झारखंड के पत्रकारों ने देखा भारत के अंतरिक्ष सफर का इतिहास
Ranchi News : झारखंड के पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केरल के ऐतिहासिक तुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (TERLS) का दौरा किया. इस प्रेस टूर का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (PIB), रांची ने PIB, तिरुवनंतपुरम के सहयोग से किया.


दौरे के दौरान पत्रकारों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत, अब तक की उपलब्धियों और आने वाले बड़े मिशनों के बारे में जानकारी दी गई. अधिकारियों ने बताया कि तुंबा में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सामान्य परिस्थितियों में हुई थी.
वर्ष 1962 में डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में धुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन की स्थापना की गई थी. तुंबा को इसलिए चुना गया क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय भूमध्य रेखा इस क्षेत्र से होकर गुजरता है. इससे वायुमंडल और आयनमंडल से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन के लिए यह जगह काफी उपयोगी है.
चर्च बना था वैज्ञानिकों का शुरुआती केंद्र
पत्रकारों को बताया गया कि अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दिनों में धुंबा में बहुत कम सुविधाएं थीं. उस समय वहां मौजूद सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च को स्थानीय मछुआरा समुदाय ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था. इसी चर्च में शुरुआती समय में वैज्ञानिकों का कार्यालय और प्रयोगशाला भी चलती थी.
यहीं से भारत के अंतरिक्ष सफर की मजबूत नींव रखी गई. 21 नवंबर 1963 को धुंबा से भारत का पहला साउंडिंग रॉकेट नाइक-अपाचे लॉन्च किया गया था. आज भी यहां साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किए जाते हैं और कई वैज्ञानिक गतिविधियां जारी हैं.
संग्रहालय में दिखी अंतरिक्ष की पूरी कहानी
दौरे के दौरान पत्रकारों ने अंतरिक्ष संग्रहालय का भी भ्रमण किया. यहां भारत और दुनिया के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी जानकारी, उपग्रहों, रॉकेट और अंतरिक्ष तकनीक के मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं.
पत्रकारों ने खास तौर पर कलाम कॉर्नर भी देखा. यह कॉर्नर पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के शुरुआती वैज्ञानिक जीवन और उनके योगदान को दिखाता है. डॉ. कलाम ने भारत के शुरुआती अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
गगनयान से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक की तैयारी
पत्रकारों को भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के बारे मंि भी जानकारी दी गई. इस मिशन का लक्ष्य भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित करना है.
इसके आगे भारत की योजना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की भी है. अंतरिक्ष दृष्टि-2047 के तहत भारत मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को लेकर कई बड़े लक्ष्य पर काम कर रहा है. इनमें भविष्य में एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य भी शामिल है.
तुंबा की साधारण शुरुआत से लेकर गगनयान और चंद्रमा तक की यह यात्रा भारत की अंतरिक्ष क्षमता और आत्मनिर्भरता के बढ़ते सफर को दिखाती है.
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