सागर शराब कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन: मुख्य सचिव को पालन हेतु भेजा
भोपाल समाचार, 20 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश में सागर शराब कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब और अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री की रोकथाम के लिए नई गाइडलाइन जारी की है और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को, गाइडलाइन के पालन हेतु नियुक्त किया है। हालांकि यह गाइडलाइन सागर शराब कांड के कारण जारी नहीं हुई है, बल्कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा जहरीली शराब की रोकथाम के नाम पर बनाए गए मनमाने कानून के खिलाफ याचिका के फैसले में जारी की गई है परंतु इस मामले में सागर शराब कांड का उल्लेख जरूर हुआ है।
मेसर्स बालाजी फॉर्मेलिन प्रा. लि. एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य
सर्वोच्च न्यायालय ने 'मेसर्स बालाजी फॉर्मेलिन प्रा. लि. एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य' (Writ Petition (C) No. 893/2019) मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) के लिए विस्तृत और कड़े दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने रजिस्ट्री को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस फैसले की एक-एक प्रति देश के सभी उच्च न्यायालयों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तुरंत भेजी जाए, ताकि जहरीली शराब (Hooch) की त्रासदियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत सुधार लागू किए जा सकें।
राज्य प्रशासन और मुख्य सचिव के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश
न्यायालय ने कहा कि जहरीली शराब की त्रासदियां रोकने के लिए केवल वैध उद्योगों पर प्रतिबंध लगाना बेअसर है; असली जरूरत आबकारी कानूनों और प्रशासनिक तंत्र के कड़े क्रियान्वयन की है। कोर्ट द्वारा तय किए गए मुख्य निर्देश निम्नलिखित हैं:
सप्लाई चेन तोड़ना: राज्यों को अवैध शराब की मांग और आपूर्ति की श्रृंखला तोड़ने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसमें आबकारी, पुलिस, परिवहन, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक न्याय विभाग और एनजीओ (NGOs) मिलकर काम करेंगे।
सीमाओं पर सतर्कता: राज्य परिवहन विभाग को सीमाओं पर चेकिंग स्क्वाड तैनात करने होंगे ताकि निजी वाहनों के माध्यम से होने वाले अवैध शराब परिवहन पर रोक लग सके।
स्कूली मैदानों की निगरानी: अक्सर नगर निगम के खुले स्कूली मैदानों का इस्तेमाल अवैध शराब के भंडारण के लिए किया जाता है; अतः शिक्षा विभाग को ऐसे परिसरों की जांच कर क्षेत्रीय पुलिस को रिपोर्ट सौंपनी होगी।
केमिकल सॉल्वेंट इकाइयों पर नजर: उद्योग विभाग को ऐसी औद्योगिक इकाइयों की सख्त निगरानी करनी होगी जो केमिकल सॉल्वेंट्स का निर्माण करती हैं, ताकि इन्हें अवैध शराब निर्माताओं तक पहुंचने से रोका जा सके।
मेथनॉल परिवहन, स्टॉक और लाइसेंसिंग के कड़े नियम:
- अवैध शराब परिवहन में पकड़े गए वाहनों को अदालती आदेश से पहले किसी भी बॉन्ड या ज़मानत पर रिहा न किया जाए।
- लाइसेंस और परमिट का आवंटन केवल आवेदक की पृष्ठभूमि, साख और वास्तविक आवश्यकता के गहन सत्यापन के बाद ही हो। साथ ही जारी लाइसेंसों की नियमित जांच की जाए।
- औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता से अधिक या अप्रयुक्त (unused/excess) मेथनॉल को एक तय समय सीमा के भीतर विक्रेता या निर्धारित अथॉरिटी को वापस करना अनिवार्य होगा।
- मेथनॉल के प्रत्येक लाइसेंस धारक को खपत और क्लोजिंग स्टॉक का रिकॉर्ड रखना होगा। यदि स्टॉक के मिलान में कोई अंतर पाया जाता है, तो तुरंत जांच की जाएगी।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाएं और उन्हें भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट (debar) किया जाए।
- मेथनॉल का परिवहन केवल इसी कार्य के लिए निर्धारित समर्पित टैंकरों में आबकारी अधिकारियों की देखरेख में होगा। इन टैंकरों पर 'टैम्पर-एविडेंट सील' (tamper-evident seal) लगाना अनिवार्य होगा, जिसे केवल गंतव्य पर अधिकृत व्यक्ति ही खोल सकेगा।
स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और नशामुक्ति
- राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को शराब त्रासदियों से निपटने के लिए एक विशेष सेल और आपदा प्रबंधन नीति (disaster management system) तैयार करनी होगी ताकि आपात स्थिति में अस्पतालों में विष-रोधी दवाएं व उपकरण उपलब्ध रहें।
- राज्यों में नशामुक्ति केंद्रों (De-addiction Centers) की संख्या बढ़ाई जाए और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए स्थानीय स्तर पर परिवार परामर्श केंद्र (family counseling centers) स्थापित किए जाएं।
- राज्य सरकारें और गैर-सरकारी संगठन आबकारी व शराबबंदी कानूनों के प्रति जनता में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य जनस्वास्थ्य की सुरक्षा करना और अवैध हेराफेरी (pilferage and diversion) के मूल कारणों पर प्रहार करना है। कोर्ट की रजिस्ट्री ने आदेश के पालन हेतु यह निर्णय सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को अग्रेषित कर दिया है।
