मरीज की जान से खिलवाड़: बच्चे के सिर में टांका लगाते चपरासी का वीडियो वायरल, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
MOTIHARI: मरीज की जिंदगी से कथित लापरवाही का मामला पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से सामने आया है। पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक बच्चे के सिर में टांका लगाते हुए कथित तौर पर अस्पताल का चतुर्थवर्गीय कर्मचारी दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यशैली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि फर्स्ट बिहार इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
बच्चे के सिर में चपरासी ने लगाया टांका
बताया जा रहा है कि एक बच्चा घायल अवस्था में इलाज के लिए पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। उसके माथे और सिर पर चोट लगी थी। वायरल वीडियो में कथित तौर पर कृष्णा नामक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी बच्चे के सिर में टांका लगाते हुए दिखाई दे रहा है।
वीडियो में कर्मचारी द्वारा मरीज का उपचार किए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी है और उसने बिना अधिकृत चिकित्सकीय योग्यता के बच्चे का उपचार या टांका लगाया है, तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकीय कर्मियों की मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में किसी गैर-प्रशिक्षित या अनधिकृत कर्मचारी द्वारा उपचार किए जाने की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन ने मामले में कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, कर्मचारी द्वारा टांका लगाए जाने की परिस्थितियों और उसकी चिकित्सकीय योग्यता को लेकर विभागीय जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया यह कथित वीडियो जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
फिलहाल वायरल वीडियो की सत्यता और पूरे मामले की विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चे का उपचार किस परिस्थिति में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी द्वारा किया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

मोतिहारी से सोहराब आलम की रिपोर्ट