वोट-सरकार के बाद अब पार्टी चोरी... ममता के समर्थन में उतरे राहुल, सरकार-चुनाव आयोग को घेरा

ममता बनर्जी के साथ राहुल गांधी (फाइल फोटो)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सिंबल को लेकर आए फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ ही चुनाव आयोग (EC) पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट करके कहा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है. राहुल का आरोप है कि BJP और EC मिलकर पहले किसी दल को तोड़ते हैं और फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लेते हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है. उन्होंने अपने बयान में कहा कि वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं. राहुल ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग का काम जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके मुताबिक वह ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलट देती हैं.
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न – BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2026
राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है. दरअसल, पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी हार का सामना करना पड़ा. इस हार के बाद TMC के विधायकों में टूट हो गई. अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया. बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं.
सिंबल पर चुनाव आयोग का फैसला
इसके बाद TMC के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई. दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा. चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है. आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है. EC ने कहा कि विवाद पर अंतिम फैसला देने के लिए पैरा 15 के तहत विस्तृत कार्यवाही जरूरी है.
उपचुनाव तक लागू रहेगी व्यवस्था
चुनाव आयोग का यह अंतरिम आदेश 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर लागू किया गया है. दोनों गुट फिलहाल न तो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम का अकेले इस्तेमाल कर सकेंगे और न ही फूल और घास वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह का. आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह चुनने का विकल्प दिया है. गुट अपने नाम में मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से संबंध का जिक्र कर सकते हैं.
दोनों गुटों को देने होंगे 3 नाम और 3 चुनाव चिन्ह
आयोग ने दोनों पक्षों को आज सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद बताने का निर्देश दिया है. प्रत्येक गुट को तीन संभावित नाम प्राथमिकता क्रम में देने होंगे. आयोग इनमें से किसी एक नाम को मंजूरी दे सकता है. इसी तरह दोनों गुट अपने उम्मीदवारों के लिए तीन पसंदीदा मुक्त चुनाव चिन्ह भी प्राथमिकता क्रम में दे सकेंगे. आयोग उपलब्ध फ्री सिंबल की सूची में से किसी एक चिन्ह को संबंधित गुट के उम्मीदवारों के लिए आवंटित कर सकता है.
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