चीनी की लिमिट पर मोदी सरकार ने चलाई कैंची, त्योहारी सीजन के बीच बड़ा फैसला

चीनी की लिमिट पर मोदी सरकार ने चलाई कैंची, त्योहारी सीजन के बीच बड़ा फैसला

Sep 01, 2026 04:59 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • केंद्र सरकार ने चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 4000 क्विंटल से घटाकर 2000 क्विंटल कर दी है
  • यह निर्णय 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा
  • वर्तमान में, देश भर के चीनी व्यापारियों पर 1 अगस्त 2026 से 4000 क्विंटल की स्टॉक रखने की सीमा लागू है
चीनी की लिमिट पर मोदी सरकार ने चलाई कैंची, त्योहारी सीजन के बीच बड़ा फैसला

चीनी पर सरकार का फैसला

त्योहरी सीजन के बीच चीनी के संकट को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 15 सितंबर से चीनी व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक रखने की लिमिट घटाकर 2000 क्विंटल कर दी है। पहले यह लिमिट 4000 क्विंटल की थी। यह जानकारी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दी गई है।

क्या कहा गया है बयान में?

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में चीनी व्यापारियों से कहा गया है कि किसी भी स्टॉक को मिलने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक अपने पास न रखें। देश भर में किसी भी स्थान पर, किसी भी समय, 2000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार न रखें। हालांकि, कोलकाता और उसके आस-पास के मेट्रोपॉलिटन इलाकों को इस सख्त सीमा से बाहर रखा गया है। मंत्रालय ने कहा कि वहां सीमा 4000 क्विंटल ही रहेगी क्योंकि यह शहर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी मंगाता है और उसे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में सप्लाई करता है।

मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का मकसद सट्टेबाजी वाले व्यापार और चीनी स्टॉक के बहुत ज्यादा जमाखोरी को रोकना है। मंत्रालय के मुताबिक इस कदम से चीनी की सप्लाई चेन ठीक से काम करेगी और ग्राहकों को उचित कीमतों पर चीनी मिलती रहेगी। सरकार ने देश भर में मिलों, डीलरों और व्यापारियों के पास चीनी स्टॉक की फिजिकल जांच भी तेज कर दी है। मंत्रालय ने कहा कि इस निगरानी प्रक्रिया में स्टॉक ज्यादा रखने , जानकारी न देने और स्टॉक की अनियमित आवाजाही और बिक्री के मामले सामने आए हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब खुदरा चीनी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम था जो एक साल पहले के 46.02 रुपये प्रति किलोग्राम से 37 प्रतिशत अधिक है। थोक कीमतें भी सालाना आधार पर 36.28 प्रतिशत बढ़कर 58.40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं। उद्योग के आंकड़ों से पता चलता है कि मिल स्तर पर कीमतों में कुछ नरमी आई है। महाराष्ट्र में चीनी की कीमत मिल स्तर पर एक सितंबर को 30 प्रतिशत घटकर 45-46 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई जबकि 18 अगस्त को यह 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर थी।

केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। यह बात 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए उत्पादन अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किए जाने के बावजूद कही गई है। देश में वार्षिक चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।