सूडान का सस्ता सोना क्यों नहीं खरीदेगा स्विटजरलैंड, किस बात का है डर?

सूडान का सस्ता सोना क्यों नहीं खरीदेगा स्विटजरलैंड, किस बात का है डर?

सूडान के सोने पर स्विट्जरलैंड का बैनImage Credit source: getty image

सोना सिर्फ गहने बनाने या निवेश के काम नहीं आता. कई बार यही सोना युद्ध लड़ने के लिए पैसे का बड़ा जरिया भी बन जाता है. सूडान में 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच गृह युद्ध चल रहा है. इस युद्ध में सोने का कारोबार दोनों पक्षों के लिए कमाई का एक बड़ा स्रोत बन गया है. इसी वजह से स्विट्जरलैंड ने सूडान से आने वाले सोने की खरीद, आयात और ट्रांजिट पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. इसके साथ ही ऐसे सोने से जुड़ी वित्तीय मदद और दूसरी सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है.

स्विट्जरलैंड का कहना है कि सूडान में सोना अब सिर्फ व्यापार की चीज नहीं है, बल्कि युद्ध को चलाने के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है. अगर इस सोने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर पैसा मिलता रहा, तो उससे हथियार खरीदे जा सकते हैं और युद्ध को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता है. यह फैसला यूरोपीय संघ के कदम के बाद आया है. ईयू ने भी जुलाई 2026 में सूडानी सोने पर इसी तरह की पाबंदी लगाई थी.

स्विट्जरलैंड को क्यों है चिंता?

इस फैसले को समझने के लिए स्विट्जरलैंड की सोने की दुनिया में भूमिका समझना जरूरी है. स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिफाइनिंग और ट्रेडिंग सेंटर में से एक है. दुनिया के अलग-अलग देशों से कच्चा सोना यहां आता है. बड़ी रिफाइनरियां इसे साफ करके शुद्ध सोने में बदलती हैं. लेकिन समस्या यह है कि सोना हमेशा सीधे अपने मूल देश से नहीं आता. वह कई बार दूसरे देशों के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है. यही वजह है कि स्विट्जरलैंड को डर है कि कहीं सूडान का अवैध या युद्ध से जुड़ा सोना उसके बाजार में न पहुंच जाए.

स्विट्जरलैंड को डर किस बात का है?

स्विट्जरलैंड की चिंता सिर्फ अवैध सोने को लेकर नहीं है. उसे अपनी गोल्ड इंडस्ट्री की साख की भी चिंता है. अगर सूडान का सोना किसी दूसरे देश के रास्ते स्विट्जरलैंड पहुंचता है और यहां उसकी रिफाइनिंग हो जाती है, तो बाद में यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि वह सोना असल में कहां से आया था. ऐसे में स्विट्जरलैंड पर आरोप लग सकता है कि उसकी रिफाइनरियां अनजाने में ही सही, ‘कॉन्फ्लिक्ट गोल्ड’ यानी युद्ध से जुड़े सोने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने में मदद कर रही हैं.

स्विट्जरलैंड पर सवाल क्यों उठ सकते हैं?

सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच लड़ाई चल रही है. इस युद्ध ने देश में बड़ा मानवीय संकट पैदा किया है. युद्ध के दौरान सोना दोनों पक्षों के लिए कमाई का अहम जरिया बन गया है. सोने को बेचकर बड़ी रकम जुटाई जा सकती है. ऐसे में उस पर सूडान के युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग देने का आरोप लग सकता है. इसी जोखिम से बचने और अपनी गोल्ड इंडस्ट्री की साख बनाए रखने के लिए स्विट्जरलैंड ने सूडानी सोने पर प्रतिबंध लगाया है.

अंकिता

अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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