कैसे लीक हुई कश्मीरी पंडितों की जानकारी? आतंकियों के हाथ लगे फोन नंबर, बार-बार दे रहे धमकी
कैसे लीक हुई कश्मीरी पंडितों की जानकारी? आतंकियों के हाथ लगे फोन नंबर, बार-बार दे रहे धमकी
Sep 09, 2026 11:01 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, श्रीनगर।

बीते 7 सितंबर को एक्स पर एक पोस्ट में सबा कौल ने इसे एक बहुत बड़ा और चिंताजनक संकट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ULC ने कश्मीरी पंडित PM पैकेज कर्मचारियों को सीधी धमकी दी है।

जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है।
Kashmiri Pandit: जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर फिर एकबार चिंताएं बढ़ने लगी हैं। घाटी में पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे करीब 7000 कश्मीरी पंडितों इन दिनों चिंतित हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल की ओर से जारी नई धमकी भरी चिट्ठियों के बाद यह नई स्थिति बनकर उभरी है। खबर है कि उनके फोन नंबर, घर के पते और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की जानकारी ऑनलाइन लीक हो गई है। पिछले एक महीने में कम से कम पांच बार उन्हें ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं। इन कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि वे अपनी नौकरी छोड़ दें वरना उन्हें जानलेवा नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीरी पंडित एसोसिएशन (KPA), ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (AIKS) और मुंबई और दिल्ली में रहने वाले कई कश्मीरी पंडितों ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। एक कश्मीरी पंडित वकील ने कहा, "मेरा परिवार सरकारी कर्मचारियों में शामिल नहीं है। हम एक कारोबारी परिवार से आते हैं। इस बार धमकी सरकारी कर्मचारियों को दी गई है। लेकिन इससे इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के लिए हालात सुरक्षित नहीं हैं। घाटी में ऐसी धमकियां आम बात हो गई हैं।"
कैसे लीक हुआ कश्मीरी पंडितों का डेटा?
बीते 7 सितंबर को एक्स पर एक पोस्ट में सबा कौल ने इसे एक बहुत बड़ा और चिंताजनक संकट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ULC ने कश्मीरी पंडित PM पैकेज कर्मचारियों को सीधी धमकी दी है। कौल के पोस्ट में दावा किया गया कि कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की जानकारी ऑनलाइन लीक कर दी गई है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे नौकरी छोड़ दें, वरना उन्हें जानलेवा नतीजों का सामना करना पड़ेगा। कौल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यालय से उस घटना की जांच करने की अपील की है, जिसमें डेटा लीक की बात कही गई है।
डार्क वेब पर जारी किए गए थे धमकी पत्र
आपको बता दें कि कश्मीरी प्रवासियों के लिए पीएम पैकेज रोजगार योजना 2008 में शुरू हुई थी। केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों के लिए वापसी और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की थी। इसमें केंद्र की फंडिंग से राज्य सरकार की 3000 नौकरियां शामिल थीं। नवंबर 2015 में केंद्र ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत राज्य सरकार की 3000 और नौकरियों को मंजूरी दी। इसके साथ ही दोनों योजनाओं के तहत पदों की कुल संख्या 6000 हो गई। हालांकि, आतंकवादियों ने 7000 कश्मीरी पंडितों को धमकी दी है। ये धमकी भरे पत्र WhatsApp और Telegram पर फैलाए जाने से पहले डार्क वेब पर जारी किए गए थे।
केवल 800 घर ही आवंटित
पीएम पैकेज के तहत लगभग 6000 कर्मचारी करीब 15 वर्षों से कश्मीर घाटी में काम कर रहे हैं। उनमें से कई किराए के मकानों में रहते हैं। श्रीनगर और अनंतनाग में अलग-अलग जगहों पर 6042 क्वार्टर बनाए गए थे, लेकिन तीन वर्षों में उनमें से केवल 800 ही आवंटित किए गए हैं।
ULC ने एक महीने के भीतर कश्मीरी पंडितों को लेकर अपनी पांचवीं धमकी भरी चिट्ठी जारी की है। चिट्ठी में दावा किया गया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा बैठक के बाद प्रशासन प्रवासी पंडित कर्मचारियों को हल्के हथियार देने पर विचार कर रहा था।