26 साल देश की सेवा की,अब तिरंगे में लौटा जवान: जमुई के मनीर अंसारी लेह-लद्दाख में शहीद; पत्नी बोली- बेटे को भी सेना में भेजूंगी - Jamui News
लेह-लद्दाख में देश की सेवा में तैनात जमुई के जवान मनीर अंसारी (43) ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में शहीद हो गए। जवान 26 साल से देश की सेवा कर रहे थे।
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बता दें कि मनीर अंसारी भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात थे।
शनिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव खरडीह पहुंचा, जिससे पूरे गांव में शोक छा गया।
रविवार सुबह नमाज के बाद सिकंदरा पुलिस ने मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा और थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
जवानों ने सलामी देकर देश की सेवा में उनके योगदान को याद किया। इसके बाद उन्हें कर्बला में दफनाया गया।
मौके से आई तस्वीरें….

मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई।

अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा जवान का शव।

लेह-लद्दाख से जवान का शव पहुंचा गांव।
2000 में सेना में हुए थे भर्ती
मनीर अंसारी जंमुई के सिकंदरा प्रखंड के खरडीह गांव के रहने वाले थे। साल 2000 में वो सेना में भर्ती हुए थे। इस बीच 2005 में उनकी शादी फरहीन सदफ से हुई थी।
उनके चचेरे भाई मु. जावेद ने बताया, 3 सितंबर की शाम फरहीन सदफ के मोबाइल पर सेना के एक सूबेदार का फोन आया था। उन्हें बताया गया कि ड्यूटी के दौरान मनीर हादसे का शिकार हो गए है। उनका इलाज आर्मी अस्पताल में चल रहा है।
ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को एक फट्टे की मदद से गाड़ी से उतारा जा रहा था। इसी दौरान फट्टा अचानक खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई।
मशीन मनीर के पैर पर गिर गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें तुरंत आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया।
परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद मनीर ठीक होकर घर लौट आएंगे, लेकिन शुक्रवार की सुबह सेना की तरह से फोन आया कि मनीर की इलाज के दौरान मौत हो गई।
ज्यादा ब्लड निकलने से गई जान
4 सितंबर की सुबह सेना के सूबेदार ने परिवार को मनीर की मौत की सूचना दी। परिजनों के मुताबिक इलाज के दौरान ज्यादा ब्लड निकलने से उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गई।
बेटी आलिया परवीन(19), बेटे मोहम्मद अरसलान अंसारी(15) का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। मनीर के शहीद की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे। हर कोई परिवार को ढांढस बंधा रहा था, लेकिन किसी के पास परिजन के इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे।

जवान के अंतिम दर्शन के लिए जुटी लोगों की भीड़।

स्थानीय नेता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
अंतिम विदाई में शामिल हुए सैकड़ों ग्रामीण
रविवार की सुबह मनीर अंसारी के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए ले जाया गया। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे।
जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और पुलिस पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई स्थानीय नेता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
मनीर अंसारी ने साल 2000 में सेवा शुरू की थी और करीब 26 सालों तक देश की सेवा की। लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी निभाते हुए उनका जीवन समाप्त हो गया।

शहीद जवान की पत्नी, 19 साल की बेटी और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।
'बेटे को सेना में भेजने के लिए कुछ भी करूंगी'
वहीं, शहीद जवान की पत्नी फरहीन सदफ ने कहा, 3 सितंबर की सुबह 7.30 बजे मेरी आखिरी बार पति से बात हुई थी। वह उस समय ऑफिस जाने की तैयारी कर रहे थे। इसके बाद उनसे दोबारा कोई बातचीत नहीं हो सकी।
जब मुझे शाम को उनके एक्सीडेंट के बारे में बताया गया, तब उनकी हालत सामान्य बताई गई थी। मुझे यह बिल्कुल नहीं बताया गया था कि मेरे पति की हालत इतनी गंभीर है कि उनकी जान भी जा सकती है। दूसरे दिन पता चला की उनकी मौत हो गई है।
फरहीन ने आगे कहा, अगर मेरा बेटा भी देश की सेवा कर पाए तो मैं जरूर उसे सेना में भेजना चाहूंगी। इसके लिए मैं कुछ भी करूंगी।