न्यूयॉर्क: मोहन भागवत ने किया इस्कॉन मंदिर का दौरा, लोगों में उत्साह; विरोध करने वाला यूएससीआईआरएफ क्या बोला?

अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इस बीच मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में 26 सेकंड एवेन्यू का दौरा किया। इसी स्थान पर स्वामी प्रभुपाद ने पहला इस्कॉन मंदिर स्थापित किया था। इस दौरान भागवत ने शहर में बेघर लोगों की मदद के लिए आयोजित भोजन वितरण अभियान में भी हिस्सा लिया। न्यूयॉर्क के 26 सेकंड एवेन्यू पर इस्कॉन की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर समारोह हो रहा है।



वहीं, मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर अमेरिका की विश्व हिंदू परिषद की अध्यक्ष तेजल शाह ने कहा, ''यह ऐसा आयोजन है, जो बहुलता, विविधता में एकता और पूरे समुदाय के एक साथ आने का संदेश देता है। हम केवल रक्षाबंधन का त्योहार ही नहीं मना रहे हैं, बल्कि यह भी जता रहे हैं कि समुदाय का हर सदस्य एक-दूसरे के साथ किस तरह संबंध रख सकता है।''

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न्यूयॉर्क में रक्षाबंधन के कार्यक्रम में शामिल होंगे आरएसएस प्रमुख?


तेजल शाह ने आगे कहा, ''इसके नतीजतन हम आने वाले समय में दुनिया को बेहतर जगह बना सकते हैं। संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि आगे आएं, मतभेदों को एक तरफ रखें, मानवता के लिए मिलकर काम करें और बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करें।'' आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय के लोगों के साथ मुलाकात करेंगे और रक्षाबंधन के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

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यूएससीआईआरएफ क्यों चाहता है भागवत के साथ बातचीत?


लॉस एंजिलिस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के साथ खुले संवाद की संभावना पर अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के आयुक्त डॉ. आसिफ महमूद ने कहा, ''अगर ऐसा कोई अवसर मिलता है तो मैं निश्चित रूप से उनके साथ बैठकर बातचीत करने के लिए तैयार हूं। अगर इसकी व्यवस्था की जा सकती है तो हमें उनके साथ बैठकर बातचीत करने और अधिक जागरूकता पैदा करने में खुशी होगी।''



उन्होंने कहा, ''हो सकता है कि कुछ आश्वासन और गारंटी हों, जो वे दे सकते हैं और इससे हमारी सोच बदल सकती है। हमारा लक्ष्य उनके साथ बैठकर बातचीत करना है।'' आसिफ महमूद ने आगे कहा, ''एक देश के तौर पर मेरे मन में भारत के लिए सम्मान है, लेकिन हमारी जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन नफरत पैदा कर रहे हैं और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।''