेव ने वंदे मातरम् और भारत माता को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके लिए भारत माता आस्था, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् में देवी-देवताओं या धार्मिक प्रतीकों के संदर्भ पर सवाल उठाने वालों को भारतीय संस्कृति और संस्कृत के अर्थ को बेहतर तरीके से समझना चाहिए। रामदेव ने कहा कि भारत माता उनके लिए आस्था, ज्ञान, मंदिर, पूजा, कर्तव्य, उद्देश्य और जीवन का केंद्र हैं।
शिक्षा से लोकतंत्र तक सुधार की जरूरत
रामदेव ने बातचीत में देश में लगातार सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, कृषि और लोकतंत्र के अलग-अलग हिस्सों में सुधार जारी रहना चाहिए। उनके मुताबिक सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और आगे भी बदलाव की जरूरत रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग यह मानते हैं कि देश में कुछ अच्छा नहीं हो रहा। रामदेव ने कम उम्र के बच्चों को प्रदर्शनों में शामिल करने और पुलिस थानों, एसपी या जिला अधिकारियों के दफ्तरों के घेराव जैसी गतिविधियों पर भी सवाल उठाया। फिलहाल कंगना और रामदेव के बीच शब्दों की यह जंग शांत होती दिख रही है।
लेकिन Gen Z, युवाओं की छवि और सार्वजनिक जीवन में नेताओं की भाषा को लेकर शुरू हुई बहस ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि असहमति जताने की सीमा आखिर कहां तक होनी चाहिए।