प्रयागराज में गंगा-यमुना का फिर बढ़ा जलस्तर: हनुमान मंदिर का गर्भगृह भी जलमग्न, पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ा - Prayagraj (Allahabad) News
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प्रयागराज में गंगा-यमुना का फिर बढ़ा जलस्तर:हनुमान मंदिर का गर्भगृह भी जलमग्न, पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ा
प्रयागराज3 घंटे पहले
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प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में पिछले 24 घंटे की गिरावट के बाद बुधवार को फिर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। 9 सितंबर की शाम 4 बजे तक पिछले चार घंटे में नैनी में यमुना का जलस्तर 4 सेमी बढ़कर 81.57 मीटर, फाफामऊ में गंगा 1 सेमी बढ़कर 81.77 मीटर और छतनाग में यमुना 4 सेमी बढ़कर 81.09 मीटर पहुंच गई। एसटीपी बक्शी बांध पर भी जलस्तर 2 सेमी बढ़ा है।
हालांकि, दोनों नदियां अभी 84.734 मीटर के खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। जिले के सभी तटबंध सुरक्षित बताए गए हैं। दूसरी ओर, संगम स्थित श्री बड़े हनुमान मंदिर में बाढ़ का पानी अब भी भरा है। लगातार 11वें दिन श्री लेटे हनुमान जी शयन अवस्था में हैं और मंदिर का गर्भगृह जलमग्न है।
देखिए 2 तस्वीरें…

संगम स्थित श्री बड़े हनुमान मंदिर में बाढ़ का पानी अभी भी भरा हुआ है।

11वें दिन श्री लेटे हनुमान जी शयन अवस्था में हैं। मंदिर का गर्भगृह जलमग्न है।

रिवर फ्रंट रोड, नागवासुकी मंदिर, दारागंज घाट और श्री लेटे हनुमान मंदिर परिसर में पानी मौजूद है।
इन इलाकों में अब भी भरा पानी
रिवर फ्रंट रोड, नागवासुकी मंदिर, दारागंज घाट और श्री लेटे हनुमान मंदिर परिसर में अभी भी बाढ़ का पानी मौजूद है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन इन इलाकों और तटबंधों की स्थिति पर नजर रख रहा है।
पानी घटने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को कुछ राहत मिली है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकलने में अभी समय लग सकता है।
8 सितंबर को दर्ज हुई थी गिरावट
इससे पहले 8 सितंबर की सुबह जारी रिपोर्ट में गंगा और यमुना के जलस्तर में पिछले 24 घंटे में गिरावट दर्ज की गई थी। नैनी में यमुना 81.42 मीटर पर थी और 34 सेंटीमीटर की कमी दर्ज हुई थी। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 81.90 मीटर रहा, जहां 11 सेंटीमीटर की गिरावट हुई थी।
छतनाग में जलस्तर 80.96 मीटर और एसटीपी बक्शी बांध पर 81.57 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद बुधवार को चार घंटे की निगरानी में दोनों नदियों के जलस्तर में फिर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तटबंधों पर प्रशासन की नजर
प्रशासन की ओर से तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित और धार्मिक क्षेत्रों में जमा पानी को लेकर निगरानी जारी है।
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