राधा अष्टमी का व्रत क्या दोपहर तक रखा जाता है? जानें राधा अष्टमी व्रत नियम, विधि और पारण का समय

राधा अष्टमी का व्रत क्या दोपहर तक रखा जाता है? जानें राधा अष्टमी व्रत नियम, विधि और पारण का समय

Published: Friday, September 18, 2026, 16:15 [IST]

Radha Ashtami 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि को राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इस दिन को हर साल राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद राधा-कृष्ण की पूजा का संकल्प लेते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं। दोपहर के समय राधारानी की विशेष पूजा, कथा और आरती की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी पर राधारानी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस साल राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। आइए, जानते हैं राधा अष्टमी का व्रत कैसे रखें, राधा अष्टमी व्रत के नियम, पूजा विधि और पॉर्न का समय -

Radha Ashtami Vrat 2026 Rules
फोटो क्रेडिट: ChatGPT

राधा अष्टमी 2026: व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि शुरू: 18 सितंबर 2026, दोपहर 1:02 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर 2026, दोपहर 3:28 बजे
मध्याह्न पूजा का शुभ समय: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
पूजा की अवधि: करीब 2 घंटे 27 मिनट

राधा अष्टमी का व्रत कब से कब तक रखा जाता है?

राधा अष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक रखा जाता है। वहीं, कुछ लोग अगले दिन यानी नवमी को पारण करते हैं।

राधा अष्टमी व्रत के नियम

सात्विक भोजन करें: व्रत के दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है। व्रत खोलने के बाद भी भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

राधारानी का स्मरण करें: व्रत के दौरान राधारानी का ध्यान करें और भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप करें। इस दौरान "हरे कृष्ण" महामंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

अपनी सेहत का ध्यान रखें: व्रत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही रखना चाहिए। श्रद्धालु अपनी सुविधा के मुताबिक निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन करके उपवास रख सकते हैं।

राधा अष्टमी व्रत की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें।
इसके बाद पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद वहां राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर रखें और पूजा की तैयारी करें।
सुविधा हो तो राधा-कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें साफ और सुंदर वस्त्र पहनाएं और फूलों से उनका श्रृंगार करें।
पूजा के दौरान राधा रानी और श्रीकृष्ण को फल, खीर, मालपुआ, माखन-मिश्री या अपनी पसंद की सात्विक मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। भोग में तुलसी जरूर रखें।
पूजा के समय राधा अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा के बाद राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और पूजा पूरी करें।

व्रत खोलने का समय और पारण

राधा अष्टमी व्रत खोलने को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। राधा रानी का व्रत दोपहर के समय खोला जाता है। अक्सर इस व्रत का पारण दोपहर बजे के बाद या मध्याह्न पूजा मुहूर्त जैसे लगभग 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे के बीच में किया जाता है। वहीं, जो लोग पूरे दिन या 24 घंटे का व्रत रखते हैं, वे नवमी तिथि की सुबह स्नान और पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं।

Story first published: Friday, September 18, 2026, 16:15 [IST]