हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेज किए हमले, दक्षिणी हिस्से में बरसाई मिसाइलें; ईरानी मीडिया का दावा
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेज किए हमले, दक्षिणी हिस्से में बरसाई मिसाइलें; ईरानी मीडिया का दावा
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट फिर से सुलगने लगा है. अमेरिका और ईरान की जंग के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और लगातार हमले कर रहे हैं. ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने दावा किया है कि हूतियों ने हमले तेज कर दिए हैं.
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट फिर से सुलगने लगा है. अमेरिका और ईरान की जंग के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और लगातार हमले कर रहे हैं. ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने दावा किया है कि हूतियों ने हमले तेज कर दिए हैं.
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हूती विद्रोहियों ने तेज किए सऊदी अरब पर हमले Photograph: (Social Media)
Middle East Tension: मध्य पूर्व में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बाद अब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इस बीच ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने सोमवार को दावा किया कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं.
सऊदी अरब पर लगातार हमले कर रहे हूती विद्रोही
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी सिविल डिफेंस ने देश के दक्षिण-पश्चिमी शहरों खमीस मुशैत और आभा में लोगों को सतर्क करने की चेतावनी दी है. ये चेतावनी बेहद कम समय के भीतर दी गई है. हालांकि बाद में इन चेतावनियों को वापस ले लिया गया. बता दें कि ये दोनों शहर यमन की सीमा के करीब स्थित हैं. बताया जा रहा है कि ये घटनाएं हूती हमलों के बीच हुई हैं.
हूती विद्रोहियों ने जुलाई में दी थी नाकेबंदी की धमकी
हूती समूह यमन के घनी आबादी वाले कई इलाकों और देश के उत्तरी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है. इस विद्रोही समूह ने जुलाई में रियाद के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा के बाद सऊदी अरब के ऊर्जा संयंत्रों और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी.
हमलों के चलते स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित
इस बीच यमन के पश्चिमी तट पर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी संकट गहराने की खबर है. अल जजीरा के मुताबिक, वहां मौजूद अस्पतालों को मेडिकल सुविधाओं में आई बाधाओं के चलते मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की यमन कंट्री डायरेक्टर लू कॉर्मैक ने पश्चिमी तट की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर कमियों की बात कही है. उनके मुताबिक, बीते सप्ताह के आखिर में सुरक्षा परिस्थितियों के कारण कई अस्पतालों को खाली करना पड़ा. जबकि कुछ समय तक मोचा जनरल हॉस्पिटल में सीमित जरूरी सेवाएं ही जारी रखी गईं.
कॉर्मैक ने बताया कि कुछ अस्पतालों ने दोबारा काम शुरू कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था अब भी दबाव में है. अस्पतालों को संचालित रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बनी हुई है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी तट पर बड़ी आबादी रहती है और वहां सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार जरूरत है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार मरीजों के लिए चिकित्सा सुविधाओं गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है.
रविवार को भी हूती विद्रोहियों ने किए सऊदी अरब पर हमले
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के हवाले से यह भी दावा किया गया कि रविवार को संगठन ने सऊदी अरब के शरूराह क्षेत्र में एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया. उनके मुताबिक, हमले में हथियारों के भंडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को लक्ष्य बनाया गया. अल जजीरा की रिपोर्ट में सऊदी सीमा क्षेत्र में हुए एक हूती हमले के दौरान दो लोगों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है.
अमेरिका से नहीं मिली सऊदी अरब को मदद
वहीं, सीबीएस न्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आग्रह किया था. रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया. बता दें कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत ब्रिक्स देशों ने संयम और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है.
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शनिवार को जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की. घोषणापत्र में ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने की बात कही गई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिति और खराब हो सकती है. ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया.
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