मिथाइल एम्फेटामिन ड्रग से कई दिनों तक नींद नहीं आती: मुजफ्फरपुर के बशीर कैसे फंसा इस ड्रग्स केस में, मुबई में पूछताछ, पत्नी बोली- वह सिर्फ मक्का बेचते - Muzaffarpur News

मिथाइल एम्फेटामिन ड्रग से कई दिनों तक नींद नहीं आती:मुजफ्फरपुर के बशीर कैसे फंसा इस ड्रग्स केस में, मुबई में पूछताछ, पत्नी बोली- वह सिर्फ मक्का बेचते

मुजफ्फरपुर44 मिनट पहले

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‘मेरे पति को किस जुर्म में ले जा रहे हैं, हमें इतना तक नहीं बताया। कहा था पूछताछ करके छोड़ देंगे, लेकिन अब उन्हें मुंबई ले गए। अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो जांच हो, लेकिन अगर उन्हें गलत फंसाया गया है तो हमारे परिवार की मदद कौन करेगा?’

मुजफ्फरपुर के बोचहां के उनसर गांव की रहने वाली मदीना ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह दर्द बयां किया।

दरअसल 17 सितंबर को मुंबई DRI ने मदीना के पति 48 साल के मोहम्मद बशीर हवारी उर्फ फरहान को 55.860 किलो मिथाइल एम्फेटामिन की खेप कनेक्शन में गिरफ्तार किया। यह खेप मक्के के दानों के बीच छिपाकर विदेश भेजी जा रही थी।

DRI अधिकारियों ने कहा कि बशीर पर इस खेप की खरीद, भंडारण और लोडिंग में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच एजेंसी उसके कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से संपर्क की भी जांच कर रही है।

इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स मक्के के बीच किसने छिपाई? मक्का कहां से आया? इसे मुंबई तक कौन लेकर आया? और इस पूरी खेप के पीछे कौन-कौन लोग हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

पहले पूरा मामला समझिए.. 16 अगस्त, 2026 को मुंबई के न्हावा शेवा में एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर विदेश भेजे जाने वाले एक एक्सपोर्ट कंसाइनमेंट की जांच की जा रही थी। कंसाइनमेंट में मक्के के दाने थे।

जांच के दौरान अधिकारियों को मक्के के बीच सफेद रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ छिपा मिला। जांच में यह पदार्थ मिथाइल एम्फेटामिन निकला। पूरी खेप करीब 55.860 किलो थी। DRI ने पूरी जांच के बाद 17 अगस्त को इसे जब्त कर लिया।

अधिक जांच के बाद पता चला कि कंसाइनमेंट एक ट्रेडिंग कंपनी के नाम से विदेश भेजे जाने के लिए बुक किया गया था। तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई।

खेप की खरीद, स्टोरेज, पैकिंग और लोडिंग से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ी गईं। करीब एक महीने तक की जांच के बाद 17 सितंबर को मुंबई से डीआरआई की टीम मुजफ्फरपुर के बोचहां के उनसर गांव तक पहुंची, और बशीर को घर से अरेस्ट कर मुंबई ले गई।

फिर स्थानीय CJM कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर DRI को सौंप दिया। इसके बाद टीम बशीर को लेकर मुंबई रवाना हो गई। उसे महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के उरण स्थित न्यायालय में पेश किया जाना है।

परिवार ने क्या क्या बताया, सिलसिलेवार पढ़िए… बशीर की गिरफ्तारी के बाद दैनिक भास्कर की टीम मुजफ्फरपुर के उनसर गांव पहुंची। यहां उसकी पत्नी मदीना खातून ने घटना और परिवार से जुड़ी जानकारी साझा की।

मदीना ने कहा, ‘मेरे पति पिछले एक साल से घर पर ही रहते थे। गाड़ी खरीदने-बेचने और किराये पर गाड़ी चलाने का काम करते थे। हमारे चार बच्चे हैं। इसी काम से घर चलता था। हमें कभी नहीं लगा कि उनका किसी नशीले पदार्थ के कारोबार से कोई संबंध है।

ललन चौधरी से मक्का दिलवाया गया था। किसी परिचित के कहने पर मक्का बाहर भेजना था। हमें इतना ही पता था कि मक्का भेजा जाना है। यह किस कंपनी या व्यक्ति के पास जाएगा, इसकी जानकारी हमें नहीं थी। अगर मक्के के अंदर ड्रग्स निकली है तो इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन मेरे पति को इसकी जानकारी थी, यह हम नहीं मानते।

जब टीम बशीर को ले जाने आई तो हमने पूछा कि इन्हें क्यों ले जा रहे हैं। हमें बताया गया कि पूछताछ के लिए थाने ले जा रहे हैं और पूछताछ के बाद छोड़ देंगे। हमें यह नहीं बताया गया कि मामला इतना बड़ा है और उन्हें मुंबई ले जाया जाएगा। बाद में हमें पता चला कि उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई ले जाया गया है।

हमें हाजी या आशीष पाल नाम के किसी व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेरे पति का विदेश में किसी व्यक्ति से संपर्क था, ऐसी जानकारी भी हमें कभी नहीं रही।

अगर उनके मोबाइल की जांच होगी तो उनकी लोकेशन और संपर्क सब सामने आ जाएंगे। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। जांच एजेंसी के पास अगर कोई सबूत है तो वह जांच में सामने आएगा।’

भाई बोला- दिल्ली में होटल में काम किया, फिर बोलेरो चलाने लगे

बशीर चार भाइयों में तीसरे नंबर पर है। उसके छोटे भाई ने कहा, ‘हमारे सामने तो भाई गाड़ी चलाकर ही कमाता था। उसने दिल्ली में होटल में काम किया था। फिर गांव आकर बोलेरो चलाने लगा। सामान पहुंचाने का काम भी करता था। मक्का भेजने की बात हमें पता थी, लेकिन उसमें ड्रग्स है, यह हमें नहीं पता था। परिवार को भी इसकी जानकारी मुंबई में खेप पकड़े जाने के बाद ही मिली।’

सरपंच बोले- गांव में बशीर को गाड़ी चलाते ही देखा उनसर पंचायत के सरपंच रघुनाथ राय के मुताबिक, गांव में बशीर की पहचान गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के रूप में रही है। उन्होंने बताया कि बशीर को ज्यादातर समय गाड़ी चलाते और परिवार के साथ रहते हुए ही देखा गया है।

रघुनाथ राय ने कहा, ‘बशीर को हम लोग गाड़ी चलाते हुए ही देखते रहे हैं। गांव में उसकी छवि ऐसी नहीं रही कि वह कोई नशीला पदार्थ का कारोबार करता हो। अधिकारियों से हमें इतना पता चला कि गायघाट के ललन चौधरी से मकई खरीदवाकर किसी दूसरे व्यक्ति को भेजी गई थी।

जांच में ‘हाजी’ और आशीष पाल का नाम मामले की जांच में बशीर के कथित संपर्कों को लेकर एक अलग कड़ी भी सामने आई है। DRI के मुताबिक, बशीर के संपर्क एक अफगानी नागरिक से थे, जिसे ‘हाजी’ के नाम से बताया गया है।

एजेंसी का दावा है कि हाजी के कथित प्रतिनिधि आशीष पाल के संपर्क में भी बशीर था। DRI के अनुसार, इन्हीं संपर्कों के जरिए नशीले पदार्थ की खेप की खरीद, भंडारण और लोडिंग की व्यवस्था की जा रही थी।

DRI के मुताबिक, बशीर की भूमिका नशीले पदार्थ की खरीद, भंडारण और लोडिंग से जुड़ी होने की जांच की जा रही है। एजेंसी उसके कथित संपर्कों और खेप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।

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