नीमच : किसानों को फसलों की सतत निगरानी की सलाह

29 अगस्त 2026, नीमच: नीमच : किसानों को फसलों की सतत निगरानी की सलाह – जिले में खरीफ फसलों की अवधि लगभग दो माह पूर्ण हो चुकी है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सतत निगरानी करते रहें तथा नींदा एवं कीट-व्याधि का प्रकोप दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाए
कृषि विशेषज्ञ डॉ. पचौरी ने बताया कि सोयाबीन में सेमीलूपर एवं गर्डल बीटल का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एस.सी. की 150 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पूर्व मिश्रित बीटा सायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड की 350 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा थायोमिथॉक्सम+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन की 125 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव करें।
सोयाबीन एवं उड़द में पीला मोजेक दिखाई देने पर रस चूसक कीट एवं सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. की 750 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. की 200 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव करें। मक्का में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप दिखाई देने पर इमामेक्टीन बेंजोएट की 220 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन की 200 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव करें।
मूंगफली में सफेद लट के नियंत्रण हेतु क्लोथियानीडीन 50 प्रतिशत डब्ल्यू.डी.जी. की 250 ग्राम मात्रा प्रति 1000 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रेंचिंग करें। मूंगफली में व्याधि नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित टेबुकोनाजोल+सल्फर की 1 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के मान से छिड़काव करें। खेतों में पानी भरने की स्थिति में जल निकासी की समुचित व्यवस्था भी करें।
फलदार पौधों में कीट नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 1.5 मिली एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यू.पी. की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के मान से स्प्रे करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा सोयाबीन में जैविक नियंत्रण के लिए खेत में 30 से 40 टी-आकार की खूंटियां (बर्ड परचर) लगाने की सलाह दी गई है, जिससे पक्षियों के माध्यम से कीटों के नियंत्रण में सहायता मिल सके।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture