टीवी दुनिया की जानी-मानी अदाकारा अमनदीप सिद्धू ने याद किए अपने संघर्ष के और स्कूल के पुराने दिन

टीवी दुनिया की जानी-मानी अदाकारा अमनदीप सिद्धू ने याद किए अपने संघर्ष के और स्कूल के पुराने दिन

टीवी दुनिया की जानी-मानी अदाकारा अमनदीप सिद्धू ने याद किए अपने संघर्ष के और स्कूल के पुराने दिन

मनोरंजन जगत और टेलीविजन की दुनिया में अपनी बेहतरीन अदायगी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री अमनदीप सिद्धू (Amandeep Sidhu) आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। छोटे पर्दे पर अपने शानदार अभिनय से अपनी एक खास पहचान बनाने वाली अमनदीप के लिए ग्लैमरस इंडस्ट्री का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद किया और साथ ही अपने स्कूल के शुरुआती जीवन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से साझा किए। अमनदीप ने बताया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली लड़की ने हिंदी और अंग्रेजी की मुश्किलों को पार करते हुए अभिनय की दुनिया में अपना परचम लहराया। उनके बचपन के ये संस्मरण न केवल उनके स्वभाव की सादगी को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कड़े अनुशासन और मां के मार्गदर्शन ने उनके जीवन को किस तरह एक नई दिशा दी। आज टीवी के धारावाहिक 'गंगा माई की बेटियां' में अपनी अदायगी का जलवा बिखेरने वाली अमनदीप के स्कूल के दिनों की ये यादें उनके फैंस को भी काफी भावुक और प्रेरित कर रही हैं।

बचपन में बहुत बातें करती थीं अमनदीप, दिल्ली आने पर भाषा और उच्चारण को लेकर हुई थीं बड़ी परेशानियां

अपने स्कूल के शुरुआती दिनों के बारे में खुलकर बात करते हुए अमनदीप सिद्धू ने बताया कि वह बचपन में बेहद नटखट थीं और क्लास में बहुत ज्यादा बातें किया करती थीं। स्थिति यह थी कि स्कूल की प्रिंसिपल अक्सर उनकी मां से इस बात की शिकायत करने के लिए फोन किया करती थीं। अपने शुरुआती जीवन के सफर को याद करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया था, तब वह पंजाब में रहती थीं, लेकिन दूसरी कक्षा की पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद वह अपनी मां के साथ दिल्ली आ गईं। दिल्ली आने के बाद उनके सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई, क्योंकि उस समय उनकी हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाएं बहुत ज्यादा कमजोर थीं। उनकी बोलचाल और बातचीत करने के तरीके में पंजाबी भाषा और उसकी शैली का बहुत अधिक प्रभाव दिखाई देता था, जिसकी वजह से उन्हें कई बार कक्षाओं में अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता था। दिल्ली जैसे महानगर के स्कूल में ढलना और वहां के छात्र-छात्राओं के बीच अपनी जगह बनाना एक छोटी बच्ची के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उनकी मां के सहयोग और खुद की सीखने की ललक ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।

दिल्ली के स्कूल की सख्त 'डॉली मैम' और छड़ी से पिटाई का वो दौर, आज भी याद हैं वो कड़े अनुशासन के पल

अमनदीप सिद्धू ने अपने स्कूल के दिनों के उस सबसे डरावने और दिलचस्प अनुभव को साझा किया, जब उन्हें अपनी एक टीचर से गहरी नफरत हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली के जिस स्कूल में वह पढ़ती थीं, वहां डॉली नाम की एक अध्यापिका उन्हें अंग्रेजी पढ़ाया करती थीं, जो स्वभाव से बेहद सख्त और अनुशासनप्रिय थीं। वह क्लास में हमेशा इस बात पर जोर देती थीं कि सभी छात्र आपस में बातचीत करने के लिए केवल अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल करें। अमनदीप बताती हैं कि जब भी डॉली मैम की क्लास होती थी, उनके मन में एक अजीब सा डर बैठ जाता था और वह क्लास शुरू होने से पहले यही दुआ करती थीं कि किसी तरह मैम आज कक्षा में न आएं। उस कड़े अनुशासन का जिक्र करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि मैम क्लास में एक-एक कर सभी बच्चों को अपनी बेंच पर खड़ा करवा देती थीं और किताब में से अंग्रेजी के पैराग्राफ जोर-जोर से बोलकर पढ़ने के लिए कहती थीं। यदि किसी बच्चे से उच्चारण में कोई गलती हो जाती थी, तो डॉली मैम छड़ी से उनकी पिटाई भी करती थीं। उस दौर में छड़ी के डर और सख्ती की वजह से अमनदीप को अपनी उस इंग्लिश टीचर से नफरत सी हो गई थी, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि अगर वो कड़े नियम और वो टीचर नहीं होतीं, तो आज उनके अंदर अंग्रेजी बोलने का वो आत्मविश्वास कभी पैदा नहीं हो पाता।

मां की दूरदर्शिता और स्पेशल क्लासेज ने संवारी भाषा, अल्का अमीन बनीं इंडस्ट्री की पहली गुरु और प्रेरणा

सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा पंजाबी और हिंदी पर पकड़ मजबूत करने के पीछे अमनदीप ने अपनी मां के अमूल्य योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि जब वह सातवीं या आठवीं कक्षा में थीं, तब उनकी मां को ऐसा महसूस हुआ कि भले ही वह दिल्ली आ गई हैं, लेकिन उन्हें अपनी मूल भाषा पंजाबी नहीं भूलनी चाहिए। इसके लिए उनकी मां ने उन्हें विशेष तौर पर पंजाबी सीखने के लिए एक स्पेशल क्लास में दाखिल करवा दिया, जिससे वह अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहीं और साथ ही उनकी हिंदी और अंग्रेजी के व्याकरण में भी काफी सुधार हुआ। अपने पहले टीवी धारावाहिक 'ये प्यार नहीं तो क्या है' के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि तब भी उनकी हिंदी में पंजाबी लहजे का प्रभाव झलकता था। ऐसे में सेट पर उनकी मां की भूमिका निभाने वाली वरिष्ठ और दिग्गज अभिनेत्री अल्का अमीन ने उन्हें अपनी बेटी की तरह बहुत डांटा और समझाया, जिससे उन्हें अपनी हिंदी को परिष्कृत करने की प्रेरणा मिली। अल्का मैम जब भी शूटिंग के सेट पर आती थीं, तो वह सबसे पहले कैमरे को श्रद्धा से माथा टेकती थीं, और यही संस्कार अमनदीप ने भी उनसे सीख लिया। आज भी अमनदीप सेट पर पहुंचते ही सबसे पहले कैमरे को माथा टेकती हैं और मन ही मन प्रार्थना करती हैं, और इसी वजह से वह अल्का अमीन को इंडस्ट्री में अपनी पहली और सच्ची गुरु मानती हैं।