रूस पर नए प्रतिबंधों की तैयारी, रूसी तेल खरीदने पर भारत पर भी लग सकता है अमेरिकी टैरिफ
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रूस पर नए प्रतिबंधों की तैयारी, रूसी तेल खरीदने पर भारत पर भी लग सकता है अमेरिकी टैरिफ
- Edited by: पूजा कुमारी
- Updated Jul 15, 2026, 06:10 AM IST
अमेरिकी सीनेट में रूस पर कड़े प्रतिबंधों से जुड़ा नया विधेयक पेश किया गया है। इसमें भारत समेत पांच देशों पर रूसी तेल खरीदना जारी रखने पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि टैरिफ की दर अभी तय नहीं हुई है।
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US का नया रूस प्रतिबंध बिल, भारत समेत 5 देशों पर टैरिफ का प्रस्ताव (सांकेतिक फोटो)
US Russia Sanctions Bill: अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सीनेटरों (सांसदों) ने मिलकर रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक (Bill) पेश किया है। इस विधेयक के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के लिए दुनिया के पांच देशों पर भारी आयात शुल्क (Tariffs/टैक्स) लगाया जा सकता है। इस प्रस्ताव में भारत का भी नाम शामिल है। हालांकि यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है। ट्रंप प्रशासन ने बिल का समर्थन किया है, लेकिन इसके कानून बनने से पहले संसदीय मंजूरी जरूरी होगी।
क्या है नया प्रस्ताव?
अमेरिकी सीनेट में पेश इस बिल का मकसद रूस की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, रक्षा और वित्तीय क्षेत्र पर सख्त प्रतिबंध लगाना है। इसके साथ ही रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। इस विधेयक को 'लिंडसे ग्राहम रूस अकाउंटेबिलिटी बिल' नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का हाल ही में निधन हुआ है, उन्होंने अपनी मौत से पहले इस बिल को तैयार करने में पूरी ताकत झोंक दी थी।
भारत समेत 5 देशों का नाम
बिल में दुनिया के उन पांच बड़े देशों का नाम शामिल हैं, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। इन पर इस कानून के तहत टैक्स लगाया जा सकता है। इन 5 देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम शामिल किया गया है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इन देशों पर टैरिफ लगाकर रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बनाया जाएगा। इसके अलावा रूस से गैस खरीदने वाले देशों पर भी नजर रखी जाएगी, हालांकि बिल में उन यूरोपीय देशों को थोड़ी राहत दी गई है जो रूस पर अपनी निर्भरता लगातार कम कर रहे हैं।
टैरिफ की दर अभी तय नहीं
सीनेटरों ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ की वास्तविक दर अभी तय नहीं की गई है। इसे अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) तय करेगा। सांसदों का कहना है कि यह दर इतनी अधिक रखी जाएगी जिससे भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल खरीदना बंद करने पर मजबूर हो जाएं।
भारत का क्या है रुख?
भारत साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस से रियायती दरों (Discounted Price) पर कच्चा तेल खरीद रहा है। मौजूदा समय में भारत की कुल तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा रूस से आयात होता है। भारत लगातार कहता रहा है कि रूस से रियायती दर पर तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और देश के उपभोक्ताओं के हित में है। भारत का मानना है कि इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिलती है।
ट्रंप प्रशासन ने दिया समर्थन
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बिल का पूर्ण समर्थन करते हैं। इस नए कानून के पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के पास यह अधिकार होगा कि वह रूस के ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) के साथ व्यापार करने वाले देशों से आने वाले सामान पर 500% तक का भारी-भरकम टैक्स लगा सकें।
अभी कानून नहीं बना है बिल
इस बिल को कानून बनने के लिए अभी अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (संसद के दोनों सदनों) से मंजूरी मिलनी जरूरी है। जिसके बाद यह राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए जाएगा। अमेरिकी सांसदों को उम्मीद है कि अगस्त के अंत से पहले इस बिल पर वोटिंग करा ली जाएगी।
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पूजा कुमारी author
पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी... और देखें
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