शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बोले- टीचर्स करा रहे आंदोलन: समीक्षा बैठक में कहा- प्राचार्यों का फोकस केबिन स्पेस पर; यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री बंद करें - Chhattisgarh News

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मंगलवार सुबह 11 बजे पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली थी।

पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में मंत्री गजेंद्र यादव की मौजूदगी में मंगलवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, अलग-अलग जिलों से पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (समग्र शिक्षा), जिला क्रीड़ा अधिकारी और विकासख

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अधिकारियों ने जब अपने-अपने हिस्से का ब्यौरा दे दिया, तो मंत्री गजेंद्र यादव अपनी कुर्सी छोड़कर माइक के पास आए। आते ही उन्होंने कहा, “मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना बंद करिए, मैं भाषण देने थोड़ी आया हूं।” इसके बाद उन्होंने सवाल किया- स्कूलों की समस्याओं का मूल कारण क्या है?

सवाल सुनते ही गोष्ठी में गर्दन ऊंची कर बैठे अधिकारी दुबकने लगे। जवाब नहीं मिला तो मंत्री यादव ने रैंडमली पूछा- “पेंड्रा के डीईओ आए हैं क्या? जवाब दीजिए।” दूसरी ओर से जवाब आया, “सर, लोकल लेवल पर एडमिनिस्ट्रेशन सही नहीं है।” इस जवाब से बाकी अधिकारियों के भीतर भी उत्साह जागा।

सक्ती के डीईओ बोले, “मॉनिटरिंग और प्रबंधन की कमी है।” इसके बाद कांकेर डीईओ भी उठे और बोले, “शिक्षकों के बीच समन्वय ठीक हो जाए तो सब सही हो जाएगा।” रायगढ़ के डीईओ का जवाब आया, “सर... नैतिक शिक्षा और संस्कार की कमी ही सारी समस्याओं की जड़ है।” इन सभी जवाबों को मंत्री ने कंसीडर तो किया, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए।

ऐसे में गजेंद्र यादव ने खुद ही अपने सवाल का जवाब दिया। अपने जवाब के क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने शिक्षा विभाग की खामियां गिनाईं और अपना प्लान बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ शिक्षक आंदोलन करा रहे हैं, वहीं कई प्राचार्यों का फोकस अपने केबिन की स्पेस पर है।

मंत्री ने स्कूलों में यूट्यूबर्स और पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाने की बात कही। साथ ही यह भी बताया कि जब तक शिक्षक भर्ती नहीं हो जाती, तब तक यूट्यूब के जरिए पढ़ाई कैसे करानी है।

एक-एक कर सभी पॉइंट्स को डिटेल में एक्सप्लेन करेंगे, लेकिन सबसे पहले स्कूलों की मूल समस्याओं पर शिक्षा मंत्री का जवाब जान लीजिए…

पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई।

पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई।

स्कूलों को अपना नहीं मानते प्रिंसिपल, यही दिक्कत

शिक्षा मंत्री यादव ने अधिकारियों को बताया कि स्कूलों में समस्याओं का मूल कारण यह है कि शिक्षक और प्राचार्य स्कूलों को अपना मानते ही नहीं हैं। वे स्कूल में केवल सैलरी लेने आते हैं, ताकि उनका घर चल सके। उनके भीतर यह सोच ही नहीं है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर कैसे किया जाए।

हमारे शिक्षक यह चिंतन ही नहीं कर रहे कि स्कूलों में बच्चे क्यों नहीं आ रहे हैं, शौचालय क्यों खराब है और स्कूल की बिल्डिंग क्यों बिगड़ी हुई है। इतना कहकर मंत्री कुछ देर रुके और फिर सवाल किया- “बताइए, ईमानदारी से किसी ने सोचा है ये सब?”

कुछ सेकेंड तक कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने फिर अपने ही सवाल का जवाब देते हुए कहा- “नहीं सोचे न... इसके चलते ही स्कूलों का सिस्टम बिगड़ा हुआ है।”

अब समझिए, कैसे स्कूली रकबे का अधिकतर क्षेत्र प्रिंसिपल कब्जा रहे हैं

अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए मंत्री ने दो उदाहरणों के जरिए समझाया कि कैसे स्कूली रकबे के बड़े और बेहतर हिस्से पर शिक्षक और प्रिंसिपल कब्जा कर रहे हैं।

उदाहरण 1: मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले वे तीजन बाई के गांव गनियारी गए थे। यहां सरकारी स्कूल की बाउंड्रीवॉल ही 3 एकड़ में फैली हुई है। स्कूल में कम से कम 20 कक्षाएं हैं और पुरानी बिल्डिंग भी उसी तरह बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि पुरानी बिल्डिंग में ताला लगा हुआ है और वहां कचरा डाल दिया गया है। वहीं, नई बिल्डिंग के सबसे अच्छे कमरे को प्रिंसिपल ने अपना कमरा बना लिया है। इसके बाद के अच्छे कमरे शिक्षकों और दूसरे स्टाफ के लिए रिजर्व कर दिए गए हैं।

उदाहरण 2: मंत्री गजेंद्र यादव ने आगे बताया कि बीते सोमवार तरीघाट में उन्होंने सरकारी स्कूल के बाहर कुछ बच्चों को खड़े देखा। उन्होंने रुककर बच्चों से पूछा कि कोई समस्या है? बच्चों ने कहा, “नहीं-नहीं।” सामने खड़ी एक टीचर ने कहा, “बताओ-बताओ।” इसके बाद बच्चों ने बताया कि क्लास नहीं लगती।

मंत्री यादव ने बताया कि इसके बाद उन्होंने पूरा स्कूल घूमा। प्रिंसिपल के कमरे में पहुंचे तो देखा कि कमरा किसी कलेक्टर के कमरे जितना बड़ा बनवाया गया है। उन्होंने प्रिंसिपल से पूछा- “इतना बड़ा कमरा क्यों रखा है?” इस पर जवाब मिला, “लोग आते हैं।”

मंत्री यादव ने कहा, “ये तो स्थिति है। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ।”

बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, अलग-अलग जिलों से पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, अलग-अलग जिलों से पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी मौजूद थे।

शिक्षक कराते हैं स्कूलों में आंदोलन

बात को आगे बढ़ाते हुए मंत्री आंदोलन की बात पर आए। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों में जितने आंदोलन होते हैं, वे कराए जाते हैं। किसी शिक्षक को कोई अतिरिक्त विषय पढ़ाने के लिए कह दिया जाए तो बच्चों से आंदोलन करा दिया जाता है।

इसके बीच ही उन्होंने बिना फ्लो तोड़े तपाक से एक सवाल और पूछा- “बताओ जरा, ऐसे ही होता है न? बताओ जरा?” लेकिन इस बार इंतजार किए बिना ही खुद जवाब देते हुए बोले- “सब प्लान्ड रहता है। पुराने मठाधीशों को हटाया तो आंदोलन कर रहे हैं।”

आखिर में आग्रह करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि अगर आप अपना और अपने परिवार का अच्छा चाहते हैं तो अपने स्कूल के बच्चों पर फोकस कीजिए। डीईओ सिर्फ कागजी काम न करें, बल्कि स्कूलों का दौरा करें।

मीडिया पर बोले: लिखित में नहीं दे रहा, लेकिन पूरा स्कूल मत घुमाइए

बोलते-बोलते मंत्री यादव स्कूलों के शौचालय के मुद्दे पर आए। उन्होंने कहा, “समग्र से पैसा बहुत आता है, आप उसका सही ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी बच्चे पानी और वॉशरूम के लिए आंदोलन कर रहे हैं तो यह बड़े दुर्भाग्य की बात है।”

इसके बाद उन्होंने धीरे से कहा, “मीडिया वाले भी हैं। जरूरी नहीं है कि हम उनको पूरा स्कूल घुमाएं। हम लिखित में नहीं दे रहे हैं, लेकिन कोई मीडिया वाला फिजूल में स्कूल में न घुसे। ये किसी के नहीं हैं। किसी को पूछोगे कि कोई समस्या है क्या, तो आदमी हां ही बोलेगा कि समस्या है।”

यह कहकर मंत्री यादव ने करीब 10 सेकेंड का पॉज लिया। बातचीत के दौरान यह उनकी ओर से लिया गया सबसे लंबा पॉज था। इसके बाद उन्होंने कहा, “इस पर भी आपको ध्यान देना है।” हालांकि, बातचीत के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा यूट्यूबर्स और पत्रकारों की ओर है।

बैंड दल अनिवार्य करें, बच्चियों को सेल्फ डिफेंस सिखाएं

मंत्री यादव यहां से वापस स्टूडेंट्स पर लौटे और बोले कि हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बैंड दल अनिवार्य तौर पर बनाइए। इसके लिए जिला पुलिस बैंड से मदद ले सकते हैं। म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स खरीदकर केवल रखने के लिए नहीं हैं।

इसके अलावा गर्ल्स के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग अनिवार्य कीजिए। इस संबंध में आदेश भी जारी कर देंगे।

यूट्यूब से पढ़ाई का मंत्र दिया

मंत्री यादव ने विभाग के अधिकारियों को यूट्यूब से पढ़ाई का मंत्र भी दिया। लेकिन इसके एवज में फिर से एक सवाल कर लिया- “पीएम ई-विद्या सारे स्कूलों में चलता है या नहीं? इसके बारे में जानते हैं या नहीं? बताओ जरा।”

उन्होंने बताया कि पांच चैनल हैं, लेकिन डीटीएच जरूरी है। इसी बीच मंच पर बैठे अधिकारियों ने कुछ सुझाव दिए। बताया गया कि पीएम ई-विद्या यूट्यूब पर भी चल सकता है। आखिर में तय हुआ कि जब तक शिक्षकों की भर्ती नहीं हो जाती, तब तक इसी के जरिए पढ़ाइए।

मंत्री यादव ने इस मुद्दे पर आखिरी बात यह कही कि कोई भी बच्चा स्कूल आए तो फालतू न बैठे, उसे पढ़ाइए।

सफलता भी बताई- पहली बार स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी

मंत्री यादव ने शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि पहली बार इन पांच सालों में सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है। यह सुनकर सभी अधिकारियों ने तालियां बजाईं। इसके बाद गुजरात मॉडल का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि वहां बच्चे सरकारी स्कूलों की ओर लौट रहे हैं। वहां हो सकता है तो यहां भी हो सकता है।

आखिर में उन्होंने कहा- “भोजन मंत्र जरूर कराइए, इससे बच्चे संस्कारित होंगे।” इसके बाद मंत्री सहित सभी अधिकारी लंच करने चले गए और समीक्षा बैठक समाप्त हुई।

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