सीएम धामी ने मेधावियों को बांटी छात्रवृत्ति, बोले- बच्चे देखें बड़े सपने, सरकार देगी हर मोड़ पर साथ
CM Dhami Gyan Ganga Samman: देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ. इस खास मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाने वाले शिक्षकों को मंच से सम्मानित किया. इसके साथ ही अपनी लगन से अव्वल आने वाले होनहार छात्र-छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के चेक सौंपे. मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित गुरुजनों और वजीफा पाने वाले बच्चों को बधाई देते हुए उनके शानदार भविष्य की कामना की. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिक समारोह नहीं है, बल्कि यह उभरती हुई प्रतिभाओं को तलाशने, उन्हें निखारने और उनके सपनों को नए पंख लगाने का एक मजबूत प्रयास है.
सपनों को साकार करने में भागीदारी जरूरी
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम किसी जरूरतमंद या मेधावी बच्चे की पढ़ाई में मदद करते हैं, तो वह केवल पैसे की सहायता नहीं होती. असल में हम उस बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और उसके जीवन के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में भागीदार बन रहे होते हैं. उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की धर्मपत्नी स्वर्गीय कुसुम कांता को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि संगीत, साहित्य और समाज सेवा के प्रति उनका जुड़ाव हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनके दिखाए सेवा भाव के रास्ते पर चलते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह सालों से लगातार सराहनीय काम कर रहा है. संस्था ने शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण की सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में जमीन पर उतरकर काम किया है. इसके साथ ही उन्होंने मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा समाज के हित में चलाई जा रही योजनाओं की भी दिल खोलकर तारीफ की.
राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं शिक्षक
भारतीय परंपरा और संस्कृति की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी मिट्टी में गुरु को हमेशा भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है. एक अच्छा शिक्षक केवल किताबों का पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि वह अपने शिष्य को नई सोच, गहरा आत्मविश्वास और बेहतरीन संस्कार देता है. गुरु ही वह पारखी होता है जो बच्चे के भीतर छिपे हुनर को पहचानकर उसे निखारता है. कक्षा के भीतर बैठा शिक्षक सिर्फ एक बालक को नहीं सिखा रहा होता, बल्कि वह आने वाले कल के पूरे भारत का ढांचा तैयार कर रहा होता है. मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ ऐसे मानवीय मूल्य और संस्कार भी सिखाएं, जिससे वे आगे चलकर एक अच्छे इंसान और देश के जिम्मेदार नागरिक बन सकें.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में देश की बदलती शिक्षा प्रणाली का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की पढ़ाई-लिखाई को आधुनिक, व्यावहारिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना रही है. उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में सबसे आगे रहा है, जिन्होंने इस आधुनिक शिक्षा नीति को सबसे पहले जमीन पर लागू किया. राज्य सरकार स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर ऊंचा उठाने के लिए लगातार काम कर रही है. इसके अलावा शिक्षकों और युवाओं के साथ पूरा न्याय हो, इसके लिए सरकारी भर्तियों की पूरी व्यवस्था को एकदम निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि योग्य युवाओं को बिना किसी रुकावट के उनका हक मिल सके.
परिवार और विद्यालय का तालमेल बेहद अहम
समारोह में पहुंचे माता-पिता और अभिभावकों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने एक जरूरी सलाह दी. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को केवल महंगी सुविधाएं या सुख-साधन देना ही काफी नहीं है. सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि माता-पिता बच्चों को अपना कीमती समय दें. उन्हें घर में अनुशासन और अच्छे संस्कार सिखाएं, ताकि जीवन के उतार-चढ़ाव में उनका हौसला कभी न टूटे. किसी भी बच्चे की तकदीर केवल स्कूल की चारदीवारी के भीतर नहीं बनती. इसके लिए परिवार और विद्यालय दोनों को मिलकर एक टीम की तरह काम करना पड़ता है. जब घर और स्कूल दोनों मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी मजबूत बनेगी.
असफलताओं से घबराए बिना आगे बढ़ें युवा
विद्यार्थियों में नया जोश भरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे हमेशा बड़े सपने देखें और उन्हें सच करने के लिए कड़ी मेहनत का रास्ता चुनें. जीवन में कभी अगर नाकामी मिले, तो उससे डरकर रुकना नहीं चाहिए, बल्कि उस गलती से सीख लेकर दोबारा दोगुनी ताकत से लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए. उन्होंने बच्चों को समझाया कि कठिन और पथरीले रास्ते ही अक्सर सबसे खूबसूरत और बड़ी मंजिलों तक पहुंचाते हैं. उत्तराखंड सरकार राज्य के हर एक होनहार छात्र के पीछे चट्टान की तरह खड़ी है और उन्हें आगे बढ़ने के तमाम मौके उपलब्ध कराएगी. छात्र चाहे बड़े होकर डॉक्टर बनें, इंजीनियर बनें, वैज्ञानिक बनें, खिलाड़ी बनें या फिर बड़े उद्योगपति बनें, सबसे पहले उनका एक संवेदनशील इंसान और सच्चा देशभक्त बनना सबसे ज्यादा जरूरी है.
स्वर्गीय कुसुम कांता के सेवा भाव को नमन
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी जीवनसंगिनी स्वर्गीय कुसुम कांता को याद करते हुए भावुक विचार रखे. उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक शिक्षिका थीं और आजीवन उन्होंने संस्कारों को सबसे ऊपर रखा. शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के पूरे चरित्र को गढ़ने का मजबूत माध्यम है. जब शिक्षक बच्चों में कर्तव्य की भावना भरते हैं, तो पूरा देश मजबूत होता है. इस दौरान डॉ. निशंक ने छात्रवृत्ति पाने वाले सभी विद्यार्थियों को देशहित में काम करने की सीख दी. इस भव्य आयोजन में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रोफेसर सुधारानी पाण्डेय, संस्था की संस्थापक विदुषी निशंक और आर्यन देव उनियाल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
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