छाती दबाना, सलवार खोलने का प्रयास करना; रेप की कोशिश नहीं : हाईकोर्ट - Patna News

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पटना17 मिनट पहले

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कहा, यह अपराध लज्जा भंग करने के बराबर है, पटना हाईकोर्ट ने बांका के एक मामले में निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए आरोपी को बरी किया

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी युवती को बंधक बनाना, उसकी छाती दबाना और सलवार उतारने का प्रयास करना आईपीसी की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का अपराध है। इसे दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने बांका के अमरपुर थाना कांड संख्या 14/2008 में निचली अदालत का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने अपीलकर्ता हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिथिया पाठक को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हिमांशु अमरपुर स्थित छाया स्टूडियो का संचालक है। कोर्ट ने कहा कि मामले में मेडिकल साक्ष्य नहीं हैं। दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने वाला कोई स्पष्ट प्रत्यक्ष कृत्य भी रिकॉर्ड पर नहीं है।

3 साल की सजा मिली थी बांका के अपर सत्र न्यायाधीश-1 ने 1 नवंबर 2023 को हिमांशु कुमार पाठक को आईपीसी की धारा 376/511 के तहत दोषी ठहराया था। उसे तीन साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी करीब साढ़े तीन महीने जेल में रह चुका है। वह पहले से जमानत पर है। इसलिए उसे बेल बॉन्ड से भी मुक्त किया जाता है। यदि उसने जुर्माने की राशि जमा की है तो उसे वापस की जाए।

लापरवाही... डॉक्टर की गवाही नहीं, एक गवाह पलटा मामले के जांच अधिकारी (आईओ) की अदालत में गवाही नहीं कराई गई। मेडिकल जांच करने वाले किसी डॉक्टर की गवाही भी नहीं हुई। रिकॉर्ड पर दुष्कर्म के प्रयास का कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं था। पीड़िता की मां घटना की प्रत्यक्षदर्शी नहीं थीं। उनकी गवाही सुनी-सुनाई बात पर आधारित थी। स्थानीय गवाह मो. सलाम अदालत में मुकर गया। मामला पीड़िता और उसके पिता के बयानों पर आधारित रहा। हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के प्रयास के लिए पेनेट्रेशन की दिशा में स्पष्ट कानूनी कृत्य या ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। हाईकोर्ट के अनुसार अभियोजन धारा 376/511 का आरोप साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने लड़की को स्टूडियो में बंद किया, उसका सलवार खोलने की कोशिश की। आरोपी का कृत्य आईपीसी की धारा 354 के दायरे में आता है, न कि दुष्कर्म के प्रयास में।

इस तरह के फैसले पलट चुका है सुप्रीम कोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट का ‘स्किन टू स्किन’ विवाद हाईकोर्ट ने क्या कहा: जनवरी 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट की जज पुष्पा गनेडीवाला ने आरोपी को बरी कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा: 19 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को पूरी तरह पलट दिया। अदालत ने साफ कहा कि यौन हमले के लिए केवल यौन इरादा होना जरूरी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ‘रेप की तैयारी’ विवाद हाईकोर्ट ने क्या कहा: 17 मार्च 2025 को जज राम मनोहर नारायण मिश्र ने रेप प्रयास की धारा हटा दी। कोर्ट ने कहा कि नाड़ा तोड़ना और निजी अंग पकड़ना केवल एक अपराध की तैयारी थी, वास्तविक प्रयास नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा: 25 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलटा। कहा- यह सीधे तौर पर रेप की कोशिश ही माना जाएगा।

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