दशहरा-दिवाली के ऑर्डर, लेकिन मशीनें पानी में... भागलपुर के बुनकरों पर टूटा बाढ़ का कहर

दशहरा-दिवाली के ऑर्डर, लेकिन मशीनें पानी में… भागलपुर के बुनकरों पर टूटा बाढ़ का कहर

पावरलूम घरों में घुसा बाढ़ का पानी.

Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर में बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों के साथ-साथ रोजगार पर भी भारी पड़ रहा है. सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर के नाथनगर और चंपानगर के बुनकर बहुल इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं. बाढ़ का पानी पावरलूम घरों में घुसने से सिल्क और कपड़ा कारोबार पर सीधा असर पड़ा है. मशीनें पानी में डूब गई हैं और पावरलूम का काम पूरी तरह बंद हो गया है. इससे हजारों बुनकर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

पावरलूम घरों में घुसा बाढ़ का पानी

बाढ़ का पानी तेजी से नाथनगर और चंपानगर के रिहायशी और कारोबारी इलाकों में फैल गया. पानी पावरलूम घरों तक पहुंच गया, जिससे कई मशीनें डूब गईं. बिजली की मोटरों में पानी पहुंचने के खतरे को देखते हुए बुनकर उन्हें खोलकर सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं. वहीं, महंगे सूत को भी पानी से बचाने के लिए ऊंची जगहों पर रखा जा रहा है. बुनकरों का कहना है कि अगर मशीनों में पानी भर गया तो उन्हें दोबारा शुरू करने में काफी समय और पैसा लगेगा. फिलहाल पानी भरने के कारण पूरा काम बंद पड़ा है.

ये भी पढ़ें- भागलपुर में कोसी नदी का कहर, रेलवे लाइन बांध का 15 मीटर हिस्सा टूटा कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

त्योहारों के लाखों रुपए के ऑर्डर पर संकट

दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों को देखते हुए बुनकरों और कारोबारियों को बड़ी संख्या में ऑर्डर मिले थे. स्थानीय और दूसरे शहरों के व्यापारियों ने कपड़ों के लिए लाखों रुपए के ऑर्डर दिए थे, लेकिन बाढ़ के कारण पावरलूम बंद होने से अब समय पर तैयार माल देना मुश्किल हो गया है. बुनकरों और कारोबारियों को डर है कि अगर ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हुए तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और कई ऑर्डर रद्द भी हो सकते हैं.

चंपानगर के कई इलाके जलमग्न

चंपानगर का मस्जिद लेन, बोरिंग बाड़ी, मदनीनगर और गली नंबर एक से पांच तक का इलाका बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है. बताया जा रहा है कि करीब पांच हजार लोग इस बाढ़ से सीधे प्रभावित हैं. पानी लगातार जमा रहने और घरों में आने के खतरे के कारण कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं. लोगों के सामने घर और रोजगार, दोनों को बचाने की चुनौती है.

ये भी पढ़ें- बाढ़ ने छीना सहारा, छत बनी ठिकाना: पॉलिथीन के नीचे जिंदगी काटने को मजबूर परिवार, कटिहार से Ground Report

400-500 रुपए की मजदूरी भी बंद

बुनकरों का कहना है कि पावरलूम चलने पर उन्हें दिनभर काम करने के बाद करीब 400 से 500 रुपए की मजदूरी मिलती है. इसी कमाई से उनके परिवार का खर्च चलता है, लेकिन बाढ़ के कारण काम बंद होने से रोज की आमदनी पूरी तरह रुक गई है. बुनकरों के मुताबिक, इस इलाके में बाढ़ का पानी अक्सर डेढ़ से दो महीने तक जमा रहता है. अगर इस बार भी पानी लंबे समय तक रहा तो उनके सामने आर्थिक संकट और बढ़ सकता है.

जमा पूंजी से घर चलाने की मजबूरी

काम बंद होने के बाद कई परिवार अपनी जमा पूंजी से खर्च चलाने को मजबूर हैं. लोगों का कहना है कि उन्होंने यह पैसा घर बनाने, बच्चों की पढ़ाई या बेटी की शादी जैसे जरूरी कामों के लिए बचाकर रखा था. अब परिवार का पेट पालने के लिए उसी बचत को खर्च करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें अभी तक प्रशासन या सरकार की तरफ से पर्याप्त राहत और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं. बाढ़ ने सिर्फ उनके घरों को नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहे उनके रोजगार को भी प्रभावित किया है.

बुनकरों के सामने दोहरी मार

भागलपुर के नाथनगर और चंपानगर में पावरलूम उद्योग हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है. मशीनों के बंद होने से बुनकर, मजदूर, कारोबारी और कपड़ा कारोबार से जुड़े दूसरे लोग भी प्रभावित हुए हैं. बाढ़ का पानी कब तक रहेगा, यह साफ नहीं है, लेकिन अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर पूरे स्थानीय कपड़ा बाजार पर पड़ सकता है.

शिवम

शिवम

घूमने का शौक, The-VOB , Daily hunt न्यूज़ में 3 साल से ज्यादा के काम का अनुभव.

Read More

google button