समुद्र में समा जाएगी मुंबई! सपनों की नगरी पर मंडरा रहा ऐसा कौनसा खतरा?

समुद्र में समा जाएगी मुंबई! सपनों की नगरी पर मंडरा रहा ऐसा कौनसा खतरा?

Sep 07, 2026 05:06 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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इस नई क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट में मुंबई की 149 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा, तटीय विकास और जमीन के बदलते इस्तेमाल से पैदा हुए खतरों का नक्शा तैयार किया जाएगा। यह रिपोर्ट अगले साल जारी होने की उम्मीद है।

Mumbai will be submerged in sea After five years BMC awakened

पिछले 5 सालों में मुंबई की तटीय रेखा का भूगोल काफी बदल गया है। (AI Image)

सदी के अंत तक समुद्र का जलस्तर बढ़ने से मुंबई के जलमग्न होने के मंडराते खतरे के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने शहर की संवेदनशीलता की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। पिछले पांच सालों में यह इस तरह की दूसरी बड़ी स्टडी है।

इस नई क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट में मुंबई की 149 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा, तटीय विकास और जमीन के बदलते इस्तेमाल से पैदा हुए खतरों का नक्शा तैयार किया जाएगा। यह रिपोर्ट अगले साल जारी होने की उम्मीद है।

UN की चेतावनी और कोस्टल रोड का असर

यह कदम संयुक्त राष्ट्र (UN) की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर रिकॉर्ड 5.9 mm बढ़ा है। साल 2100 तक इसमें कम से कम 0.5 मीटर और अंटार्कटिक बर्फ पिघलने की स्थिति में 2 मीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया, पिछले 5 सालों में मुंबई की तटीय रेखा का भूगोल काफी बदल गया है।

पश्चिमी तट पर मुंबई कोस्टल रोड के निर्माण के लिए अरब सागर के 100 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र को भरा गया है। पूर्वी तट पर नमक के मैदानों को विकास कार्यों के लिए चिन्हित किया गया है।

2022 के मुंबई क्लाइमेट एक्शन प्लान (MCAP) ने पहले ही अंदेशा जताया था कि 2050 तक मुंबई का 80% आईलैंड सिटी इलाका पानी में डूब सकता है।

अरब सागर का बढ़ता तापमान और बिगड़ता मौसम

मौसम वैज्ञानिकों और समुद्र विज्ञानियों के अनुसार, अरब सागर के सतही तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिन के तापमान में प्रति वर्ष 0.025°C की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रात के तापमान 0.019°C प्रति वर्ष की बढ़ोतरी हुई।

इससे बेमौसम मूसलाधार बारिश, अरब सागर में तेज चक्रवात और हाई टाइड (ऊंची लहरें) के एक साथ आना का खतरा बढ़ गया है।

आईआईटी बॉम्बे के विजिटिंग प्रोफेसर रघु मुर्तुगुडे के अनुसार, यूरोप और पश्चिम एशिया में बढ़ती गर्मी के कारण अरब सागर तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे मुंबई में कम समय में भारी बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं।

जलवायु परिवर्तन से ज्यादा कुछ और है कारण

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (IITM) के जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कॉल ने मुंबई के प्राकृतिक ढांचे के साथ खिलवाड़ पर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा, "बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) का निर्माण मैंग्रोव की जमीन पर किया गया, जबकि मीठी नदी को अतिक्रमण और सड़कों के निर्माण ने एक नाले में तब्दील कर दिया।"

डॉ. कॉल के अनुसार, "मुंबई की बाढ़ केवल जलवायु परिवर्तन की समस्या नहीं है, बल्कि यह अनियोजित और अंधाधुंध कंक्रीटीकरण का नतीजा है।"

2008 से 2021 के बीच तटीय कटाव और गाद जमा होने से मुंबई के 325 हेक्टेयर घने मैंग्रोव या तो नष्ट हो गए या पतले पड़ गए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर मुंबई को डूबने से बचाना है तो कोस्टल वेटलैंड्स और मैंग्रोव जंगलों को तत्काल संरक्षित करना होगा, जो शहर के प्राकृतिक 'फेफड़ों' और सुरक्षा दीवार का काम करते हैं।