नेपाल के तराई क्षेत्र में बारिश, झंझारपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही कमला - Madhubani News

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नेपाल के तराई क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के दौरान हुई 209 मिमी मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार की नदियों पर साफ दिखाई देने लगा है। कमला नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। जयनगर में सोमवार देर शाम तक कमला नदी का जलस्तर 68.40 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से मात्र 10 सेंटीमीटर नीचे था। जबकि झंझारपुर में सोमवार देर शाम स्थिति और गंभीर हो गई। यहां कमला नदी खतरे के निशान को पार कर गई। झंझारपुर में नदी का खतरे का स्तर 50.50 मीटर निर्धारित है, जबकि खबर लिखे जाने तक जलस्तर बढ़कर 50.51 मीटर पहुंच गया था और पानी लगातार बढ़ रहा था। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। विभाग की ओर से पूर्वी और पश्चिमी तटबंधों के साथ-साथ पूरे कमला बेसिन की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। नेपाल के शीशापानी, उदयपुर, सिरहा सहित कमला अधिकरण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी में पानी का दबाव तेजी से बढ़ा है और आने वाले घंटों में जलस्तर में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता गुलाम गौस ने बताया कि नेपाल में लगातार हो रही बारिश के कारण कमला नदी में पानी का बहाव बढ़ा है। विभाग की सभी टीमें तटबंधों की लगातार निगरानी कर रही हैं। यदि जलस्तर में तेजी से वृद्धि जारी रहती है तो बराज के फाटक खोलने सहित अन्य आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। निर्माणाधीन कमला बराज के निचले हिस्से में चल रहे कार्य को भी एहतियातन रोकने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है और जलस्तर की हर घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कमला नदी के निचले इलाकों और बाढ़ प्रभावित गांवों में भी सतर्कता बढ़ गई है। लोग लगातार नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित बाढ़ को लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने तथा विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यदि नेपाल में वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो अगले 24 से 48 घंटे कमला नदी के तटीय क्षेत्रों के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।