वैश्विक खरीदारों का खरीद स्रोतों में विविधता पर जोर, बीआईआरसी में बढ़े पंजीकरण: आईआरईएफ

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) वैश्विक खरीदार लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी चावल खरीद के लिए अलग-अलग देशों और बाजारों के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में अक्टूबर में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 में उनकी रुचि बढ़ रही है। उद्योग निकाय भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) ने यह जानकारी दी।

आईआरईएफ 23 से 25 अक्टूबर तक भारत मंडपम में बीआईआरसी 2026 का आयोजन कर रहा है। अगस्त तक 138 देशों के 3,317 खरीदारों ने सम्मेलन के लिए पंजीकरण कराया है।

महासंघ के अनुसार, यह भारतीय चावल की विभिन्न किस्मों में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है।

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आईआरईएफ ने बीआईआरसी 2026 के लिए पंजीकृत विदेशी खरीदारों के बीच एक सर्वेक्षण भी किया है।

महासंघ ने बयान में कहा, ‘‘करीब 37 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रमों में भाग लेने के उनके फैसलों को प्रभावित किया है।’’

आईआरईएफ ने कहा कि सर्वेक्षण के नतीजे ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब दुबई, जो प्रदर्शनियों, अंतरराष्ट्रीय कारोबारी यात्राओं और खाद्य व्यापार के दुनिया के प्रमुख केंद्रों में से एक है, अपने कारोबारी मॉडल के लिए एक असामान्य चुनौती का सामना कर रहा है। यह कारोबारी मॉडल बेहतर संपर्क सुविधाओं और एशिया, अफ्रीका, यूरोप तथा पश्चिम एशिया के बीच दुबई की स्थिति पर आधारित है।

आईआरईएफ के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक जोखिम अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है।’’

गर्ग ने कहा कि सर्वेक्षण के नतीजों का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि खरीदार खाड़ी की स्थिति के कारण बीआईआरसी में आ रहे हैं। इसका यह मतलब भी नहीं है कि दुबई में होने वाले ‘गल्फूड’ जैसे स्थापित व्यापार मंचों की जगह आसानी से ली जा सकती है।

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से मिलने वाला महत्वपूर्ण संकेत यह है कि कंपनियां अब अपने सभी कारोबारी संपर्क और खरीद गतिविधियों के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय कई जगहों पर आपूर्तिकर्ताओं से मिलना चाह सकती हैं।

महासंघ ने कहा, ‘‘मुद्दा यह नहीं है कि दुबई वैश्विक प्रदर्शनी केंद्र के रूप में अपनी स्थिति खोने वाला है। ऐसा संकेत देने वाले बहुत कम प्रमाण हैं। अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक बनी रहने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितता कंपनियों को कुछ स्थापित केंद्रों पर अपनी अधिकतर गतिविधियां केंद्रित करने के बजाय व्यापार मेलों और खरीद स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित करेगी।’’

आईआरईएफ ने कहा कि वैश्विक प्रदर्शनी कारोबार में दुबई की स्थिति की बराबरी करना मुश्किल है। उसकी हवाई संपर्क सुविधाओं, आतिथ्य संबंधी बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं और बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मौजूदगी ने उसे कई क्षेत्रों के खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए प्रमुख कारोबारी केंद्र बना दिया है।

महासंघ ने कहा कि ‘गल्फूड’ इसका एक उदाहरण है। यह दुनिया के सबसे बड़े खाद्य और पेय खरीद मंचों में से एक है। इसके 2027 संस्करण में ‘दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ और दुबई प्रदर्शनी केंद्र में 195 देशों के 8,500 से अधिक प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है।

महासंघ ने कहा कि ऐसे बड़े मंचों के विस्तार से यह संकेत मिलता है कि दुबई की भूमिका खत्म नहीं हो रही है।

उसने कहा, ‘‘लेकिन भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार में नेतृत्व की स्थिति को तुरंत बदले बिना कंपनियों के कारोबारी व्यवहार को बदल सकते हैं। ईरान संघर्ष का अंतरराष्ट्रीय कारोबारी यात्राओं पर प्रभाव पहले ही खाद्य क्षेत्र से आगे बढ़ चुका है।’’

आईआरईएफ ने बताया कि अगस्त तक सम्मेलन से करीब दो महीने पहले ही 138 देशों के 3,317 अंतरराष्ट्रीय खरीदार बीआईआरसी 2026 के लिए पंजीकरण करा चुके थे। सबसे अधिक 336 पंजीकरण बांग्लादेश से हुए हैं।

भाषा राजेश राजेश योगेश अजय

अजय